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    Home»ब्लॉग

    मिलावट: इंसानी ज़िंदगी से खेलते लोग!

    By August 28, 2017 ब्लॉग No Comments5 Mins Read
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    खाद्य पदार्थों में मिलावट देश की सबसे बड़ी समस्या है। देश में फल, सब्जियों, दूध से लेकर सॉफ्ट ड्रिंक और डेयरी प्रोडक्ट्स तक में मिलावट होती है। यह देश में तेजी से बढ़ रही है और इस पर सरकार से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक सख्ती दिखा चुके हैं। सुप्रीम कोर्ट इस वर्ष और इससे पहले भी कई बार कह चुका है कि दूध में मिलावट पर उम्रकैद की सजा होनी चाहिए। मिलावट का मामला कितना गंभीर है, इसका अंदाजा वर्ष 2010 में जारी पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट से लगाया जा सकता है। इस रिपोर्ट में कहा गया कि देश में 80 फीसदी असामयिक मौतों का कारण खाद्य पदार्थों में मिलावट और दूषित पानी का होना है। जानकारों का कहना है कि मिलावट का यह खेल खेत से ही शुरू हो जाता है। पैदावार बढ़ाने के लिए बड़ी मात्रा में पेस्टिसाइड्स और फर्टीलाइजर का इस्तेमाल हो रहा है, जो सेहत के लिए खराब है। इसके अलावा मुनाफे के लिए खाद्य पदार्थों में हानिकारक चीजें मिलाई जा रही हैं, जो बेहद खतरनाक है।

    20 फीसदी में है मिलावट:

    हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर मिनिस्ट्री की वर्ष 2013 की रिपोर्ट के अनुसार देश में 20 फीसदी खाद्य पदार्थों में मिलावट है या फिर उनकी गुणवत्ता बेहद घटिया है, जिसका स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ता है। वर्ष 2012-13 में देशभर में खाद्य पदार्थों के 29,328 सैंपल लिए गए थे। इनकी 123 लैब्स में जांच हुई। जांच में पता चला है कि इन सैंपल्स में से 5,180 सैंपल में मिलावट है। यह कुल सैंपल्स का करीब 20 फीसदी है। चिंता की बात यह भी है कि पिछले कुछ सालों में यह आंकड़ा तेजी से बढ़ा है। वर्ष 2008-09 में यह आंकड़ा 8 फीसदी था, जो कि करीब 4 साल में दोगुने से भी ज्यादा पहुंच गया। अभी मिलावट करने वालों पर सख्ती नहीं होती है। देश में हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर मिनिस्ट्री के अनुसार वर्ष 2013 में प्रॉसीक्यूशन रेट मात्र 13 फीसदी था। यही रवैया मिलावटखोरों की हिम्मत को और बढ़ा रहा है।

    1. हल्दी और मूंग, तुअर चने की दाल

    क्या मिलाते हैं: दाल के रंग को अधिक पीला दिखाने के लिए मेटानिल यलो (एक प्रकार की डाई) मिलाया जाता है। केसरी दाल भी मिलाई जाती है।

    कैसे करें टेस्ट: 20 एमएल कुनकुने पानी में एक चम्मच बेसन या हल्दी पाउडर मिक्स कर लें। इसके बाद इसमें कुछ बूंद हाइड्रोक्लोरिक एसिड डालें। यदि पानी का रंग गुलाबी या बैंगनी हो जाए तो समझें इसमें मेटानिल यलो मिलाया गया है।

    स्वास्थ्य पर असर: मेटानिलयलो में कैंसर कारी तत्व पाए जाते हैं। लंबे समय तक इनका इस्तेमाल करना काफी खतरनाक है। इससे पेट संबंधी गंभीर समस्या भी होती है।

    2. हरी मिर्च, हरी मटर और अन्य हरी सब्जियां

    क्या मिलाते हैं: सब्जियों और हरी मिर्च को चमकीला हरा रंग देने के लिए मैलाकाइट ग्रीन (डाई करने के लिए इस्तेमाल होने वाला ऑर्गेनिक कंपाउंड) मिलाया जाता है।

    कैसे करें टेस्ट: आपको जिस सैंपल को टेस्ट करना है, उसका थोड़ा-सा सैंपल हल्के भीगे ब्लौटिंग पेपर (सोख्ता पेपर) पर रखें। यदि पेपर पर धब्बे जाएं तो समझें कि इसमें मैलाकाइट ग्रीन मिलाया गया है।
    स्वास्थ्य पर असर: मैलाकाइट ग्रीन एक रंगीन डाई है। तमाम रिसर्च में यह साबित हो चुका है कि लंबे समय तक इसका सेवन करने से कैंसर हो सकता है।

