कानपुर, 13 दिसंबर 2025: उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर से एक ऐसा अनोखा मामला सामने आया है जो पूरी दुनिया के वैज्ञानिकों और बायोमीट्रिक विशेषज्ञों को हैरान कर रहा है। नौबस्ता क्षेत्र के रहने वाले पवन मिश्रा के जुड़वां बेटे प्रबल और पवित्र के फिंगरप्रिंट और रेटिना (आइरिस) स्कैन बिल्कुल एक जैसे पाए गए हैं – यानी 100% मैच!
विज्ञान की किताबें कहती हैं कि दुनिया में किसी दो लोगों के फिंगरप्रिंट या रेटिना कभी पूरी तरह एक जैसे नहीं हो सकते, लेकिन ये दोनों भाई इस नियम को तोड़ते नजर आ रहे हैं। पिता पवन मिश्रा ने बताया कि आधार कार्ड अपडेट कराने के दौरान ये समस्या सामने आई। एक बेटे का बायोमीट्रिक अपडेट करते ही दूसरे का आधार कार्ड अपने आप निरस्त हो जाता है। सिस्टम कन्फ्यूज हो जाता है कि ये दो अलग बच्चे हैं या एक ही!

यह मामला नवंबर 2025 में सुर्खियों में आया, जब पवन मिश्रा आधार सेंटर पर बच्चों का बायोमीट्रिक अपडेट कराने गए। विशेषज्ञों का कहना है कि जुड़वां बच्चों में फिंगरप्रिंट 55-74% तक मैच होना आम है, लेकिन पूरा 100% मैच लगभग असंभव। इसी वजह से ये केस रिसर्च का विषय बन गया है।
आधार के रीजनल ऑफिस (कानपुर) के डिप्टी डायरेक्टर प्रशांत कुमार ने कहा, “दो लोगों के बायोमीट्रिक एक जैसे नहीं हो सकते। इस मामले की गहन जांच की जाएगी।” पिता को बच्चों सहित दोबारा बुलाया गया है। शायद अपडेट के समय कोई टेक्निकल गड़बड़ी हुई हो, लेकिन फिलहाल ये प्रकृति का चमत्कार लग रहा है!
क्या बोलें लोग :-
- सृस्टि विश्वकर्मा ने इस मामले कहा कि नौबस्ता के उस्मानपुर निवासी पवन मिश्र के जुड़वा बेटों पवित्र और प्रबल के रेटिना और फिंगरप्रिंट एक नहीं थे, बल्कि आधार कार्ड अपडेट करवाते समय हुई बायोमीट्रिक मिक्सिंग के दौरान हुई गड़बड़ी से ऐसा हुआ।
- अजय शर्मा ने कहा साइंस तो भगवान प्रकृति जो भी कहें उनके बनाये नियमों को डीकोड करने की सिर्फ कोशिश कर रहा है लेकिन ऐसे असंख्य अनगिनत कोड हैं जिन्हें साइंस को अभी डीकोड करना है, इसीलिए जो नास्तिक हैं उनको भी ये समझना होगा की साइंस से बड़ा भी कोई है।
- धर्मेंद्र : इसमें कोई टेक्निकल फॉल्ट है या फिर आधार कार्ड बनाते समय कोई गड़बड़ की गई है , साइंस को चैलेंज करने से पहले ह्यूमन एरर को जांच लेना चाहिए।
कुछ लोग इसे भगवान की लीला बता रहे हैं, तो कुछ साइंस के नए राज़ की खोज। एक लोकल कमेंट में कहा गया, “साइंस प्रकृति के नियम डीकोड करने की कोशिश करती है, लेकिन ऐसे अनगिनत राज़ अभी बाकी हैं।”
अभी तक कोई नया अपडेट नहीं:
दिसंबर 2025 तक इस मामले पर UIDAI या किसी वैज्ञानिक संस्थान से जांच के अंतिम नतीजे सार्वजनिक नहीं हुए हैं। मामला अभी जांच के दौर में है। अगर सचमुच 100% मैच साबित होता है, तो ये बायोमीट्रिक साइंस के लिए बड़ा केस स्टडी बन सकता है। फिलहाल, ये टेक्निकल गड़बड़ी ही लग रहा है, न कि प्रकृति का चमत्कार।पिता पवन मिश्रा परेशान हैं, लेकिन उम्मीद है कि जल्द समस्या हल हो जाएगी। आगे की अपडेट आते ही बताएंगे!
क्या ये सचमुच साइंस से परे है? या सिर्फ एक दुर्लभ संयोग? दुनिया भर के वैज्ञानिक इस पर नजर रखे हुए हैं। आगे की अपडेट के लिए बने रहिए!






