Close Menu
Shagun News India
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Wednesday, August 12
    Shagun News IndiaShagun News India
    Subscribe
    • होम
    • इंडिया
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • राजस्थान
    • खेल
    • मनोरंजन
    • ब्लॉग
    • साहित्य
    • पिक्चर गैलरी
    • करियर
    • बिजनेस
    • बचपन
    • वीडियो
    • NewsVoir
    Shagun News India
    Home»धर्म»Spirituality

    मंदोदरी ने बनवाया था मेरठ का नवचण्डी मन्दिर

    ShagunBy ShagunMay 28, 2026 Spirituality No Comments10 Mins Read
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Mandodri built the Navchandi Temple in Meerut.
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Post Views: 157

    देवेश पांडेय ‘देश’

    मेरठ के सूरजकुण्ड के निकट नौचन्दी के मैदान में बना नवचण्डी मन्दिर का पौराणिक महत्व है। ऐसी मान्यता है कि सबसे पहले इसे लंका नरेश रावण की पत्नी मंदोदरी ने बनवाया था। पुराणों के अनुसार मधुरा नाम की एक अप्सरा थी। मधुरा माता पार्वती से अत्याधिक प्रभावित थी। वह माता पार्वती से बहुत प्रेम करती थी। एक बार मधुरा माता पार्वती से मिलने कैलाश पर्वत पहुंची। लेकिन माता पार्वती उस समय वहां उपस्थित नहीं थीं। मधुरा ने जब भगवान शिव को देखा तो वह उन पर मुग्ध हो गयी। मधुरा येन-केन-प्रकारेण शिव जी को आकर्षित करने में लग गयी और उसने शिव जी की पूजा भी प्रारम्भ कर दी। कुछ समय पश्चात् माता पार्वती वहां पहुंची तो यह सब देखकर मधुरा के ऊपर बहुत क्रोधित हुईं।

    क्रोध से तमतमायी माता पार्वती ने मधुरा को श्राप दिया कि जो नीच कर्म मधुरा ने किया है, उसके कारण वह मेढक बन जायेगी।श्राप से व्यथित हो मधुरा ने माता पार्वती से क्षमा याचना की। लेकिन पार्वती जी तब भी मधुरा को क्ष्मा करने को तैयार नहीं हुईं। तब भगवान शिव ने पार्वती जी से कहा कि इसको इसके कृत्य के लिए क्ष्मा मत करों, लेकिन अपने श्राप को थोड़ा शिथिल कर दो। शिव जी की प्रार्थना पर पार्वती जी मान गयीं और मधुरा को बारह वर्षों के स्थान पर केवल एक वर्ष कूप में रहने के लिए कह दिया।Mandodri built the Navchandi Temple in Meerut.

    श्राप में शिथिलता के कारण मधुरा को सिर्फ एक वर्ष ही कूप में रहना पड़ा। इस बीच मधुरा निरन्तर पार्वती जी की अराधना करती रही। वहीं दूसरी ओर असुरों के देवता गयासुर तथा उसकी पत्नी हेमा के दो पुत्र थे। वो यह चाहते थे कि दोनों को एक-एक पुत्री हो जाये। बेटी के लिए दोनों कई वर्षों से कठिन तपस्या कर रहे थे। इसी दौरान एक वर्ष बाद मधुरा कूप में अपने असली रूप में आ गयी और सहायता के लिए पुकारने लगी। मधुरा की पुकार और क्रंदन सुनकर गयासुर अपनी पूजा समाप्त करके कूप के पास पहुंचा और उसने मधुरा को गोद में उठाकर बाहर निकाल लिया। उसने मधुरा को अपनी पत्नी बना लिया। बाद में मधुरा से जो कन्या उत्पन्न हुई उसका नाम मंदोदरी रखा गया। पंच कन्याओं में से एक मंदोदरी को चिर कुमारी के नाम से भी जाना जाता है। यह भी कहा जाता है कि अप्सरा हेमा की पुत्री होने के कारण मंदोदरी अत्यन्त रूपवती थी, साथ ही वह अर्ध दानव थी। मंदोदरी ने भगवान शिव से वरदान मांगा था कि उसका पति धरती पर सबसे विद्वान और शक्तिशाली हो।

