जूली 2 के पोस्टर में छिपे संस्कार

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 व्यंग्य:  अंशुमाली रस्तोगी


अखबारों में जूली 2 का पोस्टर आया और छा गया। ऐसा छाया कि संस्कारवान लोग भी उतावले हो उठे उसे देखने-समझने को। सुनाई में आया है कि लोगबाग बड़ी तबीयत से जूली 2 के पोस्टर को अपने-अपने व्हाट्सएप पर एक-दूसरे को आगे-पीछे सरका रहे हैं। पोस्टर पर चटकारे यों लिए जा रहे हैं मानो कोई चटपटा-तीखा पदार्थ जीभ पर आन गिरा हो अचानक।

बताता चलू, जूली 2 एक ‘सर्वश्रेष्ठ संस्कारवान फिल्मकार’ की फिल्म है। पिछले दिनों उक्त संस्कारवान फिल्मकार अपनी संस्कारवान छवि के लिए अच्छी-खासी चर्चे में रह चुके हैं। अपनी संस्कारी सोच के हिसाब से वे पूरे फिल्म जगत को संस्कारों की घुट्टी पिला देने का मन रखते थे। किंतु किस्म-किस्म के विवादों के कारण बीच ही में उन्हें अपने संस्कारशील पद को छोड़ना पड़ा।

खैर…। जूली 2 के पोस्टर पर लौटते हैं। पहली ही नजर में मुझे यह पोस्टर अच्छा-खासा संस्कारयुक्त नजर आया। इस पोस्टर को देखने के बाद मेरा संस्कार नामक शब्द पर विश्वास खासा मजबूत हुआ। मैं सोचने लगा- व्यक्ति को अगर इसी तरह के संस्कार हर रोज या हर पल देखने-समझने को मिलने लगें फिर भला वो ‘अश्लीलताओं’ या ‘कामुकताओं’ के जंजालों में क्यों कर उलझे?

अश्लीलताएं तो मनुष्य के दिमाग की ‘भौतिक कुंठाएं’ हैं। किंतु जूली 2 टाइप के पोस्टर और किताब संग लेटी कन्या को देखने के बाद अंदरूनी संस्कार खुद ब खुद दिमाग में ‘विकट हलचल’ मचाने लगते हैं।

यों भी, संस्कारों का पाठ किसी को पढ़ाया नहीं जा सकता। संस्कार मनुष्य के भीतर स्वयं ही पैदा होते हैं। लेकिन समाज में कुछ ऐसे भी लोग हैं, जिनका सवेरा ही संस्कार की घंटी बजाने के साथ शुरू होता है। रात-दिन वे तरह-तरह के संस्कारों पर इस उस को भाषण देते रहते हैं। जबकि खुद उनके संस्कार क्या हैं, कैसे हैं, क्या चाहते हैं ये सब उनके मोबाइल की लॉक्ड गैलरी में झांककर देखा जा सकता है।

जूली 2 का पोस्टर बेहद क्रांतिकारी है। दिमाग में संस्कारों का संचार करता हुआ प्रतित होता है। इमेजिन किया जा सकता है- जब पोस्टर ही इतना संस्कारशाली है फिर फिल्म में तो संस्कारों की पूरी पाठशाला ही स्थापित हुई होगी।

फिर भी, जिन अति-भद्र लोगों को जूली 2 के संस्कारी पोस्टर में से अश्लीलता की बू आ रही है, उनसे मुझे सिर्फ इतना ही कहना है- किरपिया संस्कारवान बनिए। सोच को संस्कारी करिए। दिमाग में संस्कार डालिए। बिना संस्कारों की शरण में जाए आपको जूली 2 ही क्या, सनी लियोनी के वस्त्रों से भी ‘अश्लीलता’ की ही बू आएगी ताउम्र।