किताब दीवाने सलाम व कलामे अनीस का भी विमोचन
लखनऊ, 28 अक्टूबर। उर्दू राइटर्स फोरम के तत्वाधान में आज पेपर मिल कॉलोनी निशातगंज स्थित कैफी एकेडमी उर्दू मरसिया इंसानसाज़ी का शाहकार के विषय पर एक सेमिनार का आयोजन किया गया जिसमें देश और विदेश के वक्ताओं ने अपने अपने विचार व्यक्त किए कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रोफेसर शारिब रूदौलवी ने की इस इस अवसर पर श्रीमती कामना प्रसाद और सुनीता झिंगरन को मरसिया पर बेहतरीन कार्यकरदगी के लिए वकारे अवध अवार्ड देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के दौरान डाक्टर तक़ी आबिदी द्वारा लिखी गई किताब दीवाने सलाम व कलामे अनीस का विमोचन किया गया।
कार्यक्रम का संचालन डॉक्टर अब्बास रजा नय्यर जलालपुरी ने किया कार्यक्रम में मुख्य रूप से प्रोफेसर ख्वाजा मोहम्मद इकरामुद्दीन, अम्मार रिज़वी, कनाडा से आये डॉक्टर तक़ी आबिदी, जर्मनी से आए आरिफ नकवी श्रीमती कामना प्रसाद जोकि दिल्ली से आई हैं और सुनीता झिंगरन प्रोफेसर शारिब रुदौली ने अपने अपने विचार व्यक्त किए।

अनवर जलालपुरी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि सख्त दिल इंसान को मरसिया जरूर पढ़ना चाहिए उन्होंने कहा की इंसान साज़ी के लिए सोच जरूरी है उन्होंने कर्बला के वाक्या का जिक्र करते हुए कहा कातिलाने खानदान ए नबूवत हकीकत से बेखबर थे आंसू शायरी में डाले जाने को मरसिया कहते हैं अनवर जलालपुरी ने हिंदुस्तान की हिफाजत हमेशा होती रहेगी इस पर कहा कि जिस हिंदुस्तान में इमाम हुसैन ने आने की ख्वाहिश जाहिर की थी सियासत चाहे जितनी नफरत घोले लेकिन हिंदुस्तान हमेशा सर बुलंदी के साथ सुरक्षित और तरक्की करता रहेगा उन्होंने कहा कि कर्बला का वाक्य इराक में हुआ लेकिन हिंदुस्तान का हिंदू शहर जालिम से नफरत और मजलूम से मोहब्बत करता है जिसकी वजह इमाम हुसैन है उन्होंने कहा उर्दू में शायरी करने वालों को सीरते अहलेबैत पढ़ना चाहिए।
दिल्ली से आई कामना प्रसाद ने मरसिया के इतिहास पर रोशनी डालते हुए कहा की मरसिया गंगा जमुनी तहजीब की मिसाल है कर्बला से काशी तक इंसानियत से रूहानियत को जोड़ती है उन्होंने कहा कि कर्बला के पैगाम को हिंदुस्तान ने अपना लिया इमाम हुसैन अमन चाहते थे यह एक बड़ा संदेश है उन्होंने कहा कि रसाई अदब की शुरुआत में ही हिंदू शायरों ने कर्बला के वाक्या को बयान किया है जिसमें राजा कल्याण सिंह राजा बलवान सिंह छन्नूलाल पीतांबर नाथ आदि का नाम भी है कर्बला की ख्वातीन का जिक्र करते हुए कहा कि जनाब ज़ैनब के साथ ही कर्बला की सभी महिलाएं काबिलियत एहतेराम हैं इसी के साथ उन्होंने कहा कि उन महिलाओं को भी नहीं भुलाया जा सकता जिन्होंने मरसिया लिखे हैं कामना प्रसाद ने मरसिया के इतिहास पर रोशनी डालते हुए मीर अनीस मिर्ज़ा दबीर अली सरदार जाफरी कैफी आजमी का भी जिक्र किया।

सुनीता झिंगरन ने सम्बोधित करते हुए हज़रत अली और हज़रत अब्बास की शुजाअत बयान करते हुए नौहा पढा ।डॉक्टर तक़ी आबिदी ने कहा कि मरसिया ने हिंदुस्तान की संस्कृति को जोड़ा और मरसिए में इंसान को जीने का सलीका सिखाया है जहां अदब एहतराम सब्र सुझाव अधिकार और कुर्बानी देने का जज्बा सिखाया जाता है उन्होंने कहा कि आज उर्दू को आतंकवाद की भाषा से जोड़ा जा रहा है जबकि मरसिया उर्दू अदब का हिस्सा है जो आतंकवाद के खिलाफ प्रदर्शन है उन्होंने मीर अनीस का जिक्र करते हुए कहा कि मीर अनीस ने सिर्फ मरसिया ही नहीं कहा बल्कि वह इंसान के अधिकार के प्रति भी काफी से सचेत थे यही वजह थी कि बनारस में जब एक औरत के पति की मृत्यु हो जाती है तो उस को उसके मायके आने की इजाजत नहीं मिलती जिसमें मीर अनीस सीधे तौर से दखल देते हैं और बनारस के धर्म गुरुओं को खत लिखते हैं जिसके कारण उस औरत को उसके अधिकार मिलते है।
प्रोफेसर ख्वाजा इकरामुद्दीन ने कहा कि इंसानियत को नुकसान से बचाने के लिए इमाम हुसैन ने कर्बला में अजीम काम किया जिससे बातिल की शिकस्त हुई और इंसानियत बच गई उन्होंने कहा कि आज फिर इंसानियत को खतरा है जरूरत है उसी रास्ते पर चलने की मरसिया में जिहाद अकीदत शफकत सभी कुछ है उन्होंने कहा इंसानियत का पैगाम मरसिया में साफ है जो किसी भी इंसान को इंसानियत सिखाता है उन्होंने कहा अगर मरसिया को उर्दू अदब से अलग कर दें तो उर्दू खत्म हो जाएगी बात जाहिर करने का जरिया मरसिया है इंसान बनाने में मरसिया का बहुत बड़ा रोल है।