    कुछ समय बाद रावण एक बार गयासुर से मिलने आया। रावण ने गयासुर की पुत्री मंदोदरी को देखा तो वह मंदोदरी पर अत्यन्त आसक्त हो गया। मंदोदरी पर मंत्रमुग्ध रावण ने अपने हृदय की बात अन्तत: गयासुर से कह दी। लेकिन गयासुर ने रावण का प्रस्ताव ठुकरा दिया। बाद में रावण ने युद्घ में गयासुर को परास्त करके मंदोदरी से विवाह कर लिया। विवाह के बाद मंदोदरी से रावण को तीन पुत्र रत्नों की प्राप्ति हुई। मंदोदरी को यह पता था कि रावण बहुत अहंकारी है और वह जिस मार्ग पर चल रहा है, ऐसे में उसका विनाश निश्चित है।

    मंदोदरी को अपना भविष्य पहले से ही ज्ञात था। मंदोदरी भविष्य में होने वाले अपने कष्टों को कम करने के लिए निरन्तर देवी की अराधना करती थी। पौराणिक कथाओं के अनुसार नवरात्र के दौरान ही मंदोदरी ने मेरठ में चण्डीदेवी की प्रतिमा स्थापित करके सबसे पहले पूजा की थी। वह कई-कई दिनों तक देवी की प्रतिमा के सामने बैठी रहती और निरन्तर अराधना में लीन रहती। उसने अपने महल से मन्दिर तक एक गुफा भी बनवायी थी। वह बहुधा इसी गुफा मार्ग से ही मन्दिर जाती थी। कहते है कि मंदोदरी का बनवाया हुआ गुप्त गुफा मार्ग आज भी विद्यमान है। महल से लेकर मन्दिर तक गुप्त गुफा मार्ग की लम्बाई लगभग चार किलोमीटर से भी ज्यादा है। अंग्रेजों द्वारा करायी गयी खोदाई में सुरंग के प्रमाण मिले थे, लेकिन बाद में अंग्रेजों ने खोदाई का काम बन्द करवा दिया।Mandodri built the Navchandi Temple in Meerut.

    प्राचीन नवचण्डी मन्दिर पर भी गुगल आक्रमणकारियों ने कई बार हमले किये और कई बार इसको नेस्तनाबूत कर दिया। लेकिन जब भी इस मन्दिर को नष्ट किया गया, यह दोबारा नये रूप में खड़ा कर दिया गया। नवचण्डी मन्दिर के प्रबन्धक महेन्द्र कुमार शर्मा बताते हैं कि मुगल शासनकाल में लगभग एक हजार वर्ष पहले कुतुबुद्दीन ऐबक के सेनापति बाले मियां ने मन्दिर और उसके आस-पास की जमीन पर कब्जे के लिए लड़ाई लड़ी थी।मन्दिर को बचाने के लिए हजारों हिन्दुओं ने अपने प्राणों की आहुति दे दी थी। कहते हैं कि जहां आज बाले मियां की मजार बतायी जाती है, वहां ही मंदोदरी द्वारा बनवाया गया नवचण्डी मन्दिर और उसके द्वारा स्थापित मूर्ति थी।

    मन्दिर की रक्षा के लिए उस समय पण्डित हजारी लाल शर्मा की बेटी मधु चण्डी बाला मन्दिर के द्वार पर आ खड़ी हो गयी। उसने नसिर्फ बाले मियां का विरोध किया बल्कि अपनी तलवार से बाले मियां और उसकी सेना को हानि भी पहुंचायी। इसी युद्घ में मधु चण्डी बाला की तलवार से बाले मियां की अंगुलियां भी कट गयीं थीं। जहां बाले मियां की अंगुलियां कटकर गिरीं थीं, उसी स्थान पर बाद में मुसलमानों ने बाले मियां की मज़ार बना दी थी। इतिहासकार बताते हैं कि बाले मियां की असली मजार बहराइच में है, बहराइच में उर्स भी लगता है।

