राष्ट्रपति को सौंपे गए ज्ञापन, ग्रामीण मजदूरों ने जताई एकजुटता
लखनऊ। ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी और संकट को लेकर उत्तर प्रदेश खेत एवं ग्रामीण मजदूर यूनियन ने 1 जुलाई को पूरे प्रदेश में तीखा प्रदर्शन किया। मनरेगा योजना को प्रभावी ढंग से बहाल करने, ग्राम जी वापस लेने और मजदूरों की अन्य मांगों को लेकर हजारों ग्रामीण मजदूर सड़कों पर उतरे। जिला-तहसील स्तर पर धरना-प्रदर्शन कर राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपे गए।
प्रदेशव्यापी आंदोलन की गूंज
यूनियन के बैनर तले यह प्रदर्शन एक साथ कई जिलों में संगठित रूप से चला। मजदूरों ने न केवल प्रदर्शन किया बल्कि प्रशासन के माध्यम से अपनी मांगों को राष्ट्रपति तक पहुंचाने का प्रयास किया।
देवरिया में सख्त प्रदर्शन
राज्य अध्यक्ष सतीश कुमार के नेतृत्व में तहसील सलेमपुर पर जोरदार धरना दिया गया। जिला सचिव रामनिवास यादव, प्रेमचंद यादव, बलविंद्र मौर्य और गंगादेवी समेत बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल रहे।
कासगंज और आजमगढ़ में मजबूत आवाज
कासगंज में प्रदेश महासचिव बी.एल. भारती, जिला अध्यक्ष सूबेदार सिंह और अन्य नेताओं ने सदर उपजिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। आजमगढ़ में रामवृक्ष मास्टर, रमेश राम, रामनिहोर निडर जैसे अनुभवी नेताओं ने धरना-प्रदर्शन किया।
जौनपुर, गाजीपुर और गोरखपुर में अलग-अलग मोर्चे
जौनपुर में वरिष्ठ नेता जयलाल सरोज के नेतृत्व में सुजानगंज, अशोक पाण्डेय के नेतृत्व में महाराजगंज और भूलन बौद्ध के नेतृत्व में बरसठी विकासखंड पर प्रदर्शन हुए। गाजीपुर में जिला सचिव वीरेंद्र गौतम और विजय बहादुर सिंह के नेतृत्व में जखनियां तहसील पर आवाज बुलंद की गई। गोरखपुर में ओमप्रकाश पाण्डेय के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने ज्ञापन दिया।
पश्चिमी UP में भी गूंजी मांगें
सहारनपुर में जिला सचिव कैलाशचंद, मुजफ्फरनगर में जिला अध्यक्ष अनिल कुमार और जिला सचिव घसीटू सिंह, कुशीनगर में कैलाश गिरी, बरेली में टी.आर. लोधी-मुहम्मद यासीन, मुरादाबाद में प्रदेश उपाध्यक्ष थान सिंह और मिर्जापुर में प्रदेश सहसचिव राजनाथ यादव के नेतृत्व में प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपे गए। इन सभी जगहों पर सैकड़ों ग्रामीण मजदूर मौजूद रहे।
मजदूरों की प्रमुख मांगें
ज्ञापन में यूनियन ने केंद्र और राज्य सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
मुख्य मांगें इस प्रकार हैं:
- मनरेगा को प्रभावी रूप से बहाल करना और ग्राम जी वापस लेना
- बकाया मजदूरी का तुरंत भुगतान
- वर्ष में 200 दिन रोजगार और 700 रुपये दैनिक मजदूरी सुनिश्चित करना
- ग्रामीण रोजगार के लिए कम से कम 2.5 लाख करोड़ रुपये का बजट
- ग्रामीण मजदूरों को 10 हजार रुपये मासिक पेंशन, मुफ्त बिजली, मुफ्त स्वास्थ्य सेवाएं और पक्का आवास
- प्रति यूनिट 10 किलो राशन के साथ खाद्य तेल, दाल, नमक और साबुन
- भूमिहीन मजदूरों के लिए 10 लाख रुपये की दुर्घटना बीमा योजना
- बच्चों को स्नातक तक निःशुल्क शिक्षा
बी.एल. भारती, प्रदेश महासचिव, उत्तर प्रदेश खेत एवं ग्रामीण मजदूर यूनियन ने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ मजदूर हैं और उनकी उपेक्षा सहन नहीं की जाएगी।यह आंदोलन ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ती बेरोजगारी और संकट को लेकर यूनियन की चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।






