कलाकारों ने उठाई चेतावनी, अकादमी पहुंचकर किया निरीक्षण
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक राजधानी लखनऊ में रंगमंच और कलाकारों पर गहराता संकट अब खुलकर सामने आ गया है। प्रेक्षागृहों की बदहाली, महंगे किराए और बंद होती रंग गतिविधियों के चलते छोटे-स्वतंत्र रंगकर्मी बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं।
निर्माण में फंसी अकादमी, मंचन ठप
कलाकार एसोसिएशन के सदस्यों ने उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी का निरीक्षण किया। कलाकारों का आरोप है कि निर्माण कार्य के कारण यहां रंग गतिविधियां लगभग ठप हो चुकी हैं। साथ ही राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह का किराया 15 हजार रुपये तक पहुंच गया है, जबकि भारतेंदु नाट्य अकादमी भी मंचन के लिए उपलब्ध नहीं है।
बनी “निगरानी कमेटी”, संस्कृति विभाग को सौंपेंगी रिपोर्ट
इस गंभीर स्थिति को देखते हुए कलाकार एसोसिएशन ने निगरानी कमेटी बनाने की घोषणा की है। यह कमेटी प्रेक्षागृहों की व्यवस्था, रंग गतिविधियों और कलाकारों की समस्याओं पर नजर रखेगी तथा अपनी रिपोर्ट सीधे संस्कृति विभाग को सौंपेगी।
कलाकारों की चिंता और चेतावनी
पद्मश्री डॉ. अनिल रस्तोगी ने कलाकारों की समस्याओं को गंभीरता से उठाते हुए कहा कि कला और संस्कृति को बचाने के लिए रंगमंचीय गतिविधियां लगातार जारी रहना बेहद जरूरी है।
एसोसिएशन के सचिव विनोद मिश्रा ने चेतावनी देते हुए कहा कि “यदि कलाकारों को मंच ही नहीं मिलेगा तो नई पीढ़ी रंगमंच से दूर होती चली जाएगी।”रंगकर्मी मुकेश वर्मा ने कहा, “लखनऊ की रंगमंचीय पहचान पूरे देश में रही है, लेकिन आज कलाकार मंच और सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं।”
इस मौके पर संगम बहुगुणा, अशोक सिन्हा, गोपाल सिन्हा, राजीव रंजन समेत कई वरिष्ठ कलाकार मौजूद रहे।कलाकारों का अल्टीमेटम: यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो एसोसिएशन पूरे मामले को प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए सार्वजनिक रूप से उठाएगा।
वास्तव में लखनऊ का रंगमंच एक बार फिर अपनी सांस्कृतिक विरासत बचाने की लड़ाई लड़ रहा है।