    बाद में इन्दौर की महारानी अहिल्या बाई होल्कर ने पुराने मन्दिर के बगल में ही गुफा के स्थान पर मन्दिर बनवाकर मूर्ति की दोबारा स्थापना करवा दी थी। लेकिन मन्दिर को मुसलमानों ने तीसरी बार भी क्षति पहुचायी थी, तब अंग्रेजों का शासन था। तब ब्रिटिश शासन में अंग्रेज अफसरों के सहयोग से पण्डित चण्डी प्रसाद की माँ ने प्रतिमा की पूजा-अर्चना शुरु कर दी थी। इसके बाद नवचण्डी मन्दिर का निर्माण हुआ। तब से यहीं पर इस मन्दिर में पूजा-अर्चना के लिए लोग आते हैं। जब से चण्डी देवी मन्दिर की स्थापना हुई, तब ही से यहां निरन्तर यहां मेला लगता आ रहा है। होली के एक सप्ताह बाद यह मेला लगता है। 18वीं शताब्दी में यह मेला सिर्फ एक दिन का लगता था। इसके बाद यह मेला तीन दिनों के लिए लगने लगा था, लेकिन अब इसे बढ़ाकर एक महीने के लिए कर दिया गया है।

    पौराणिक नवचण्डी मन्दिर का इतिहास यूं तो रामायणकाल से जुड़ा हुआ है, लेकिन मुगलकाल से चले आ रहे मेले ने मेरठ के कई स्वतन्त्रता आन्दोलनों को भी महसूस किया। स्वतन्त्रता सेनानियों के संघर्ष को नवचण्डी मन्दिर और यहां लगने वाले नवचण्डी मेले ने बहुत करीब से मुगल आक्रमणकारियों की कृत्यो और बर्बरता को महसूस किया है। अंग्रेजों के बूटों के अत्याचारों और स्वतन्त्रता सेनानियों के ब$गावती सुरों को भी इसने खूब जांचा-परखा है। शहादतों का दर्द इसने भी झेला है।

    सन् 1857 ईस्वी. के स्वतन्त्रता संग्राम के दौरान इसका सिफ्र इसलिए मान-मर्दन किया गया क्योंकि इसने कई हिन्दू और मुस्लिम भारत माँ के लाडलों को कई बार पनाह दी थी। बावज़ूद इसके मन्दिर का गौरव कभी कम नहीं हुआ और न ही नवचण्डी मेले की रौनक पर कोई फर्क पड़ा। देश स्वतन्त्र हुआ तो बंटवारे का वक्त आया, तब मेरठ क्या पूरे देश में साम्प्रदायिक माहौल बिगड़ गया था।अपने जिन सपूतपें को देखकर माँ चण्डी देवी इतराया करती थीं, उन्हीं के बीच खून-$खराबा देखकर माँ का दिल तार-तार भी हुआ। चाहें मुगल शासन रहा हो या अ्रग्रजह हुकूमत, या फिर बंटवारे के दौरान साम्प्रदायिक दंगे हुए हों, लेकिन आज तक कभी ऐसा नहीं हुआ कि नवचण्डी मेले का आयोजन न हुआ हो। यहां तक कि कोरोना काल में भी इससे परहेज़ नहीं किया गया।

    इण्डो-पाक मुशायरा तो इस मेले की जान हुआ करता था। यह मेला पिछले 350 सालों से लगातार लग रहा है। इस मेले में दूर-दराज़ से ही नहीं वरन्ï विदेशों से भी व्यापारी आते हैं। इस मेले में अरबी घोड़ों का व्यापार चरम पर होता है।सेना और विभिन्न राज्यों की पुलिस भी यहीं से घोड़ों को खरीदती है। मेरठ में जब-जब साम्प्रदायिक दंगे हुए तब-तब नवचण्डी मेले ने ही हिन्दू और मुस्लिमों के दिलों की कडवाहट दूर की। दंगों के बाद भी मेले में दोनों पक्षों के लोग एक साथ देखे गये। सन्ï 1672 ईस्वी. में शुरु हुए नवचण्डी मेले का नाम धीरे-धीरे नोचन्दी मेला हो गया। समय के साथ-साथ इसका आकार भी वृहद होता गया, उसी प्रकार इसका स्वरूप और नाम भी बदल गया।

