फतेहपुर (उत्तर प्रदेश): एक साधारण चाय की दुकान अब राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गई है। दो महीने पहले समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने फतेहपुर के खागा तहसील के चौकी चौराहा स्थित ‘शेषमन की फेमस चाय’ पर रुककर चाय पी थी। अब उसी दुकान पर फूड सेफ्टी विभाग की टीम पहुंची, चाय के सैंपल लिए और एल्युमिनियम के बर्तनों का हवाला देकर दुकान सील करने की चेतावनी दी। दुकान संचालक ने इसे राजनीतिक उत्पीड़न बताते हुए दुकान बंद करने का फैसला कर लिया है।
घटना का पूरा क्रम : 20 फरवरी को क्या हुआ?
- अखिलेश यादव अफोई गांव में पूर्व विधायक मोहम्मद शफीर से मिलने गए थे। वापसी में चौकी चौराहा पहुंचकर उन्होंने चाय पीने की इच्छा जताई। स्थानीय कार्यकर्ताओं ने उन्हें शेषमन यादव की दुकान पर ले गए।
- दुकान संचालक शेषमन यादव के बेटे आर्यन यादव ने खुद अखिलेश यादव को कुल्हड़ में दो कप चाय परोसी। अखिलेश ने चाय की तारीफ की, आर्यन के साथ फोटो खिंचवाई और सोशल मीडिया पर पोस्ट भी किया। आर्यन अपने कॉमिक अंदाज के लिए भी लोकप्रिय हैं।
- अब क्या हो रहा है? फूड सेफ्टी विभाग ने दुकान पर छापा मारा, चाय के सैंपल लिए और एल्युमिनियम बर्तनों पर आपत्ति जताई। आर्यन ने सोशल मीडिया पर आरोप लगाया कि अखिलेश को चाय पिलाने के बाद से उन्हें लगातार परेशान किया जा रहा है। दबंगों द्वारा मारपीट और गाली-गलौज के आरोप भी लगे हैं।

चाय की चुस्की बनी सियासी बवाल! अखिलेश को चाय पिलाने वाली दुकान पर फूड सेफ्टी का छापा, चायवाला दुकान बंद करने को मजबूर
आर्यन ने फेसबुक पर लिखा, “मैं आज से अपनी चाय की दुकान बंद कर रहा हूं। मैं एक गरीब परिवार से हूं।” उन्होंने दावा किया कि अखिलेश यादव के आने के बाद से ही उनकी छोटी सी दुकान पर आफत टूट पड़ी है।
सियासी सवाल और सोशल मीडिया पर बहस
सोशल मीडिया पर लोग पूछ रहे हैं — क्या यह सामान्य जांच है या अखिलेश यादव के चाय पीने का ‘सियासी नतीजा’? कई यूजर्स ने टिप्पणी की कि चाय की दुकानों पर फूड सेफ्टी विभाग के सैंपल लेने के मामले पहले कम ही देखने को मिलते हैं। कुछ ने इसे विपक्षी नेता से जुड़ी दुकान पर ‘निशाना’ बताया, तो कुछ ने स्वास्थ्य नियमों का हवाला दिया।
सियासी सवाल और सोशल मीडिया पर बहस
सोशल मीडिया पर लोग पूछ रहे हैं कि क्या यह सामान्य जांच है या अखिलेश यादव के चाय पीने का ‘सियासी नतीजा’? कई यूजर्स ने टिप्पणी की कि चाय की दुकानों पर फूड सेफ्टी विभाग के सैंपल लेने के मामले पहले कम ही देखने को मिलते हैं। कुछ ने इसे विपक्षी नेता से जुड़ी दुकान पर ‘निशाना’ बताया, तो कुछ ने स्वास्थ्य नियमों का हवाला दिया।
विपक्षी कार्यकर्ता इसे राजनीतिक प्रतिशोध बता रहे हैं, जबकि घटना को लेकर सपा और भाजपा समर्थकों के बीच तीखी बहस छिड़ गई है। आर्यन की दुकान अब बंद हो चुकी है और पूरा मामला वायरल हो रहा है।
सवाल उठता है: एक चाय की चुस्की इतनी महंगी क्यों पड़ गई? क्या छोटे चायवालों को राजनीतिक दौरों का खामियाजा भुगतना पड़ेगा? फतेहपुर की यह घटना उत्तर प्रदेश की सियासत में नई बहस छेड़ गई है।






