नीतू सिंह
कन्नौज, उत्तर प्रदेश में बसे लाख बहोसी पक्षी विहार, प्रकृति प्रेमियों और पक्षी अवलोकन के शौकीनों के लिए एक छिपा हुआ रत्न है। 80 वर्ग किलोमीटर में फैला यह अभयारण्य, दो उथले झीलों! ‘लाख और बहोसी’ के इर्द-गिर्द बसा है, जो गंगा नहर से पानी प्राप्त करती हैं। यह भारत के सबसे बड़े पक्षी अभयारण्यों में से एक है, जो नवंबर से मार्च तक हजारों प्रवासी और स्थानीय पक्षियों का ठिकाना बनता है। लेकिन बारिश के मौसम में यहाँ का नजारा कुछ और ही जादुई होता है, जब हरियाली, पानी और पक्षियों का संगम एक अविस्मरणीय अनुभव देता है।
बारिश में पर्यटन का अनूठा आकर्षण
मानसून में लाख बहोसी पक्षी विहार एक अलग ही रंग में रंगा होता है। झीलों के किनारे हरी-भरी वनस्पति, पानी में तैरती कमल और जलकुंभी की परतें, और बारिश की बूंदों से चमकता परिदृश्य इसे स्वर्ग समान बनाते हैं। बारिश के बाद झीलों का जलस्तर बढ़ने से पक्षियों के लिए भोजन और आवास की प्रचुरता हो जाती है, जिससे स्थानीय पक्षी प्रजातियाँ जैसे सारस क्रेन, सफेद गले वाला किंगफिशर, और पेंटेड स्टॉर्क अधिक सक्रिय दिखते हैं। हालांकि, प्रवासी पक्षियों की संख्या कम होती है, लेकिन बारिश का मौसम स्थानीय प्रजातियों और प्रकृति की सुंदरता को करीब से देखने का सुनहरा अवसर देता है। अभयारण्य में बने 10 किलोमीटर लंबे पैदल मार्ग और बहोसी झील पर बने अवलोकन मीनार पर्यटकों को पक्षियों को करीब से देखने का मौका देते हैं। बारिश में गीली मिट्टी और चारों ओर फैली हरियाली के बीच यहाँ की सैर एक ताजगी भरा अनुभव है। पर्यटक गजेबो में बैठकर बारिश की फुहारों के बीच पक्षियों की चहचहाहट का आनंद ले सकते हैं।

सारस क्रेन का अद्भुत डांस और नीलगाय का आकस्मिक दर्शन
सारस क्रेन का नृत्य: हाल ही में, एक पर्यटक समूह ने बारिश के दौरान लाख झील के पास सारस क्रेन के एक जोड़े को उनके प्रजनन नृत्य में मग्न देखा। यह जोड़ा बारिश की बूंदों के बीच एक-दूसरे के साथ तालमेल बिठाकर नाच रहा था, जो प्रकृति प्रेमियों के लिए एक दुर्लभ और मनमोहक दृश्य था। यह घटना सोशल मीडिया पर वायरल हो गई, जिसने अभयारण्य की लोकप्रियता को और बढ़ाया।
नीलगाय का आकस्मिक दर्शन: एक स्थानीय फोटोग्राफर ने बारिश के दौरान अभयारण्य के पास खेतों में नीलगाय के एक परिवार को देखा, जो बारिश से भीगे खेतों में चहलकदमी कर रहा था। यह दृश्य इतना आकर्षक था कि फोटोग्राफर ने इसे कैमरे में कैद कर लिया, और तस्वीरें स्थानीय समाचार पत्रों में छपीं, जिसने पर्यटकों का ध्यान इस क्षेत्र की जैव-विविधता की ओर खींचा।
बता दें कि प्रमुख जीव-जंतुलाख बहोसी पक्षी विहार में 240 से अधिक पक्षी प्रजातियाँ दर्ज की गई हैं, जिनमें सारस क्रेन, काले गले वाला स्टॉर्क, बार-हेडेड गूज, पेंटेड स्टॉर्क, सफेद इबिस, और ग्रे हेरॉन प्रमुख हैं। प्रवासी पक्षियों में ग्रेलेग गूज, रेड-क्रेस्टेड पोचार्ड, और ग्रेट व्हाइट पेलिकन शामिल हैं। पक्षियों के अलावा, यहाँ नीलगाय, सियार, मॉन्गूस, मछली पकड़ने वाली बिल्ली, और बंदर जैसे स्तनधारी भी पाए जाते हैं। झीलों में विभिन्न जलीय जीव और पौधे, जैसे कमल और जलकुंभी, इस पारिस्थितिकी तंत्र को और समृद्ध करते हैं।
क्षेत्रफल की बात करें तो यह अभयारण्य 80 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला है, जिसमें लाख और बहोसी झीलें, गंगा नहर का हिस्सा, और आसपास के गाँवों की जमीन शामिल हैं। यह बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (BNHS) द्वारा ‘महत्वपूर्ण पक्षी क्षेत्र’ और राष्ट्रीय आर्द्रभूमि संरक्षण कार्यक्रम का हिस्सा है।
पर्यटकों के लिए सुविधाएँ बढ़ाने की योजना बना रहे हैं: पर्यटन मंत्री
हाल ही में, उत्तर प्रदेश के पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने कहा, “लाख बहोसी पक्षी विहार को एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। हम इस क्षेत्र में बुनियादी ढांचे को और बेहतर करने और पर्यटकों के लिए सुविधाएँ बढ़ाने की योजना बना रहे हैं, ताकि यह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सके।” बता दें कि यह बयान अभयारण्य के प्रचार और संरक्षण के प्रति सरकार की गंभीरता को दर्शाता है।
वैसे भी लाख बहोसी पक्षी विहार बारिश के मौसम में प्रकृति और पक्षियों की अनुपम छटा का गवाह है। यहाँ की शांति, हरियाली, और जैव-विविधता इसे पक्षी प्रेमियों और पर्यटकों के लिए एक आदर्श गंतव्य बनाती है। बेहतर सड़क संपर्क और बुनियादी सुविधाओं की कमी के बावजूद, यह अभयारण्य अपने प्राकृतिक सौंदर्य और जैविक धन से हर किसी को मंत्रमुग्ध कर देता है। यदि आप प्रकृति के बीच एक शांत और रोमांचक अनुभव चाहते हैं, तो लाख बहोसी पक्षी विहार आपके घूमने के लिए बेहतर है।


हाल ही में, उत्तर प्रदेश के पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने कहा, “लाख बहोसी पक्षी विहार को एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। हम इस क्षेत्र में बुनियादी ढांचे को और बेहतर करने और पर्यटकों के लिए सुविधाएँ बढ़ाने की योजना बना रहे हैं, ताकि यह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सके।” 