    मन्दिर के पुजारी महेन्द्र शर्मा बताते हैं कि उनका परिवार सात पीढिय़ों से इस मन्दिर की सेवा कर रहा है। जब चण्डीदेवी मन्दिर की स्थापना हुई थी, मभी से इस मन्दिर में देवी के नौ रूपों को पूजा जाता है, इस लिए इस मन्दिर का नाम नवचण्डी पड़ा। वास्तव में नव चण्डी शक्ति का एक ही अंग, देवी के नव रूपों का स्वरूप है। नव चण्डी की शक्ति और उसका पूजन किसी भी भक्त को साधना की पराकाष्ठा तक पहुंचा देने में अत्यन्त सहायक सिद्घ बनता है। नव चण्डी का पूजन एक यज्ञ का रूप होता है। नव चण्डी साधना एक नव दुर्गा पूजा है।

    इस पूजा के माध्यम से जीवन में शक्ति, समृद्घि और सफलता की प्राप्ति की जा सकती है। दुर्गा पूजा द्वारा सभी प्रकार की शक्तियों की प्राप्ति संभव है। नवचण्डी पूजन कई कारणों से किया जाता है। नव चण्डी यज्ञ सभी कष्टïों को दूर करता है। इस पूजन द्वारा किसी भी प्रकार के शत्रुओं का दमन किया जा सकता है। कुछ मामलों तो अगर विरोधी किसी काम को पूरा करने में बाणा उत्पन्न करते हैं तो इस पूजा के क्षरा उस काम में आने वाली सारी बाधाएं स्वत: दूर हो जाती हैं। इस पूजा का अनुष्ठïान आरम्ीा करना सफलता के कई मार्ग प्रशस्त करने वाला होता है।

    ज्योतिष शास्त्र के अनुसार नवचण्डी का का यज्ञ करने से पाप ग्रहों की शान्ति संभव होती है। राहु, केतु एवं शनि आदि पाप ग्रहों से बचने के लिए नवचण्डी पाठ का जाप अत्यन्त चमत्कारी उपाय है। कई बार कुण्डली में में उपस्थित कुछ ग्रहों के द्वारा जातक के जीवन पर कई प्रकार के उतार-चढ़ाव देखे गये हैं। जीवन में आने वाली विभिन्न प्रकार की आपदाओं से बचने के लिए ग्रह शान्ति करना अत्यन्त श्रेष्ठïकर होता है। इस प्रकार ग्रह शान्ति से जातक के पाप ग्रहों से मिलने वाले प्रभावों ेस मुक्ति प्राप्त होती है और बंरे ग्रहों का प्रभाव नष्टï होता है। नवचण्डी पूजा में भगवान गणेश, शिव, नव ग्रहतथा नव दुर्गा की पूजा होती है। इसके प्रभाव से व्यक्ति के जीवन में धन्य-धान्य की वृद्घि होती है।

    नवचण्डी पूजा और हवन के माध्यम से देवी का आशीर्वाद प्राप्त होता है। अगर आपको ग्रह-नक्षत्र आपके पक्ष में नहीं हो तो ऐसे में उन सभी को अपने अनुकूल करने के लिए नवचण्डी यज्ञ बहुत ही लाभकारी होता है। नवचण्डी यज्ञ पूरा होने पर दिव्य अनुभूतियों की प्राप्ति होती है। चारों ओर का वातावरण सकारात्मक बनता है, मन शान्त होता है और सभी विपरीत परिस्थितियां अनुकूल हो जाती हैं। नवचण्डी उपासना कोसृष्टिï की रचना करने वाला माना गया है। नवचण्डी अराधना शक्तियों को जागृत करने का अत्यन्त सरल उपाय है। नवचण्डी वह शक्ति है जो सृष्टिï के संचालन के लिए आवश्यक है। योगमाया वह शक्ति है जो व्यक्त और अव्यक्त रूपों में है और सभी ओर व्याप्त है।

