तमिलनाडु जहां रोड एक्सीडेंट्स में टॉप पर- HMSI का ‘माइंडफुल मोबिलिटी’ कैंपेन रथिनम कॉलेज में मचा धमाल, 2050 तक जीरो डेथ का सपना सच करने की दिशा में कदम!
कोयंबटूर। सड़कों पर मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा जबकि तमिलनाडु 2023 में 67,213 रोड एक्सीडेंट्स के साथ देश में नंबर 1 पर! (MoRTH रिपोर्ट) लेकिन होंडा मोटरसाइकिल एंड स्कूटर इंडिया (HMSI) चुप नहीं बैठी – रथिनम कॉलेज ऑफ आर्ट्स एंड साइंस में 2200+ स्टूडेंट्स और स्टाफ को एक साथ जोड़कर रोड सेफ्टी का जबरदस्त प्रैक्टिकल ट्रेनिंग कैंपेन चलाया।
बता दें कि ये कोई बोरिंग लेक्चर नहीं था – बल्कि गेम्स, क्विज़, सिनेरियो डिस्कशन, वर्चुअल राइडिंग सिम्युलेटर और किकेन योसोकू ट्रेनिंग (KYT) जैसी इंटरैक्टिव एक्टिविटीज़ से भरा दिन! युवाओं ने 100+ संभावित खतरों को पहले से महसूस किया, स्लो राइडिंग प्रैक्टिस की, पतले तख्तों पर बैलेंस ट्राय किया – ताकि असल सड़क पर अलर्ट रहें।
क्यों जरूरी था ये?
- तमिलनाडु में हर साल हजारों जानें जाती हैं – ओवरस्पीडिंग, हेलमेट न पहनना, लेन न मानना जैसे छोटे-छोटे गलतियां बड़ी त्रासदी बन जाती हैं।
- HMSI का ग्लोबल विजन: 2050 तक ट्रैफिक एक्सीडेंट में जीरो डेथ – भारत में 2030 तक मौतों को आधा करने के सरकारी टारगेट के साथ जुड़कर काम।
क्या-क्या सीखा गया?
- रोड साइन, मार्किंग और सेफ राइडिंग एटिकेट्स की थ्योरी
प्रेशर-फ्री पोस्चर और गियर यूज - डेंजर प्रेडिक्शन – खतरे को पहले पहचानो, पहले बचो!
- पहले से राइडर स्टूडेंट्स ने स्किल्स अपग्रेड की
HMSI के 10 ट्रैफिक ट्रेनिंग पार्क और 6 सेफ्टी ड्राइविंग एजुकेशन सेंटर पूरे देश में लाखों लोगों तक पहुंच चुके हैं – अब तक 12 मिलियन+ भारतीयों को ट्रेनिंग दी जा चुकी है। कंपनी का मकसद सिर्फ जागरूकता नहीं – सेफ्टी को आदत बनाना, ताकि युवा रोड सेफ्टी के एंबेसडर बनें।
बता दें कि एक छोटा सा फैसला जैसे हेलमेट पहनना, स्पीड कंट्रोल, फॉलोइंग गैप रखना – ये सब मिलकर सड़कों को सुरक्षित बना सकता है। HMSI का ये कैंपेन बता रहा है: अवेयरनेस अकेली काफी नहीं, एक्शन जरूरी है!







