देश को शर्मशार करता मुजफ्फरपुर बालिका गृह रेप कांड

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त्वरित टिप्पड़ी: पंकज चतुर्वेदी
बिहार के मुजफ्फरपुर के बालिका गृह की कुल 44 में से 42 बालिकाओं की मेडिकल जांच कराई गई है। इसमें 29 बालिकाओं से दुष्कर्म की पुष्टि हुई है। बीमार रहने के कारण दो बालिकाओं की मेडिकल जांच अबतक नहीं हो पाई है। अब तक 11 में से 10 अभियुक्त गिरफ्तार किए जा चुके हैं। एक अभियुक्त दिलीप कुमार वर्मा की गिरफ्तारी का प्रयास जारी है।
यह खबर देश में सनसनी नहीं पैदा करती कि एक आसरे और सुरक्षा की उम्मीद में आई बच्चियों के साठ पाशविकता होती रही, मेडिकल जांच में पता चला कि लड़कियों को पीटा जाता था, उनके शारीर पर जलने  के निशान  भी मिले हैं. बिहार में सियासत तो हो रही है लेकिन उसमें संवेदना नहीं दिख रही हैं
मुजफ्फरपुर में बालिका गृह 1 नवंबर 2013 को खोला गया था। इसके बाद बीते 55 महीने में वहां 471 लड़कियों की इंट्री हुई। इनमें से तीन की मौत मृत्यु हो गई। वर्ष 2015 में एक लड़की, जबकि वर्ष 2017 में दो लड़की की मृत्यु हुई थी। इनमें दो लड़कियों की की मौत अस्पातल में हुई थी। बालिका गृह के रिकॉर्ड में तीन लड़कियां फरार थी। इसके अलावा एक लड़की गायब थी।
28 मार्च, 2018 को आई उस लड़की के बारे में बालिका गृह के रजिस्टर में इंट्री मिली पर डिस्चार्ज लिस्ट में उसका नाम नहीं था। जांच में वह गायब लड़की विवाह के बाद मुजफ्फरपुर जिले में ही अपने ससुराल में मिली। डीजीपी केएस द्विवेदी ने बताया कि तीन मृत लड़कियों के बारे में भी पुलिस वेरिफिकेशन कर रही है। बालिका गृह के रजिस्टर व अन्य दस्तावेजों की जांच में पता चला है कि दिसंबर, 2013 से ही तीनों लड़कियां फरार हैं। एक माह पहले नवंबर में ही उन्हें बालिका गृह लाया गया था। कहा यह गया कि एक लड़की को मार कर दफना दिया गया. खुदाई हुई लेकिन कोई शव या अवशेष नहीं मिले हैं।
इस बालिका गृह के संचालन का जिम्मा स्वयंसेवी संस्था ‘सेवा संकल्प एवं विकास समिति’ को 24 अक्टूबर, 2013 को सौंपा गया था। जो पहली नवंबर, 2013 से इसका संचालन कर रही थी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने ही टाटा इंस्टीच्यूट आफ सोशल साइंसेस(टिस) को राज्य के बाल एवं बालिका गृहों के सोशल ऑडिट का जिम्मा 30 जून, 2017 को सौंपा था। उसने सरकार को इस वर्ष 27 अप्रैल को अपनी रिपोर्ट सौंपी। रिपोर्ट में मुजफ्फरपुर के बालिका गृह में यौन¨हिंसा, र्दुव्‍यवहार एवं उत्पीड़न की घटनाओं का उल्लेख किया गया था।
रिपोर्ट के आधार पर 30 मई, 2018 को महिला थाना, मुजफ्फरपुर में प्राथमिकी दर्ज कराई गई।
ज़रा सोचें कि 30 जून 17 को पता चला और ११ महीने बाद 30 मई 2018 को प्राथमिकी दर्ज हुयीं और कार्यवाही उसके भी तीन महीने बाद शुरू हुई. यह समूचे सिस्टम के सड़  जाने की बानगी हैं।
बालिकाओं के बयान पर मुजफ्फरपुर बालिका गृह के संचालक ब्रजेश ठाकुर को गिरफ्तार किया गया। इसके अलावा किरण कुमारी, मीनू देवी, मंजू देवी, इंदू कुमारी, चंदा देवी, नेहा कुमारी, हेमा मसीह, विकास कुमार, रवि कुमार रौशन को गिरफ्तार किया गया है। ये सभी बालिका गृह के कर्मी हैं।
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