जोहान्सबर्ग (दक्षिण अफ्रीका), 22 नवंबर 2025: ब्रिक्स समिट के बीच व्यस्ततम कार्यक्रम के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रात के समय दक्षिण अफ्रीका के भारतीय मूल के लोगों द्वारा प्रस्तुत एक सांस्कृतिक कार्यक्रम में शिरकत की। मंच पर जब गिरमिटिया मजदूरों का पुराना गीत “गंगा मैया” तमिल और भोजपुरी दोनों भाषाओं में गूंजा, तो प्रधानमंत्री की आँखें नम हो गईं।
कार्यक्रम खत्म होने के कुछ ही मिनट बाद प्रधानमंत्री ने अपने मोबाइल से भोजपुरी में एक ट्वीट लिखा, जो आज सुबह से सोशल मीडिया पर छाया हुआ है:

- “हमरा खातिर ई बहुत खुशी के अऊर भावुक अनुभव रहल कि हम जोहान्सबर्ग में दक्षिण अफ्रीका के गिरमिटिया गीत ‘गंगा मैया’ के प्रस्तुति देखनी। एह प्रस्तुति के एगो अऊर खास बात रहल कि ई गीत के तमिल में भी गावल गइल! ई गीत में ओह लोगन के आस अऊर अटूट हिम्मत … एवं लोग कई बरिस पहिले इहां आइल रहले। ऊ गीत-भजन के सहारे आपन मन में भारत के जिंदा रखलन। एही से, ई सांस्कृतिक नाता के आजो जीवंत देखल बहुते सराहे-जोग बा।”
2. जोहान्सबर्ग में दक्षिण अफ्रीका के गिरमिटिया गीत ‘गंगा मैया’ की प्रस्तुति भावविभोर कर गई। इस गीत को तमिल में सुनना अपने आप में एक अनूठा अनुभव रहा! इसमें उन लोगों की आशा और दृढ़ संकल्प की भावना समाहित है, जो कई दशक पहले यहां आए थे। भले ही उन्हें कठिन चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन वे विचलित नहीं हुए। गीतों और भजनों के माध्यम से उन्होंने भारत को अपने हृदय में बसा कर रखा है। अपनी जड़ों से इस सांस्कृतिक जुड़ाव को जीवंत देखना अभिभूत कर देने वाला है।ट्वीट में न तो कोई अधिकारी भाषा, न कोई प्रोटोकॉल – बस एक साधारण भारतीय का दिल से निकला भाव। भोजपुरी में लिखा ये संदेश देखकर लाखों लोग भावुक हो गए।
https://x.com/i/status/1991917200886874554
लोगों ने क्या लिखा?“
सर आपने भोजपुरी में ट्वीट करके पूरे पूर्वांचल को गले लगा लिया।”
“150 साल पहले जो लोग गए थे, आज उनके वंशज गंगा मैया गा रहे हैं और हमारा पीएम भोजपुरी में लिख रहा है – इससे बड़ा सम्मान क्या होगा?”
“सादगी का नाम नरेंद्र मोदी।”
कार्यक्रम में मौजूद एक बुजुर्ग महिला ने बताया, “हमारे दादा-परदादा जब जहाज से उतरे थे तो सिर्फ गंगा मैया का गीत साथ था। आज भारत का प्रधानमंत्री हमारे बीच बैठकर वही गीत सुन रहा था… लगा जैसे हमारा भारत खुद हमारे पास आ गया।”
प्रधानमंत्री ने कार्यक्रम के बाद कलाकारों से हाथ मिलाया, कुछ बच्चों के साथ फोटो खिंचवाई और बस इतना कहा,
“तुम सब गंगा-जमुनी संस्कृति के जीते-जागते प्रमाण हो। हम सब एक ही परिवार के हैं – चाहे चेन्नई में रहो या जोहान्सबर्ग में।”
बता दें कि एक छोटे से पल ने एक बार फिर साबित कर दिया कि सादगी और संवेदना किसी प्रोटोकॉल की भाषा नहीं समझती। वो सीधे दिल से दिल तक जाती है।






