दिल्ली में जंतर-मंतर पर चल रहे जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को धरने से उठाकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया। अब उनके परिवार ने इस पूरे घटनाक्रम पर सवाल उठाते हुए दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया है।
पत्नी गीतांजलि आंगमो की याचिका
सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंगमो ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर सफदरजंग अस्पताल से निजी अस्पताल में शिफ्ट करने की मांग की है। याचिका में कहा गया है कि सरकारी अस्पताल पर भरोसा नहीं है। परिवार ने आज ही मामले की तत्काल सुनवाई की मांग की है।
बता दें कि सोनम वांगचुक का हेल्थ बुलेटिन जारी किया है जिसमें सोनम वांगचुक की हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है यह हेल्थ बुलेटिन सफदरजंग अस्पताल ने जारी किया है। फ़िलहाल विशेषज्ञों की टीम की निगरानी में इलाज जारी है।
सोनाक्षी सिन्हा का समर्थन
बॉलीवुड अभिनेत्री सोनाक्षी सिन्हा ने सोनम वांगचुक के समर्थन में एक और वीडियो जारी कर दिल्ली पुलिस के रवैये पर सवाल उठाया है। उन्होंने वांगचुक को “बहादुर” बताया और पूछा कि जब एक व्यक्ति पर्यावरण और आदिवासियों के मुद्दे पर आवाज उठा रहा है, तो बॉलीवुड के बड़े-बड़े सितारे चुप क्यों हैं? उनकी जुबान पर ताला क्यों लगा हुआ है?
मध्य प्रदेश में आदिवासी महिलाओं पर बल प्रयोग
इसी बीच मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में केन-बेतवा लिंक परियोजना के खिलाफ बरना नदी किनारे कुपी गांव के पास मुख्य रूप से आदिवासी महिलाओं द्वारा किया जा रहा शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन पुलिस ने बल प्रयोग करके रोका है।
https://x.com/PTI_News/status/2078690997161336900/video/1
यह घटनाक्रम चिंताजनक है। एक तरफ पर्यावरण संरक्षण और पानी के मुद्दे पर जागरूकता फैलाने वाले कार्यकर्ता को धरने से हटाया जा रहा है, दूसरी तरफ विकास के नाम पर आदिवासी समुदायों की चिंताओं को दबाने की कोशिश की जा रही है।
सवाल यह है कि क्या विकास केवल बड़े प्रोजेक्टों तक सीमित है, या इसमें स्थानीय लोगों, आदिवासियों और पर्यावरण की आवाज भी शामिल है? सोनम वांगचुक जैसे कार्यकर्ताओं को दबाने या उनके स्वास्थ्य को लेकर शंकाएं पैदा करने की बजाय संवाद का रास्ता अपनाया जाना चाहिए।
लोकतंत्र में विरोध की आवाज को कुचलने के बजाय सुनने की परंपरा मजबूत हो, यही अपेक्षा है। अदालत अब इस मामले में क्या फैसला सुनाती है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।







