दूसरों के पैर खींचकर आप भगवान् की नज़र में कभी आगे नहीं बढ़ सकते!

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जीके चक्रवर्ती

जिस व्यक्ति के पास जो चीज नहीं रहती है उसे वही चीज पाने की जिज्ञासा बनी रहने के साथ ही साथ वह उसका मन उसी चीज की जानकारी करने में लग जाता है। जिस भी चीज का परिचय होता है, उसका परिचय नहीं पूछा जाता। जानने वाले उसे जान जाते हैं। किसी से मिलते ही उसके विषय में या उसका परिचय जानने की छटपटाहट हमारे अंदर एक पैदा करती है वही छटपटाहट समस्याएं उत्पन्न करती है।

प्रसंग और संदर्भ में परिचय मात्र औपचारिकता भर महत्व होता है, लेकिन अपनी धुन में चले जा रहे व्यक्ति का परिचय प्राप्त करने के लिए किसी भी व्यक्ति को पग-पग पर टोकना उसे आहत करता है। किसी को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए अनेको विद्याएं निकाली जाती हैं। किसी भी व्यक्ति का परिचय जानने वाले दो प्रकार के वयक्ति होते हैं। सर्व प्रथम वे व्यक्ति होते हैं, जो स्वयं को महान मान कर सामने वाले के अनादर करने से नहीं हिचकिचाते हैं एवं अपने प्रश्न का उत्तर चाहते हैं। वे स्वयं को एक बच्चे की भांति नवजात आयु के मानते हैं। ऐसे लोग यह नहीं जानते हैं कि पात्रता के अनुसार कार्य करने वाले लोग जीवन भर सुंदर लगते हैं। होनहार लोग प्रतिकूलता को अपने अनुकूल बनाने में अपनी संपूर्ण आयु खर्च कर देते हैं।

दूसरी तरह ऐसे तरह के लोग होते हैं जो हाव-भाव या अपने मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से अपने पारिवारिक संस्कारों का परिचय देते हैं। गुण ग्राहकता जन्मजात होती है। दूसरे व्यक्तियों में गुण तलाशने जैसे कर्म गुदड़ी के लाल करते हैं। विद्वानों को आगे बढ़ाने वाले सरस्वती पुत्र कम बचे हैं। दूसरों के पैर खींचकर हाशिये पर करने की होड़ में उच्चकुल नहीं रहता। इतिहास में चमकने वाले महान व्यक्तित्वों को ऊंचाई देने का श्रेय ऐसे लोगों को ही जाता है, जिन्होंने उनके गुणों को परखकर उन्हें आगे बढ़ाकर उन्हें मानव से महामानव बनाया। प्रत्येक व्यक्ति के दृष्टिकोण के अनुसार उसे यह विश्व दिखाई देता है।

अचानक प्राप्त होने वाले अपने सकारात्मक प्रभाव ही किसी को भी विश्वविख्यात बना देते हैं। परिचय की श्रेष्ठता एक-दूसरे से जोड़ने का अवसर प्रदान करती है। ऐसा भी देखने में आया है कि कभी-कभी परिचय अनहोनी होनी बनकर जौहरी से हीरे को मिलाती है। प्रत्येक शब्द की ऊर्जा का आलोक संगीत की झंकार बनता है। जब परिचय कराने वाला गूंगे बनकर छलते हैं तो बड़े-बड़े नाम वाले लोग गुमनाम हो जाते है। अपने दायित्व से मुकरने वालों को कभी इतिहास क्षमा नहीं करता। अच्छाई की अनदेखी एक न एक दिन खुल जाती है। कुछ लोग पद एवं धन को जांचते हैं वहीं पर कुछ लोग उपलब्धि और प्रतिष्ठा नापते हैं। यही किसी के भी सही परिचय का वास्तविक अर्थ है।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार है)

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