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    Home»Featured

    नासमझ चींटी

    ShagunBy ShagunMay 4, 2021Updated:May 4, 2021 Featured No Comments3 Mins Read
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    sushil doshi
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    Post Views: 1,892
    • राकेश सोहम

    एकत्रित किया हुआ भोजन समाप्त होने को था। अतः चीटियों ने भोजन की खोज में निकलने का निर्णय लिया। रात ढलते ही सभी चीटियां एक साथ, एक कतार में निकल पड़ीं। वे एक के पीछे एक चल रहीं थीं। उनमें दो सैनिक चीटियां सबसे आगे चल रहीं थीं। वास्तव में इन्हीं दो सैनिक चीटियों ने यह सूचना दी थी कि पास की रसोई घर से मिठाई बनने की महक आ रही है। इस सूचना से सभी चीटियों में खुशी की लहर दौड़ गई। उन चीटियों ने यह भी बताया कि वहां ढेर सारी मिठाई होने की संभावना है। सभी चीटियां खुशी खुशी उस ओर बढ़ रहीं थीं।

    चींटियों के झुंड में चिंटू सबसे छोटी और नासमझ थी। इसलिए उसकी सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा गया था। वह कतार के बीच में चल रही थी। अपने नटखट स्वभाव के कारण वह बीच-बीच में कतार से अलग हो जाती और इधर उधर भाग जाती थी। उसकी इस हरकत पर बड़ी चीटियों ने समझाया कि उसे ऐसा नहीं करना चाहिए। भोजन की खोज में पहली बार घर से बाहर निकली है। इसलिए भटक जाने का अंदेशा है। लेकिन चिंटू ने उनकी बातों पर ध्यान नहीं दिया और धीरे-धीरे कतार में पीछे होती चली गई।

    बहुत दूर तक चलने के बाद वह कतार के सबसे पीछे हो गई। अब तो वह निर्भय होकर इधर उधर भाग रही थी। तभी अचानक, चीटियों में खलबली मच गई। चिंटू चींटी आसपास दिखाई नहीं दे रही थी। वह कतार के सबसे पीछे भी नहीं थी ! सभी चीटियां चिंतित हो उठीं। चिंटू की मां भय से रोने लगी। कतार में उपस्थित सैनिक चीटियों को यह आदेश दिया गया कि वह चिंटू की खोज करें। चार पांच सैनिक चीटियां उसकी खोज में निकल पड़ीं। वे आसपास सभी ओर, चिंटू को खोज रहीं थीं। लेकिन चिंटू का कहीं पता ना था।

    अचानक कुछ दूरी से चिंटू की चींख सुनाई दी। सैनिक चीटियां उस ओर दौड़ीं। उन्होंने देखा कि चिंटू चींटी शक्कर के बड़े से दाने के नीचे दबी हुई है और कराह रही है। सभी सैनिक चीटियों ने मिलकर शक्कर के दाने को हटाया और चिंटू को बाहर निकाला। चिंटू लगातार रो रही थी। उसे शक्कर के दाने के भार से चोट लग गई थी और चल भी नहीं पा रही थी। अतः सैनिक चीटियां उसे उठाकर चीटियों की भीड़ की ओर ले गयीं। भीड़ में पहुंचते ही वह अपनी मां से लिपट गई और जोर जोर से रोने लगी।

    कुछ देर बाद, जब चिंटू चींटी चुप हुई तो उसकी मां ने उससे भटक जाने का कारण पूछा। चिंटू दुखी होकर बोली, ‘कतार में चलते हुए मुझे, शक्कर का बहुत बड़ा दाना दिखाई दिया। मैंने सोचा, दाने को उठाकर लाऊंगी और सब को आश्चर्यचकित कर दूँगी। और मुझे खूब शाबाशी मिलेगी।’

    चिंटू की मां उसकी बातें सुनकर मुस्कुराई और समझाया, ‘मेरी नादान बेटी, अति उत्साह में कोई काम नहीं करना चाहिए। ऐसा काम तो बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए जो आपकी शारीरिक क्षमता से अधिक हो। शक्कर का दाना आपसे बहुत बड़ा था जिसे उठाना आपके लिए बिल्कुल भी संभव नहीं था। यही आपकी गलती है। तभी आपको चोट लग गई। ऐसे काम में बल का नहीं, बुद्धि का प्रयोग करना चाहिए था। चार चींटियों का सहयोग लेने से ऐसे काम आसानी से हो जाते हैं। अब आगे से याद रखना।’ सहमति में सिर हिलाते हुए चिंटू चींटी अपनी मां से लिपट गई।

    Shagun

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