    3. आइसक्रीम

    क्या मिलाते हैं: आइसक्रीम में सफेद रंग की चमक लाने और फ्लेवर को लाइट बनाने के लिए डिटर्जेंट पाउडर मिलाया जाता है।
    कैसे करें टेस्ट: आइसक्रीमको लेकर उस पर लेमन जूस की कुछ बूंदें गिराएं। यदि आइसक्रीम पर झाग या बुलबुले आएं तो समझें इसमें वॉशिंग पाउडर मिलाया गया है।

    स्वास्थ्य पर असर: आइसक्रीम में वॉशिंग पाउडर मिले होने से लिवर और पेट संबंधी कई गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। लंबे समय तक इसका सेवन और भी खतरनाक है।

    4. राई और सरसों का तेल:

    क्या मिलाते हैं: राईया फिर सरसों के तेल की मात्रा को बढ़ाने के लिए आर्जीमोन (एक प्रकार का पौधा) सीड्स का इस्तेमाल किया जाता है।
    कैसे करें टेस्ट: सैंपल के दानों को तोड़ कर मसलें। आर्जीमोन सीड्स खुरदुरे और अंदर से सफेद होते हैं, जबकि राई के दाने बाहर से चिकने तथा अंदर से पीले होते हैं।

    स्वास्थ्य पर असर: आर्जीमोनसीड्स के सेवन से एपिडेमिक ड्रॉप्सी होती है। इन बीजों से गंभीर ग्लूकोमा का खतरा भी अधिक रहता है। कमजोर इम्यून सिस्टम वालों के लिए ये ज्यादा खतरनाक साबित हो सकते हैं।

    5. पनीर, मावा और दूध:

    क्या मिलाते हैं: वैसेतो दूध में कई चीजों की मिलावट की जाती है, लेकिन पनीर, मावा और दूध तीनों में स्टार्च मिलाना बेहद आम बात है।
    कैसे करें टेस्ट: थोड़ी-सीमात्रा में सैंपल को टेस्ट ट्यूब में लेकर 20 एमएल पानी मिलाएं और उसे उबालें। इसके बाद उसे ठंडा करके एक-दो बूंद आयोडीन सॉल्यूशन मिलाएं। यदि सॉल्यूशन नीले रंग में बदल जाए तो समझें स्टार्च मिला है।

    स्वास्थ्य पर असर: इन उत्पादों में स्टार्च की मौजूदगी उसकी न्यूट्रीशनल वैल्यू को कम करता है। इससे पेट संबंधी कई बीमारियां होती हैं। इसके शरीर पर कई नकरात्मक असर होते हैं।

    कैस की जाती है मिलावट:

    Sugar: शक्कर की मात्रा बढ़ाने के लिए चॉक पाउडर मिलाया जाता है। 10 ग्राम शक्कर लेकर एक गिलास पानी में घोलें। थोड़ी देर में चॉक पाउडर नीचे बैठ जाएगा। चॉक पाउडर से पेट संबंधी कई गंभीर बीमारियां होती हैं।

    Rice: चावल और मैदे में बोरिक एसिड मिलाते हैं। टेस्ट ट्यूब में सैंपल को पानी के साथ मिलाएं और हाइड्रोक्लोरिक एसिड डालें। इसके बाद टरमरिक पेपर स्ट्रिप डुबाेएं। यदि पेपर लाल हो जाए तो समझें इसमें बोरिक एसिड मिला है।

    Coffee powder: कॉफी पाउडर में चिकोरी पाउडर मिलाया जाता है। थोड़े से कॉफी के पाउडर को पानी में डाल दें। कॉफी पानी में तैरेगी, लेकिन चिकोरी पाउडर धीरे-धीरे नीचे बैठ जाएगा। चिकोरी पाउडर से डायरिया और ज्वाइंट पेन होता है।

    Black pepper: काली मिर्च की मात्रा बढ़ाने के लिए पपीते के बीच मिलाए जाते हैं। टेस्ट करने के लिए काली मिर्च को अल्कोहल में डाल दें। काली मिर्च डूब जाएगी, लेकिन पपीते का बीज तैरता रहेगा। पपीते का बीच लिवर प्रॉब्लम करता है।

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