भारतीय जनजीवन में गऊ और स्वान का बहुत महत्व रहा है। इन दोनों बेजुबानों के साथ आदिकाल से अपनत्व रहा है। आज भी ग्रामीण परिवेश में पहली रोटी गाय और अंतिम रोटी श्वान के लिए बनाई जाती है। हमारे मठ आश्रमों में भी इस परम्परा का निर्वाह होता है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरक्षपीठ के श्री महंत भी है। यहां गौशाला है, योगी आदित्यनाथ के यहां की यात्रा उनकी दोहरी भूमिका को रेखांकित करती है। मुख्यमंत्री के रूप में वह आमजन से मिलते है, उनकी समस्याएं सुनते है, उनके निवारण के प्रयास करते है। इसी के साथ वह यहां गौसेवा करते है। श्वान अपने स्वभाव के अनुरूप उनके पास आ जाते है। ये सभी योगी आदित्यनाथ से मिलकर भावविह्वल होते है।
- डॉ दिलीप अग्निहोत्री







