श्याम कुमार
हाय रे मनमोहन सिंह! जिस प्रकार कांग्रेस को अपने असंख्य शर्मनाक आचरणों पर कभी शर्म नहीं आती, लगता है वही रास्ता मनमोहन सिंह ने भी अपना लिया है। इस बात का रहस्स्योद्घाटन हुआ है कि जिस दिन मणिशंकर अय्यर ने नरेन्द्र मोदी को ‘नीच’ कहा, उसके एक दिन पहले 6 दिसम्बर को मणिशंकर के आवास पर कांग्रेस के बड़े नेताओं की गुप्त बैठक हुई थी, जिसमें पूर्व-उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी एवं डॉ. मनमोहन सिंह आदि भी मौजूद थे। आश्चर्यजनक बात यह सामने आई है कि उस गुप्त बैठक में पाकिस्तान के भारत में उच्चायुक्त सुहेल महमूद एवं पाकिस्तान के पूर्व-विदेशमंत्री खुरशीद कसूरी भी शामिल थे। इस रहस्यमय गुप्त मीटिंग का भण्डाफोड़ हो जाने पर जब नरेन्द्र मोदी ने गुजरात में अपने भाषणों में उसका उल्लेख किया तो मनमोहन सिंह तिलमिला उठे। उन्होंने नरेन्द्र मोदी पर आरोप लगा दिया कि वह प्रधानमंत्री पद की गरिमा गिरा रहे हैं। धन्य हैं मनमोहन सिंह! जिस व्यक्ति ने पद पर बने रहने के लालच में चाटुकारिता की पराकाष्ठा करते हुए ‘कठपुतली प्रधानमंत्री’ के रूप में दस साल तक प्रधानमंत्री पद की गरिमा की धज्जी उड़ाई हो, आज वह व्यक्ति उपदेश दे रहा है। इससे तो वही कहावत चरितार्थ हो रही है कि ‘उल्टा चोर कोतवाल को डांटे’। प्रधानमंत्री पद की गरिमा को निम्नतम स्तर पर गिराने वाले मनमोहन सिंह ने अपनी सरकार को ‘घोटाला सरकार’ बना दिया था। मनमोहन/सोनिया सरकार ने दस वर्षों में साढ़े बारह लाख करोड़ के घोटाले कर डाले थे। मनमोहन सिंह उस नेहरू वंश के चाटुकार बने, जिसकी राजीव गांधी सरकार के संरक्षण में कांग्रेसियों ने पांच हजार से अधिक सिखों की बड़ी निर्ममतापूर्वक हत्या कर दी थी।
कांग्रेस के दिग्गज नेताओं ने मणिशंकर अय्यर के यहां हुई खुफिया मीटिंग के सदर्भ में यह सवाल किया है कि क्या किसी शादी-ब्याह में पाकिस्तानी राजनयिकों का शामिल होना गुनाह है? लेकिन
उन नेताओं ने यह नहीं बताया कि मणिशंकर अय्यर के यहां खुफिया मीटिंग में किसकी शादी थी? उन्होंने इसका भी जवाब नहीं दिया कि जब गुजरात-चुनाव जोरशोर से छाया हुआ है तो ठीक उसी समय मतदान के एक दिन पहले पाकिस्तानी प्रतिनिधियों के साथ खुफिया मीटिंग करने की ऐसी क्या अरजेन्ट जरूरत हो गई थी? क्या इससे यह चर्चा सही सिद्ध नहीं हो रही है कि पाकिस्तान गुजरात के चुनाव में कांग्रेस को जिताना चाहता है और वहां अहमद पटेल को मुख्यमंत्री बनाना चाहता है? कांग्रेस के नेता चरण सिंह ने मांग की है कि नरेन्द्र मोदी २००२ के दंगे के लिए जामा मसजिद में जाकर माफी मांगें। इसके उत्तर में जबरदस्त प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए बड़ी संख्या में लोगों ने मांग की है कि राहुल गांधी व उनकी मां सोनिया गांधी गुजरात दंगे से पूर्व गोधरा में ट्रेन की बोगियों में जलाकर मार डाले गए हिन्दू तीर्थयात्रियों की निर्मम हत्या के लिए गुजरात के मंदिरों में जाकर माफी मांगें। गुजरात का दंगा गोधरा के हत्याकांड की प्रतिक्रिया में हुआ था।
केन्द्र की सत्ता छिन जाने से कांग्रेस की दशा ‘जल बिन मछली’-जैसी हो रही है। वह सत्ता पुनः पाने के लिए इतना अधिक छटपटा रही है कि उसके लिए कुछ भी करने को तैयार है। गुजरात के चुनाव में वह ऐसा ही कर रही है। वह मान रही है कि यदि उसने किसी भी तरह गुजरात का चुनाव जीत लिया तो उसके लिए २०१९ में लोकसभा का चुनाव जीतकर नेहरू वंश को पुनः सत्तासीन करना सम्भव हो जाएगा। उसे लग रहा है कि अगले साल कर्नाटक में होने वाला विधानसभा का चुनाव उसे विजयश्री नहीं दिला सकेगा, इसीलिए उसने गुजरात के चुनाव में