वायरल मुद्दा:
इस साल 2019 की भयंकर बारिश ने देश के कई राज्यों में कहर ढा दिया है। जिससे कई लोगों की जान चली हाई है और लोगों को घर बार छोड़कर अन्य सुरक्षित स्थानों पर पलायन के लिए मजबूर होना पड़ा। पिछले कुछ दिनों की बारिश ने उत्तर प्रदेश और बिहार में प्राकृतिक आपदा का रूप ले लिया है।
बता दें कि उत्तर प्रदेश में 80 और बिहार में अब तक 30 से ज्यादा मौतें हो चुकी है। ये मौतें बाढ़ में डूबने, बिजली गिरने, दीवार गिरने और करंट की चपेट में आने से हुई हैं। पटना सहित उत्तर बिहार के कई जिलों में पिछले चार-पांच दिनों से लगातार बारिश ने लोगों का जीना दूभर कर दिया है। राजधानी पटना में हालात यह हो गए हैं कि मुख्य सड़कों से लेकर ज्यादातर मामलों में 3 से 5 फुट तक पानी भर गया है।
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भूतल पर रहने वालों को अन्यत्र पलायन करना पड़ा है। कहीं-कहीं मुख्य सड़क पर नाव चलाने की नौबत आ गई। बाजारों और अस्पतालों तक में पानी घुस गया। बिजली और पानी की आपूर्ति बाधित हो गई ऐसे मौके पर ही देखने की जरूरत होती है कि लोगों को आपात मदद की जरूरत को देखते हुए सरकारी व्यवस्था की तैयारी कितनी है। लोगों को मदद कैसे और कितनी मिल पा रही है।

सरकार इसे प्राकृतिक आपदा कहकर पल्ला झाड़ रही है। इसके अलावा पिछली सरकारों को दोष देकर इससे पल्ला तो नहीं झाड़ सकती! पटना की स्थिति को देखते हुए अब एक बड़ा सवाल यह है कि अगर बरसात पूरी तरह बंद हो जाती है, तो गलियों मोहल्लों में जो 3 से 5 फुट तक पानी जमा है। वह कैसे निकलेगा?
फिलहाल पटना से सटी गंगा और सोन नदी तो पहले से ही खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। शहर के नालों का पानी निकल नहीं रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का कहना है कि यह तो प्राकृतिक आपदा है इसके लिए क्या किया जा सकता है? एक वरिष्ठ मंत्री ने कह दिया कि पटना में जल निकासी की व्यवस्था न होने की दोषी पिछली सरकारें रही हैं।

इस पर विपक्ष का सवाल है कि 15 सालों से तो आपकी ही सरकार है। आखिर इस समय जब लोग पूरी बदहाली की स्थिति में हैं तो इस राजनीतिक पैंतरेबाज़ी से तो समस्या का कोई हल नहीं निकल सकता! सच तो यह है कि शहरी नियोजन में जल निकासी की समुचित व्यवस्था एक बड़ी भूमिका निभाती है लेकिन विडंबना है कि हर तरफ ऊंची ऊंची गगनचुंबी इमारतें खड़ी होती जा रही हैं लेकिन सरकार यह सोचना जरूरी नहीं समझती कि आखिर जब भारी बरसात या बाढ़ की हालत होगी तो गली मोहल्लों यह सड़कों पर जमा हो चुका पानी के निकलने का रास्ता क्या होगा? ऐसे में आपदा प्रबंधन विभाग की तैयारी पर भी सवाल उठते ही हैं?







