प्रदेश सरकार राज्य में नागर विमानन क्षेत्र में विकास को बढ़ावा देने के लिए कृतसंकल्पित

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file photo

लखनऊ: 16 अक्टूबर, 2017। वर्तमान प्रदेश सरकार राज्य में नागर विमानन क्षेत्र में समग्र विकास को बढ़ावा देने के लिए कृतसंकल्पित है। भारत सरकार द्वारा केन्द्र और राज्य सरकारों के प्रोत्साहनों के माध्यम से अण्डरसव्र्ड और अनसव्र्ड हवाई अड्डों/हवाई पट्टियों/स्थानों को जोड़ने के उद्देश्य से नागर विमानन नीति, 2016 प्राख्यापित की गई है और रीजनल कनेक्टिविटी स्कीम (आरसीएस) प्रारम्भ की गई है। रीजनल कनेक्टिविटी स्कीम के अन्तर्गत केन्द्र सरकार, राज्य सरकार एवं भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के मध्य एक एमओयू हस्ताक्षरित किया गया है, जिसमें रीजनल कनेक्टिविटी स्कीम के अन्तर्गत राज्य सरकार के दायित्वों को पूर्ण करने के लिए प्रदेश सरकार की प्रतिबद्धता दर्शायी गई है।

यह जानकारी देते हुए आज यहां राज्य सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि इस नीति के परिप्रेक्ष्य में प्रदेश में नागर विमानन के क्षेत्र में अनुकूल कारोबारी वातावरण बनाने के लिए मजबूत नागर विमानन अवसंरचना के विकास हेतु पर्याप्त प्रोत्साहन प्रदान करने विमानन क्षेत्र में अप्रयुक्त क्षमता का उपयोग करते हुए निवेश आकर्षित करने में सहायता करने, रीजनल कनेक्टिविटी स्कीम के अन्तर्गत नये रूट्स का विकास करके एयर कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने हेतु प्रोत्साहित किया जा रहा है। प्रदेश के नाॅन-आरसीएस एयरपोर्टर्स के मध्य इण्टर-कनेक्टिविटी हेतु सुविधा उपलब्ध कराने, भारत और दुनिया के बाकी हिस्सों के साथ राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों को जोड़कर प्रदेश में पर्यटन की पूर्ण क्षमता का उपयोग करने का काम किया जा रहा है, जिससे व्यापार और रोजगार के अवसरों के सृजन को बढ़ावा मिले।

प्रवक्ता ने बताया कि एयर कार्गो हब के विकास को प्रोत्साहन देकर उत्तर प्रदेश में कृषि निर्यात एवं अन्य क्षरण योग्य वस्तुओं के निर्यात व विनिर्माण और ई-काॅमर्स कारोबार को बढ़ावा दिया जा रहा है। मानव संसाधन विकसित करके एवं प्रत्यक्ष, अप्रत्यक्ष और प्रेरित रोजगार के अवसर पैदा कर विमानन क्षेत्र को बढ़ावा देने और राज्य में एमआरओ सुविधाओं के विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य की पूर्ति हेतु एक समग्र ‘उत्तर प्रदेश नागर विमानन प्रोत्साहन नीति, 2017’ को मंजूरी प्रदान की गयी है।

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