- प्रदेश के अनेकों जिलों में किसानों के बिलों में बिलिंग एजेन्सियों की मनमानी से अधिक वसूली पर आयोग द्वारा विगत दिनों गठित की गयी थी जांच समिति।
- बिजली कम्पनियों में कार्यरत बिलिंग एजेन्सियों द्वारा प्रदेश प्रदेश के किसानों से मनमानी वसूली पर गठित नियामक आयोग जांच समिति 7 नवम्बर, 2017 से शुरू करेगी जांच।
- 7 नवम्बर, 2017 को आयोग ने बुलाई जांच समिति की पहली बैठक।
- जांच समिति सदस्य व उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा कि जांच समिति के सामने रखेंगे अनेकों साक्ष्य जो स्वतः सिद्ध कर देंगे कि किसानों का हुआ है उत्पीड़न।
लखनऊ 29 अक्टूबर। बिजली कम्पनियों में बिलिंग के लिये अधिकृत एजेन्सियों द्वारा एलएमवी-5 (किसानों) की मौजूदा आयोग द्वारा तय टैरिफ 160 बीएचपी प्रति माह की जगह प्रति हार्स पावर 80 यूनिट के आधार पर मनमाने तरीके से 5 हार्स पावर पर 400 यूनिट मानकर लगभग रू. 3097 का बिल उपभोक्ताओं से वसूल किये जाने, जबकि 5 हार्स पावर के उपभोक्ताओं से लगभग 834 रू. वसूला जाना चाहिये था, के मामले पर विगत दिनों विद्युत नियामक आयोग की सार्वजनिक सुनवाई में उपभोक्ताओं द्वारा मुद्दे को उठाया गया था। जिस पर प्रकरण की गम्भीरता को देखते हुए 13 अक्टूबर 2017 को उप्र विद्युत नियामक आयोग द्वारा एक 4 सदस्यीय उच्च स्तर की जांच समिति का गठन किया गया था, जिसकी पहली बैठक 7 नवम्बर, 2017 को विद्युत नियामक आयोग सभागार में प्रातः 11.00 बजे बुलाई गई है। गौरतलब है कि जांच समिति में डा. अमित भार्गव, निदेशक टैरिफ, उप्र विद्युत नियामक आयोग, निदेशक वाणिज्य, मध्याॅंचल विद्युत वितरण निगम, मुख्य अभियन्ता रेग्यूलेटरी अफेयर्स यूनिट, उप्र पावर कार्पोरेशन व प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं का प्रतिनिधित्व करने के लिये जाॅंच समिति में उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा को शामिल किया गया था।
प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं का पक्ष रखने के लिये उच्च स्तरीय जांच समिति में शामिल जांच समिति के सदस्य उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि 7 नवम्बर 2017 को आयोग में बुलायी गयी जांच समिति की बैठक में उपभोक्ता परिषद द्वारा अनेकों ऐसे तथ्य रखे जायेंगे जो स्वतः सिद्ध कर देंगे कि विद्युत नियामक आयोग द्वारा तय टैरिफ से भिन्न उपभोक्ताओं से बिजली कम्पनियों ने मनमानी वसूली की है। बड़े दुर्भाग्य के साथ कहना पड़ रहा है कि पूरे प्रदेश में कभी नारमेटिव बिलिंग के नाम पर कभी मनमाने तरीके से तय यूनिट उपभोक्ताओं के बिलों में दर्ज कर उनका उत्पीड़न पूरे प्रदेश में होता है और बिजली कम्पनियां चुप रहती हैं, जो अपने आप में गम्भीर मामला है।
बहुत जल्द ही आयोग द्वारा गठित जांच समिति ऐसे सभी मामलों पर पर्दाफाश करने का प्रयास करेगी जिनमें प्रदेश के किसानों का उत्पीड़न किया गया है।







