पौष्टिकता से भरपूर है अरुणिका व अम्बिका, कैंसर रोधी तत्वों से भी लड़ेगा अरुणिका

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केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान ने किया है विकसित, विटामिन ए की मात्रा मिलती है दोनों आमों में ज्यादा

आम की दो किस्में अरुणिका और अम्बिका इस समय बाजार में लोकप्रिय होती जा रही है। इसका कारण है देखने में सुंदर, खाने में स्वादिष्ट होने के साथ ही पौष्टिकता से भरपुर होना। किसान भी अब इसका पौधरोपण करने पर विशेष जोर दे रहे हैं। केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान रहमानखेड़ा, लखनऊ द्वारा विकसित की गयी संकर प्रजाति अरुणिका कैंसर जैसे रोग में भी फायदेमंद है।

इस संबंध में केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान के निदेशक डाक्टर शैलेन्द्र राजन ने बताया कि अरुणिका मिठास और विटामिन ए के अतिरिक्त कई कैंसर रोधी तत्वों जैसे मंगीफेरिन और लयूपेओल से भरपूर है। अरूणिका के फल टिकाऊ हैं और ऊपर से खराब हो जाने के बाद भी उनके अन्दर के स्वाद पर कोई असर नहीं पड़ता।

उन्होंने कहा कि संकर किस्में अम्बिका और अरूणिका का फल लाल रंग का फल होने के कारण बरबस सबका ध्यान उनकी तरफ चला जाता है। हर साल फल आने की ख़ासियत इन्हें एक साल छोड़कर फलने वाली आम की किस्मों से अधिक महत्वपूर्ण बनाती है। पिछली शताब्दी के अस्सी के दशक में संकरण द्वारा दोनों किस्में विकसित की गयीं। अम्बिका का वर्ष 2000 तथा अरूनिका 2005 लोकार्पण में किया गया।

उन्होंने बताया कि इन दोनों किस्मों को भारत के विभिन्न जलवाऊ में लगाने के बाद यह पाया गया कि इनको अधिकतर स्थानों पर सफलतापूर्वक उगाया जा सकता है। हर साल फल देने के कारण पौधों का आकार छोटा है और अरूणिका का आकार तो आम्रपाली जैसी बौनी किस्म से 40 प्रतिशत कम है। अरूणिका को विभिन्न जलवायु में भी अपनी खासियत प्रदर्शित करने का मौका मिला है। चाहे वो उत्तराखंड की आबो हवा हो या फिर उड़ीसा का समुद्र तटीय क्षेत्र के बाग। अंबिका किस्म गुजरात, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश सहित कई प्रदेशों में आकर्षक पूछो बच्चों में फल देती है।

बौने आकार के होते हैं पेड़:

उन्होंने कहा कि आमतौर पर घर में छोटे से स्थान में भी शौक़ीन आम की बौनी किस्में लगाने के लिए इच्छुक हैं। अभी तक आम्रपाली का इसके लिए प्रयोग होता रहा है। परन्तु जब लोगों ने देखा कि अरूणिका के पौधे आम्रपाली से भी छोटे आकार के हैं तो इस किस्म में लोगों की रूचि बढ़ गयी। नियमित रूप से अधिक फलन ही इस किस्म के बौने आकार का रहस्य है।

आम्रपाली ने दोनों के लिए निभाई है मां की भूमिका:

डाक्टर राजन ने बताया कि आम्रपाली ने अम्बिका और अरूणिका दोनों के लिए ही माँ की भूमिका निभाई है। आम्रपाली के साथ वनराज के संयोग से अरूणिका का जन्म हुआ, जबकि आम्रपाली और जर्नादन पसंद के संकरण से अम्बिका की उत्पत्ति हुई। जर्नादन पसन्द दक्षिण भारतीय किस्म है जबकि वनराज गुजरात की प्रसिद्ध किस्म है। ये दोनों ही पिता के तौर पर इस्तेमाल की गयी किस्में देखने में सुन्दर और लाल रंग वाली हैं परन्तु स्वाद में आम्रपाली से अच्छी नहीं हैं। आम्रपाली को मातृ किस्म के रूप में प्रयोग करने के कारण अम्बिका और अरूणिका दानों में ही नियमित फलन के जीन्स आ गए।

दोनों किस्मों को खूबसूरती पिता से और स्वाद माता से मिले हैं:

इन किस्मों को खूबसूरती पिता से और स्वाद एवं अन्य गुण माता से मिले। आम्रपाली में विटामिन ए अधिक मात्रा में है इसलिए अरूणिका में आम्रपाली से भी ज्यादा विटामिन ए मौजूद है। अंबिका एवं अरूणिका की हाई डेंसिटी (सघन बागवानी) के लिए भी उपयुक्त है। ये किस्में ज्यादा पुरानी नहीं हैं अतः आमतौर पर बाजारों पर देखने को नहीं मिलती। आने वाले वर्षों में अधिक क्षेत्रफल में इन किस्मों के पौधा लग जाने के बाद मार्केट में फल दिखने लगेंगे।

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