Close Menu
Shagun News India
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Friday, October 30
    Shagun News IndiaShagun News India
    Subscribe
    • होम
    • इंडिया
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • राजस्थान
    • खेल
    • मनोरंजन
    • ब्लॉग
    • साहित्य
    • पिक्चर गैलरी
    • करियर
    • बिजनेस
    • बचपन
    • वीडियो
    • NewsVoir
    Shagun News India
    Home»ब्लॉग

    एक अनमोल रत्न डॉ. भीम राव आंबेडकर

    By April 15, 2018Updated:April 15, 2018 ब्लॉग 2 Comments5 Mins Read
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Post Views: 651
    जी के चक्रवर्ती
    हमारे देश के संविधान के रचयिता डॉ भीम राव आंबेडकर जयंती बहुत जोर-शोर से मनाया गया, उन्होंने हमारे देश एवं समाज के लिए जो सेवाएं दी है उसके लिए देश सदा कृतज्ञ रहेगा। वे देश के संविधान निर्माण के समय प्रारूप समिति के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने इस जिम्मेंदारी को निभाया था इस भूमिका को निभाने के कारण ही उन्हें भारत के ‘संविधान निर्माता’ बना दिया इस अर्थ में वे हमारे लिए एक अनमोल रत्न है। आज हम अपने देश की राजनीति में नीतियों, नियमो, सिद्धांतों, नैतिकताओं, उसूलों, चरित्र एवं आदर्श जैसे गुणों के संकटों का सामना कर रहे हैं उन्हें इस बात का अंदेशा उसी वक्त हो गया था।
    उन्होंने भारतीय संविधान को देश में लागू होने के पहले एवं उसके बाद भी बार-बार देश के जिम्मेदार लोगों को आगाह कर दिया था कि यदि इस तरह का संकट भविष्य में इसी रफ्तार से आगे बढ़ते रहे तो एक न एक दिन यह केवल हमारा संविधान ही नहीं बल्कि आजादी को भी तार-तार कर सकता हैं। उस वक्त उनकी इस बात को किसी ने गंभीरता से न तो लिया और नही चिंतन किया। उन्हें नजरंदाज करने वाले लोगों से तो इसकी अपेक्षा भी नहीं की जा सकती थी, लेकिन यहाँ तक कि उन्हें पूजने एवं सम्मान देने वाले लोगों ने भी इस तरह के संकटों के समाधान के लिए संपूर्ण देशवासियों में व्यक्ति की गरिमा एवं राष्ट्र की अखंडता एकता में बृद्धि करने वाली बंधुत्व जैसी भावनाओं के निर्माण को सुनिश्चित करने के लिए उनके द्वारा सुझाए गए रास्तों पर चलने की भी जहमत तक नहीं उठाई। उनके द्वारा निर्मित देश के संविधान में अधिनियमित, आत्मार्पित एवं अंगीकृत होने से ठीक पहले, 25 नवंबर, वर्ष 1949 को उन्होंने उसे ‘अपने सपनों का’ अथवा ‘तीन लोकों से न्यारा’ मानने से इन्कार करते हुए उसकी सीमाएं रेखांकित कर दी थीं।
    डॉ भीम राव आम्बेडकर ने देश के विधिमंत्री के तौर दिए गए अपने पहले साक्षात्कार में कहा था, कि ‘मैं यह महसूस करता हूं कि हमारा संविधान चाहे कितना भी अच्छा क्यों न हो, यदि वे लोग जिन्हें संविधान को संपूर्ण देश में अमल में लाने का काम सौंपा जाए, यदि वे खराब निकले तो निश्चित रूप से संविधान खराब सिद्ध होगा। दूसरी ओर, संविधान चाहे कितना भी खराब क्यों न हो, उसे देश में लागू करवाने की जिम्मेदारी दी जय, यदि वे लोग अच्छे हों तो संविधान अच्छा सिद्ध होगा।’ आंबेडकर ने इस बात को भी चेताया था कि ‘संविधान पर अमल केवल संविधान के स्वरूप पर निर्भर नहीं करता है, वल्कि संविधान केवल विधायिका, कार्यपालिका एवं न्यायपालिका जैसे राज्य के अंगों का प्रावधान भी कर सकता है। इन अंगों का संचालन लोगों के ऊपर एवं उनके द्वारा अपनी आकांक्षाओं एवं राजनीति की पूर्ति के लिए बनाए जाने वाले राजनीतिक दलों पर ही निर्भर करता है।’