    भगवान कृष्ण ‘योगमाया’ पर आश्रित होकर अपनी लीला करते हैं। राधा जी कृष्ण जी की आदि शक्ति हैं। भगवान शिव भी शक्ति बिना शक्तिहीन होते हैं। दर्शन शास्त्र में किसी न ेिसी रूप में शक्ति की चर्चा होती रही है। पुराणों में भी विभिन्न देवताओं की विभिन्न शक्तियों की कल्पना की गयी है। तन्त्र के अनुसार किसी अधिष्ठïात्री देवी की शक्ति के रूप में जिसकी उपासना की जाती है, वह उस शक्ति के उपासक शाक्त कहे जाते हैं, जो शाक्त सम्प्रदाय से जुड़े होते हैं। ये शक्ति भी सृष्टि की रचना करने वाली सम्प्रदायों के तन्त्रशास्त्रों में शक्ति की कल्पना की गयी है।

    Shagun

    Keep Reading

    The Mystery of Lord Shiva's Rudra Form: When Peace Becomes a Support for Unrighteousness

    भगवान शिव के रूद्र रूप का रहस्य: जब शांति अधर्म का सहारा बने

    Maa Khaira Bhavani had appeared in the form of a divine beam of light.

    ज्योति पुंज के रूप में प्रकट हुईं थीं माँ खैरा भवानी

    People grappling with the unending problem of adulteration.

    मिलावट की अंतहीन समस्या से झूझते लोग

    Do you know why the Kanwar Yatra is undertaken and what its history is?

    क्या आप जानते हैं कांवड़ यात्रा क्यों की जाती है और क्या है इसका इतिहास

    India's Golden Burst at the Commonwealth Games: Boxing Makes History, Neeraj Shines Again

    कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का स्वर्णिम धमाका: मुक्केबाजी ने रचा इतिहास, नीरज ने फिर कमाल दिखाया

    India's Glorious Performance: Historic 'Golden Double' and Silver in Judo; Lovpreet Wins Silver in Weightlifting

    भारत का गौरवमयी प्रदर्शन: जूडो में ऐतिहासिक ‘गोल्डन डबल’ और सिल्वर, वेटलिफ्टिंग में लवप्रीत का सिल्वर

    Leave A Reply Cancel Reply

    Advertisment
    Google AD
    We Are Here –
    • Facebook
    • Twitter
    • YouTube
    • LinkedIn

    EMAIL SUBSCRIPTIONS

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    About



    ShagunNewsIndia.com is your all in one News website offering the latest happenings in UP.

    Editors: Upendra Rai & Neetu Singh

    Contact us: editshagun@gmail.com

    Facebook X (Twitter) LinkedIn WhatsApp
    Popular Posts
    UP's stellar performance on GeM: Three national awards alongside ₹1 lakh crore in procurement.

    जेम पर यूपी का शानदार प्रदर्शन, ₹1 लाख करोड़ खरीद के साथ तीन राष्ट्रीय पुरस्कार

    August 11, 2026
    Rajasthani Film ‘Omlo’ Makes Waves on OTT, Reaches 120+ Countries and Claims No. 1 Spot

    राजस्थानी फिल्म ‘ओमलो’ का ओटीटी पर जलवा, 120 देशों तक पहुंची कहानी

    August 11, 2026
    The Mystery of Lord Shiva's Rudra Form: When Peace Becomes a Support for Unrighteousness

    भगवान शिव के रूद्र रूप का रहस्य: जब शांति अधर्म का सहारा बने

    August 11, 2026
    A courtroom battle of truth, power, and conspiracy—‘Article 25’ is ready.

    सच, सत्ता और साजिश की कोर्टरूम जंग -‘आर्टिकल 25’ तैयार

    August 10, 2026

    स्पाइडर-मैन की आंधी में भी कायम रहा ‘दिल दीवाना हो गया’ का जादू

    August 10, 2026

    Subscribe Newsletter

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    Privacy Policy | About Us | Contact Us | Terms & Conditions | Disclaimer

    © 2026 ShagunNewsIndia.com | Designed & Developed by Krishna Maurya

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.

    Newsletter
    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading