- प्रदेश की बिजली कम्पनियां जहां अब तक लगभग 548 करोड़ के मीटर खरीदने व लगाने का दे चुकी हैं आर्डर, वहीं ईईसीएल ने भी उप्र के लिये 40 लाख स्मार्ट मीटर खरीद को अन्तिम रूप देने में लगा जिसकी कीमत लगभग 1320 करोड़।
- जल्दबाजी में इतनी बड़ी संख्या में मीटर की खरीद पर कम्पनियां आमादा क्यों? गुणवत्ता पर क्यों बरत रही हैं उदासीनता?
- उपभोक्ता परिषद ने प्रदेश के मुख्यमंत्री से मीटर खरीद के पूरे मामले पर आईआईटी कानपुर/उच्चस्तरीय तकनीकी समिति से जांच कराने की उठायी मांग।
- पावर कार्पोरेशन ने जुलाई, 2017 में मीटर की गुणवत्ता सुनिश्चित कराने के लिये सभी कम्पनियों को सीपीआरआई से जांच कराने का दिया था निर्देश मामला ठण्डे बस्ते में क्यों?
- पूर्व में जिन कम्पनियों पर आईआईटी कानपुर ने उठाया सवाल उन्हें भी मिला आर्डर।
लखनऊ, 22 अक्टूबर। उप्र में लगभग 68 लाख अनमीटर्ड उपभोक्ताओं के यहां मीटर लगाने के लिये जहां उप्र में अब तक लगभग 48 लाख मीटर खरीदने व लगाने का आर्डर हो चुका है और लगभग इतने ही मीटर खरीद के आर्डर पेन्डिंग हैं। सभी बिजली कम्पनियों में लगभग रू0 548 करोड़ के मीटर खरीदने व लगाने के आर्डर जारी हो चुके हैं। वह भी घाटे में चल रही बिजली कम्पनियां रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कार्पोरेशन लि. से मीटर खरीद के लिये लोन ले रही हैं। वहीं दूसरी तरफ केन्द्र सरकार की एजेन्सी एनर्जी एफिशियन्सी सर्विसेज लिमिटेड (ईईसीएल) ने भी उप्र के लिये 40 लाख स्मार्ट मीटर खरीदने का आर्डर भी अन्तिम दौर में है। जिसकी कीमत लगभग 1320 करोड़ आयेगी। सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि मीटर लगाने की प्रक्रिया एक सतत प्रक्रिया है, जो कई वर्षों में पूरी होगी। ऐसे में करोड़ो/अरबों के मीटर खरीदने के आर्डर एक साथ क्यों किये जा रहे हैं? गौरतलब है कि जब विगत दिनों उपभोक्ता परिषद ने गुणवत्ता को लेकर बड़ा सवाल उठाया था और कार्पोरेशन प्रबन्धन से मुलाकात की थी तो उस समय पावर कार्पोरेशन के प्रबन्ध निदेशक द्वारा 19 जुलाई, 2017 में सभी कम्पनियों के प्रबन्ध निदेशकों को यह आदेश दिये गये थे कि सभी मीटर निर्माताओं के खरीदे जा रहे मीटर के लाट से रैण्डम सैम्पल भारत सरकार की जांच लैब सेन्ट्रल पावर रिसर्च इन्स्टीट्यूट (सी0पी0आर0आई0) से जांच कराया जाये और कम्पनियां भी अपनी लैब में गहन जांच करें। इन सब प्रक्रिया पर उदासीन बिजली कम्पनियां करोड़ों के मीटर खरीद आर्डर देने में क्यों दिलचस्पी दिखा रही हैं? उपभोक्ता परिषद ने गुणवत्ता को दरकिनार कर बड़े पैमाने पर जल्दबाजी में मीटर खरीद के पूरे मामले की प्रदेश के मुख्यमंत्री महोदय से उच्च स्तरीय तकनीकी समिति अथवा आईआईटी कानपुर से जांच कराने की मांग उठायी है।
उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि विगत में अनेकों ऐसी मीटर कम्पनियां हैं जिनके बारे में समय-समय पर क्वालिटी को लेकर सवाल उठता रहा है। चाहे मीटर जम्पिंग का मामला सामने आया हो या कुछ वर्ष पूर्व पावर कार्पोरेशन द्वारा आईआईटी कानपुर से जांच कराने पर मीटर में कमियां उजागर होने का मामला हो, इन सबसे बेखबर बिजली कम्पनियां मीटर की गुणवत्ता पर ध्यान क्यों नहीं दे रही हैं? चूंकि इसका खामियाजा प्रदेश की जनता को भुगतना पड़ता है इसको लेकर उपभोक्ता परिषद विगत दिनों नियामक आयोग की जनसुनवाई में भी इस मुद्दे को उठा चुका है और पूरे मामले से पावर कार्पोरेशन प्रबन्धन को भी अवगत करा चुका है। बिजली कम्पनियां वास्तव में यदि गुणवत्ता के प्रति संवेदनशील हैं तो सबसे पहले मीटर खरीद की जाने वाली कम्पनियों के मीटर की सीपीआरआई से जांच कराकर उसकी गुणवत्ता देखना चाहिए था और जिन्हें आर्डर दिया गया है उनका परफार्मेन्स भी देखा जाना अतिमहत्वपूर्ण था, लेकिन बिजली कम्पनियां इस पर उदासीनता बरत रही हैं, जो गम्भीर मामला है।