अच्छा-बुरा, हर उपाय जमकर अपनाया है। लेकिन इस जल्दबाजी में उसने सारी मर्यादाओं को तिलांजति दे दी। यहां तक कि देशद्रोहियों का सहयोग लेने से भी परहेज नहीं किया। वैसे भी देशद्रोह को कांग्रेस से शुरू से ही संरक्षण मिला। नेहरू का फर्जी सेकुलरवाद अंततः देशद्रोह का पर्याय बन गया। फर्जी सेकुलरवाद को अभिव्यक्ति की आजादी मान लिया गया, जो धीरे-धीरे हिन्दू एवं भारतीय संस्कृति का विरोध बन गया। दिल्ली में इन्दिरा गांधी द्वारा स्थापित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय देशद्रोहियों की टकसाल बना हुआ है। उस विश्वविद्यालय का सारा खर्च केन्द्र सरकार वहन करती है, किन्तु वहां देशद्रोहियों की फसल तैयार हो रही है। बहुत समय नहीं हुआ, जब वहां खुलकर नारे लगे थे-‘भारत तेरे टुकड़े होंगे, इंशाअल्ला-इंशाअल्ला’, ‘कितने अफजल मारोगे, घर-घर से अफजल निकलेगा’ आदि।
‘घर-घर से अफजल निकलेगा’, नारे का महानायक एवं अलगाववाद का समर्थक सलमान निजामी कश्मीर में एक बड़े कांग्रेसी नेता का पुत्र है। उक्त देशद्रोही से कांग्रेस के लगाव का यह आलम है कि पार्टी ने उसे महत्वपूर्ण पदों पर आसीन किया तथा इस समय गुजरात में वह कांग्रेस का ‘स्टार प्रचारक’ बना हुआ है। गुजरात के मुसलिम इलाकों में सलमान निजामी कांग्रेस के पक्ष में धुआंधार प्रचार कर रहा है। वैसे तो सलमान निजामी काफी समय से कांग्रेस का लाडला है और गुजरात में भी काफी समय से कांग्रेस के पक्ष में सक्रिय है, लेकिन अभी तक उसका नाम प्रकाश में अधिक नहीं आया था।
भाजपा ने भी उसपर ध्यान नहीं दिया था। लेकिन कांग्रेस गुजरात के चुनावी अभियान में अपनी सक्रियता से जितना गद् गद थी, अंतिम चरण में उसने अपने पैर पर स्वयं कुल्हाड़ी मार ली। कपिल सिब्बल एवं मणिशंकर अय्यर ने तो उसके लिए तबाही पैदा की ही थी कि एक और ऐसी कुल्हाड़ी उस पर गिर पड़ी, जिसने ‘जो दूसरों के लिए गड्ढा खोदता है, वह स्वयं उसमें गिर जाता है’ की कहावत चरितार्थ कर दी। सलमान निजामी ने मोदी से यह सवाल कर डाला कि उनके मां-बाप कौन हैं? मणिशंकर अय्यर के मोदी के लिए ‘नीच’ शब्द के प्रयोग से देशभर में तूफान मचा हुआ था कि सलमान निजामी के इस घटिया सवाल से जैसे सुनामी आ गई। इतने निम्न स्तर पर गिरकर कोई ऐसा घटिया सवाल कर सकता है, इसकी कांग्रेस को भी कल्पना नहीं थी। उसने जब देखा कि सलमान निजामी का सवाल गुजरात में कांग्रेस को ले डूबेगा तो वह झट से पलट गई और घोषणा करने लगी कि सलमान निजामी कांग्रेस पार्टी का सदस्य नहीं है। कतिपय बड़े कांग्रेसी नेताओं ने तो यहां तक कह दिया कि उन्होंने सलमान निजामी का नाम कभी नहीं सुना।
कांग्रेस एवं पाकिस्तान में एक बात समान है। पाकिस्तान के जो आंतकवादी भारत में मारे या पकड़े जाते हैं, पाकिस्तान झट से बयान दे देता है कि वे आतंकवादी पाकिस्तानी नहीं हैं। इसी तरह जब कांग्रेस का कोई नेता अपने बयान से कांग्रेस के लिए ऐसा नुकसानदेह सिद्ध होता है कि कांग्रेस के लिए उसका बचाव कर पाना असम्भव हो जाता है तो वह तुरंत उससे पल्ला झाड़ लेती है और घोषित कर देती है कि वह व्यक्ति कांग्रेस का सदस्य नहीं है। सलमान निजामी के सम्बंध में भी कांग्रेस ने ऐसा ही किया। लेकिन सलमान निजामी के कांग्रेस का महत्वपूर्ण नेता होने के इतने अधिक प्रमाण मौजूद हैं कि कांग्रेस का सलमान निजामी से सम्बंध का इनकार करना हास्यास्पद हो गया है। कांग्रेस के महाझूठ पर लोग हंस रहे हैं तथा कड़ी निन्दा भी कर रहे हैं। लोगों को आश्चर्य है कि कांग्रेस को देशद्रोही तत्वों से इतना अधिक प्यार क्यों रहता है?
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार है)







