जी के चक्रवर्ती
किसी भी युद्ध को जीतने के लिये सैन्य शक्ति के अतिरिक्त अनेकों तरह की हथियारों की आवश्यकता होती है। आज के वैज्ञानिकी युग में वैज्ञानिकों द्वारा एकके बाद एक खतरनाक हथियारों की खोज कर सम्पूर्ण दुनिया को आश्चर्य में डाल दिया है जिससे वर्तमान समय में किसी भी दो देश के मध्य होने वाले युद्ध मे हथियार के रूप में प्रयोग किया जा सकता है। वैसे युद्ध मे तरह-तरह के आग्नेय अस्त्रों का उपयोग एक लम्बे समय से होता चला आ रहा है लेकिन इन आग्नेय अस्त्रों के उपयोग से बहुसंख्या में लोगों के जान माल के साथ ही प्राकृतिक संसाधनों के अतिरिक्त धन-संपत्तियों का क्षति होने स्वाभाविक सी बात है। युद्ध की स्थिती में हम इंसानो द्वारा बनाये गए अनेक तरह की संम्पदायें नष्ट हो जाते हैं इसलिये हमारे वैज्ञानिकों ने एक ऐसे अस्त्रों को खोजने सफलता पाई है कि जिससे धन संपदाएं विना नष्ट हुये युद्ध में केवल और केवल लोगों के प्राणों को क्षति पहुंचाया जा सके इसलिये विज्ञानिकों द्वारा अब बायों हथियार बनाने की शुरूआत कर दिया है जिसका प्रभाव दुश्मन के मेडिकल सिस्टम’ को ही ध्वस्त कर देगा, ऐसे में हमारे ऊपर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा कि इसकी कल्पना मात्र से हमारे शरीर मे सिहरन दौड़ जाती है।
हमारे एक पड़ोसी देश चीन वर्ष 2015 से SARS कोरोना वायरस को सैन्य हथियारों के रूप में इस्तेमाल करने की तैयारी में लगा हुआ है। कुछ एक अधिकारी लोग अब ऐसा मानने लगे हैं कि आज महामारी मचाने वाली कोरोना वायरस चीनी लैब से ही निकला है।
“पीपुल्स लिबरेशन आर्मी” के (पीपल्स लिबरेशन आर्मी चीन की सेना का नाम है और उसके पांच मुख्य अंग जल,थल और वायु रॉकेट फोर्स एवं रणनीतिक सपोर्ट सेना है। पीपल्स लिबरेशन आर्मी दुनिया की सबसे बड़ी सेना है इसमें करीब 23 लाख सैनिकों का जमावड़ा है।)
वैज्ञानिकों और स्वास्थ्य अधिकारियों के डोजियर की माने तो कुछ बीमारी के साथ छेड़छाड़ कर एक ऐसे हथियार को बनाये जाने के जांच की पुष्टि हुई है, जिसे आज से पहले कभी देखा-सुना नही गया था।
कुछ अधिकारी हमारे देश को लेकर चिंतित हैं क्योंकि किसी भी देश की लैब में होने वाली इस तरह की गतिविधियों पर कोई प्रतिबंध नहीं है और ऊपर से किसी को कानों कान तक खबर भी नही लगती है। ऐसे में आने वाले समय का तीसरा विश्व युद्ध अब तक हुये दो विश्व युद्ध से बिल्कुल पृथक बायोलॉजिकल युद्ध होगा जिसमे कैमिकल अस्त्रों से युद्ध लड़ा जाएगा। इसमें ऐसा भी दावा किया गया है कि बायो हथियार तीसरे विश्व युद्ध में किसी भी देश के जीत के लिए एक प्रमुख हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जाने वाला अस्त्र होगा। हां यह मुद्दा अलग है कि इसका उपयोग कौन सी परिस्थितिओं और किस तरह किया जाये कि जिससे अधिक से अधिक लोगों के प्राणों को क्षति पहुंचाया जा सके।
चीनी वैज्ञानिकों का यह मत है कि ऐसे हथियारों से हमले दिन के समय नहीं किए जाएंगे क्योंकि सूरज का प्रकाश रोगजनक कीटाणुओं को समाप्त कर सकती है, जबकि वर्षा या बर्फीली एयरोसोल हवा में मौजूद कीटाणुओं को अप्रभावित करते हैं। इसके स्थान पर इसे रात में या फिर सुबह, शाम, या जब बादल छाए हों, ‘उस समय स्थिर हवा की दिशा में लक्ष कर छोड़े जाएं तो हवा के माध्यम वे कीटाणु वहां तक पहुंचने में सक्षम होंगे।
भविष्य में होने वाले युद्धों में यदि ऐसे हमलों हुये तो अस्पतालों में आने वाले मरीजों की संख्या इतनी अधिक होगी कि उस देश का स्वास्थ्य सिस्टम ध्वस्त हो जाएगा और अधिक संख्या में लोग अपने जान से हाथ धोने में मजबूर होएंगे। अमेरिका ने चीन के इस घातक इरादों पर चिंता जरूर व्यक्त किया है। वहीं ब्रिटेन भी उसके इस इरादों को लेकर चिंतित है कियूंकि चाहे कितना भी सख्त नियंत्रण इस पर कर लिया जाये उसके बावजूद यह हथियार बहुत खतरनाक साबित होंगे।
आज देश में बढ़ते कोरोना वायरस के मामलों में लोग लगातार आलोचना कर रहे है कि कोरोना एक नया वायरस है, कोई नहीं जानता कि ये कहां से और कैसे उत्पन्न हुआ, लैब में या इंसानों द्वारा कुछ जानवरों को खाने से, सेना जानती है कि रासायनिक, बैक्टीरियोलॉजिकल और रेडियोलॉजिकल युद्ध क्या होता है? क्या हम एक नए युद्ध की विभीषिकाओं का सामना नहीं कर रहे हैं?







