गोदी मीडिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाता विपक्ष
लखनऊ, 2 सितंबर 2025। भारतीय गोदी मीडिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने वाली एक पुरानी बहस फिर सुर्खियों में है, जब समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गोदी मीडिया की एंकर अंजना ओम कश्यप के साथ 2022 के एक इंटरव्यू में गोदी मीडिया के ‘सरकारी डोनेशन’ पर चलने वाले मॉडल को बेनकाब किया। यह वाकया पंचायत कार्यक्रम में हुआ था, जो आज भी सोशल मीडिया पर वायरल है। यूजर्स इसे गोदी मीडिया की सच्चाई का पर्दाफाश मान रहे हैं। अखिलेश का बयान न केवल गोदी मीडिया की साख पर सवाल उठाता है, बल्कि यूट्यूबर्स की सब्सक्रिप्शन-आधारित स्वतंत्र पत्रकारिता को अधिक विश्वसनीय बताता है।
यूट्यूबर्स बेहतर काम कर रहे हैं और गोदी मीडिया से आगे निकल रहे हैं : अखिलेश यादव
इंटरव्यू में अखिलेश ने कहा कि यूट्यूबर्स बेहतर काम कर रहे हैं और गोदी मीडिया से आगे निकल रहे हैं। जब अंजना ओम कश्यप ने दावा किया कि विश्वसनीयता की बात आने पर लोग गोदी मीडिया के मंच पर ही आते हैं, तो अखिलेश ने करारा जवाब दिया: “यूट्यूबर्स की खबरें सब्सक्रिप्शन पर चलती हैं, इसलिए ज्यादा विश्वसनीय हैं, जबकि गोदी मीडिया सरकारी डोनेशन पर चलता है।” इस जवाब ने स्टूडियो में सन्नाटा छा दिया। अंजना ने बचाव में कहा कि दोनों को बुरा लगेगा, लेकिन अखिलेश ने साफ किया कि सच्चाई से मुंह मोड़ना गोदी मीडिया की पुरानी आदत है।

यह घटना गोदी मीडिया की उस प्रवृत्ति को उजागर करती है, जहां सत्ता पक्ष के प्रति नरम रुख अपनाया जाता है, जबकि विपक्ष पर हमले किए जाते हैं। अंजना ओम कश्यप, जो गोदी मीडिया की प्रमुख एंकर हैं, अक्सर सोशल मीडिया पर सत्ता समर्थक पत्रकारिता के लिए ट्रोल होती हैं। उसी इंटरव्यू में अखिलेश ने उन्हें ‘ईमानदार पत्रकार’ कहकर तंज कसा, जिस पर अंजना भड़क गईं और इसे व्यंग्य बताया। अखिलेश ने शांत रहते हुए कहा कि ईमानदारी बुरी चीज नहीं, जिसे दर्शकों ने तालियों से सराहा। यह वीडियो सोशल मीडिया पर मीम्स की बाढ़ लाया, जहां यूजर्स ने लिखा, “अंजना को ‘ईमानदार’ कहना ही गोदी मीडिया का चेहरा खोल देता है।”
आलोचकों का कहना है कि गोदी मीडिया अपनी विश्वसनीयता का दावा करता है, लेकिन वास्तव में सरकारी विज्ञापनों और कॉर्पोरेट फंडिंग पर निर्भर है। दूसरी ओर, यूट्यूबर्स दर्शकों के सब्सक्रिप्शन से चलते हैं और बिना दबाव के सच्चाई सामने लाते हैं। अखिलेश का यह बयान गोदी मीडिया की खोई साख को उजागर करता है, जहां लोग अब स्वतंत्र यूट्यूब पत्रकारिता की ओर रुख कर रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह घटना गोदी मीडिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाती है, जो विपक्ष को घेरने में व्यस्त रहता है, लेकिन सत्ता की गलतियों को अनदेखा करता है।इंटरव्यू के बाद अखिलेश ने सोशल मीडिया पर लिखा कि सच्चाई सामने आनी चाहिए। यह वाकया गोदी मीडिया की हकीकत को बयान करता है, जो अब किसी से छिपा नहीं। लोग सच्चाई के साथ खड़े होने के लिए यूट्यूबर्स को ही चुन रहे हैं। यह बहस गोदी मीडिया के भविष्य पर सवाल खड़ा करती है कि क्या सरकारी डोनेशन पर चलने वाली ‘विश्वसनीयता’ अब खत्म हो चुकी है?