    उन्होंने जैसे स्वमं से ही प्रश्न किया था कि आज की तारीख में जब हमारा सामाजिक जनमानस अलोकतांत्रिक है और राज्य की प्रणाली लोकतांत्रिक तब कौन कह सकता है कि भारत के लोगों एवं राजनीतिक दलों का भविष्य में व्यवहार कैसा होगा? यह उनकी दूरदर्शिता का ही परिचय है कि शायद उन्हें इन बातों का पहले से ही आभास कर चुके थे कि आगे चलकर लोकतंत्र से हासिल सहूलियतों का लाभ उठाकर परस्पर विरोधी विचारधाराएं रखने वाले राजनीतिक दल बंनेंगे। इसलिए उनके पास इसका सबसे अच्छा समाधान यह था कि संपूर्ण भारत के लोग देश को अपने-अपने पंथों से ऊपर रखकर चलें , न कि पंथ को देश से ऊपर रख कर, लेकिन शायद वे ऐसा हो पाने के संभावनाओं को लेकर आश्वस्त नहीं थे। इसीलिए वे यह कहने से खुद को रोक भी नहीं पाए, कि यदि राजनीतिक दल अपने पंथ को देश से ऊपर रखेंगे तो हमारी स्वतंत्रता एक बार फिर खतरे में पड़ सकती है और हो न हो हमेशा के लिए खत्म ही हो जाए।
    हम सभी लोगों को येसी संभावनाओं एवं घटनाओं का दृढ़ निश्चय के साथ प्रतिकार अवश्य करना चाहिए। हमें अपनी आजादी की खून के आखिरी बूंद-बूंद तक रक्षा करने का संकल्प करना चाहिए।’ बाबा साहब आम्बेडकर के अनुसार देश में संविधान लागू होने के साथ ही हम अंतर्विरोधों के एक नए युग में प्रवेश किये थे। हम अपने संविधान के जरिये नागरिकों की राजनीतिक समता का उद्देश्य को प्राप्त करने जा रहे थे, लेकिन इसमें आर्थिक एवं सामाजिक समता कहीं दूर तक भी नजर नहीं आरही थी।
    उन्होंने भारत के नवनिर्मित संविधान को देश के प्रथम प्रधानमंत्री एवं राष्ट्रपति के हाथों में सौपते हुए यह आग्रह किया था कि वे जितनी जल्दी संभव हो सके, देश के नागरिकों के मध्य आर्थिक एवं सामाजिक समता को लाने का प्रयास करें, क्योंकि इस अंतर्विरोध के लंबे समय तक खिंचने से उन्हें देश में लोकतंत्र के विफल हो जाने का अंदेशा भयभीत कर रहा था, इसकी रक्षा के लिए उन्होंने कहा था कि ‘एक व्यक्ति-एक वोट’ की व्यवस्था को हर संभव तक ले जाना चाहिए। यह बात आज किसी से भी छिपी नहीं है कि आर्थिक एवं सामाजिक समता संपूर्ण देश में लाने के उनके आग्रह के विपरीत सत्ताओं का पूरा जोर जातीय गोलबंदियों को मजबूत करने पर ही टिकी हुई है। यदि बाबा साहब भीम राव आम्बेडकर जी की इस भारतीयता की अवधारणा को हमारे शासन सत्ता द्वारा स्वीकार कर ली गई होती तो शायद संपृर्ण देश का परिदृश्य ही कुछ और होता जिसमे कुछ लोगों का तो यहां तक मानना हैं कि हम सर्व प्रथम हम भारतीय हैं, उसके पश्चात हिन्दू, मुसलमान या कोई और।

    Keep Reading

    नीले ड्रम’ हत्याकांड पर आया फैसला : जैसी करनी, वैसी भरनी

    अकीदा बनाम अंधविश्वास: पक्के विश्वास और भटकती भीड़ की दास्तान

    नालसा का एलएडीसी सिस्टम खत्म करने का फैसला: क्या गरीब कैदियों से छिन जाएगा न्याय का सहारा?

    Nepal Flood Tragedy: The Most Harrowing Incident of Devastation

    नेपाल बाढ़ त्रासदी: तबाही का सबसे दर्दनाक हादसा

    रक्षाबंधन: परंपरा, पहचान और बाजारवाद का संगम

    Trump Trapped in a Labyrinth: US President's Mounting Difficulties Amid the Maze of an Iran War

    चक्रव्यूह में फंसे ट्रंप: ईरान युद्ध की भूलभुलैया में अमेरिकी राष्ट्रपति की बढ़ती मुश्किलें

    2 Comments

    1. minecraft pe hacks youtube on April 17, 2018 1:06 am

      That is proper, I’m talking aboput getting yourself into thatt situation that you
      didn’t say no (when you ought to of, however, you only agreed to be being friendly or always keeping the Peace) to
      some member andd now the are running cirdcles arouund you.
      Thiss is what makes this game a holistic model that enhances not
      just cognitive skills, the intellect and potential strengthening of the balanced interpersonal relation. After gathering a number off stumps, have wood planks and a crafting table.

      Reply
    2. minecraft zexyzek hackers never win on April 23, 2019 1:50 pm

      That is appropriate, I’m discussing stepping into that situation in plaaces
      youu didn’t refuse (when you of, however, you only agreed
      to be being friendly or always keeping the Peace) to a
      member and after this they are running circles
      arkund you. This iss what makes farmville an all naturfal
      model that enhances not just cognitive skills, the intellect and potential
      strrengthening of a balanced interpersonal relation. My
      thoughts are slowly being eatten away with this treacherously addictive game, and I can’t perform thing about it.

      Reply
    Leave A Reply Cancel Reply

    Advertisment
    Google AD
    We Are Here –
    • Facebook
    • Twitter
    • YouTube
    • LinkedIn

    EMAIL SUBSCRIPTIONS

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    About



    ShagunNewsIndia.com is your all in one News website offering the latest happenings in UP.

    Editors: Upendra Rai & Neetu Singh

    Contact us: editshagun@gmail.com

    Facebook X (Twitter) LinkedIn WhatsApp
    Popular Posts

    गजब हो गया : दूसरों का भविष्य बताने वाले ज्योतिषाचार्य की पत्नी चुनाव हारीं, 300 वोट भी नहीं मिले!

    October 29, 2026
    Anuradha Paudwal: Reached great heights, yet also endured the pain of profound loneliness.

    अनुराधा पौडवाल : बुलंदियों को भी छुआ और गहरे अकेलेपन का दर्द भी झेला

    October 28, 2026

    यूपी में श्रमिकों की बढ़ी मजदूरी, महंगाई सूचकांक के आधार पर तय हुई दरें

    October 28, 2026
    Neeru Sharma Explores Parenting, Social Conditioning and Unspoken Wounds as the Trailer of Sonali Kulkarni’s ‘Like Maa’ Is Released

    माँ की परवरिश में छिपे बचपन के जख्मों की कहानी कहेगी ‘लाइक माँ’

    October 28, 2026
    U&i launches new gadgets: now listen to music and make calls for up to 50 hours—all through your glasses.

    U&i के नए गैजेट्स लॉन्च, अब चश्मे से सुनें म्यूजिक और 50 घंटे तक करें कॉलिंग

    October 28, 2026

    Subscribe Newsletter

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    Privacy Policy | About Us | Contact Us | Terms & Conditions | Disclaimer

    © 2026 ShagunNewsIndia.com | Designed & Developed by Krishna Maurya

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.

    Newsletter
    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading