हल्द्वानी, 26 जून : हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में प्रकृति की मार ने एक बार फिर इंसानी जिंदगियों को संकट में डाल दिया है। कुल्लू और धर्मशाला में बुधवार को पांच स्थानों पर बादल फटने की घटनाओं ने भारी तबाही मचाई। कुल्लू जिले के सैंज घाटी में जीवा नाला, शिलागढ़, मनाली की स्नो गैलरी, बंजार के हौरनागढ़, और धर्मशाला के खनियारा में मनुनी खड्ड में बादल फटने से आए सैलाब ने सबकुछ तहस-नहस कर दिया। आठ गाड़ियां, दस पुलिया, और एक बिजली प्रोजेक्ट पानी के तेज बहाव में बह गए। सबसे दुखद यह है कि खनियारा के पास एक जलविद्युत परियोजना में काम कर रहे 15 से 20 मजदूरों के बहने की खबर है, जिनमें से दो शव बरामद किए जा चुके हैं। एनडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन की टीमें राहत और बचाव कार्य में जुटी हैं, लेकिन तेज बारिश और क्षतिग्रस्त सड़कें रेस्क्यू ऑपरेशन को चुनौतीपूर्ण बना रही हैं।
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उधर, उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में गुरुवार सुबह एक और त्रासदी ने दस्तक दी। घोलतीर के पास एक टेंपो ट्रैवलर गहरी खाई में गिर गया, जिसमें 19 यात्री सवार थे। इस हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई, और दर्जनभर लोग लापता बताए जा रहे हैं। बचाव दल मौके पर पहुंचकर तलाशी अभियान चला रहे हैं, लेकिन पहाड़ी क्षेत्रों की दुर्गम परिस्थितियां राहत कार्यों में बाधा डाल रही हैं।
ये घटनाएं न केवल मानवीय क्षति की दुखद कहानी बयां करती हैं, बल्कि पहाड़ी राज्यों में आपदा प्रबंधन और बुनियादी ढांचे की कमजोरियों को भी उजागर करती हैं। हिमाचल में ऑरेंज अलर्ट के बावजूद इतनी बड़ी तबाही ने सवाल खड़े किए हैं कि क्या हम प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए तैयार हैं? अनियोजित निर्माण, अवैध खनन, और पर्यावरणीय मानकों की अनदेखी ने इन आपदाओं को और विकराल बना दिया है। उत्तराखंड में बार-बार होने वाले सड़क हादसे सड़कों की खराब स्थिति और सुरक्षा उपायों की कमी को रेखांकित करते हैं।
इस संकट की घड़ी में प्रभावित परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए, यह अपील है कि सरकार और समाज मिलकर ऐसी त्रासदियों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाएं। पर्यावरण संरक्षण, बेहतर सड़क सुरक्षा, और प्रभावी आपदा प्रबंधन प्रणाली को प्राथमिकता देना समय की मांग है। साथ ही, राहत कार्यों में तेजी लाकर लापता लोगों को जल्द से जल्द ढूंढने और पीड़ितों के पुनर्वास की व्यवस्था करनी होगी। प्रकृति का यह प्रकोप हमें चेतावनी दे रहा है कि अब जागने का वक्त है, वरना ऐसी त्रासदियां बार-बार हमारा इम्तिहान लेंगी।







