विकास की राह में चुनौतियां भी

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आज 15 अगस्त है, हमारी वर्षों की गुलामी से मुक्ति का दिन। सौभाग्य का दिन। 15 अगस्त 1947 के इसी दिन देश ने मुक्त आकाश में स्वतंत्रता की पहली उड़ान भरना शुरू किया, तो यह हमारी अपनी पहचान का ऐतिहासिक दिन बन गया।

देश अब आजादी के सात दशक पार कर चुका है। भारत आज विश्व पटल पर अपनी विशेष पहचान दर्ज करा चुका है। किसी देश की आजादी के सात दशक कम तो नहीं होते, लेकिन शुरुआत में ही देश की जो खस्ता हालात हमें अंग्रेजों से विरासत में मिली थी। उसे नए सिरे से गढ़ने और संवारने के लिए सात दशक भी बहुत ही कम नहीं होते लेकिन हमारे देश के कर्णधार नेताओं ने इन शुरुआती चुनौतियों का जिस संकल्प और दृढ़ता से सामना किया और दिनोंदिन प्रगति के नए सोपान करें। यह उसी का नतीजा है कि आज हम दुनिया के शक्ति संपन्न देशों के समक्ष सिर उठाकर बराबरी के संबंध बनाने में सक्षम हो सके हैं।

आजादी के बाद पंडित जवाहरलाल नेहरू देश के प्रथम प्रधानमंत्री बने, तो उन्होंने दूरदृष्टि का परिचय देते हुए हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स, भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स और भाखड़ा नांगल डैम जैसी परियोजनाओं का देश में जाल बिछा दिया। ग्रामीण उद्योगों को भी प्रसन्न करने का काम हुआ। पंचवर्षीय योजनाओं के माध्यम से तत्कालिक जरूरतों के अनुरूप खाका तैयार करने का काम भी परवान चढ़ा। पहले देश खाद्यान्न समस्या से जूझ रहा था। आज खाद्यान्न से देश के भंडार भरे हैं। देश में गरीबी और भूख से निजात दिलाने की तेजी से कदम बढ़ाए हैं।

आदेश के नए नेतृत्व में हम चौतरफा प्रगति के नए नए शिखर चूम रहे हैं। अर्थव्यवस्था में भी देश आज फ्रांस को पीछे छोड़ते हुए विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। उम्मीद की जा रही है कि इसी वर्ष हम अर्थव्यवस्था के मामले में ब्रिटेन को भी पीछे छोड़ कर पांच बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएंगे। भारत दुनिया में आज की बड़ी ताकत बनकर उभरा है प्रगति की महागाथा के साथ ही कुछ विडंबनाएं भी सामने आ रही हैं जो इसमें ग्रहण लगाने का काम कर रही हैं। देश के अन्नदाता कहे जाने वाले किसानों की आत्महत्या जैसी घटनाओं को रोक नहीं पा रहे हैं। असंगठित मजदूरों की हालत आज भी भगवान भरोसे हैं। एक तरफ आतंकवाद का खतरा बढ़ा है, तो दूसरी तरफ अर्थव्यवस्था आर्थिक असमानता की खाई चौड़ी होती जा रही हैं।

व्यक्तिगत भ्रष्टाचार संस्थागत रूप लेता जा रहा है सरकारी कार्यालयों में भ्रष्टाचार एक कार्य संस्कृति की तरह व्याप्त है मॉब लिंचिंग की घटनाओं में शक के आधार पर निर्दोष लोग मारे जा रहे हैं। महिलाओं और छोटी बच्चियों से बलात्कार की घटनाएं देश को झकझोर रही हैं बालिका गृहों में भी नाबालिग बच्चियों से दरिंदगी हो रही है जिसमें रसूखदारों के नाम उजागर हो रहे हैं। इस विडंबना से जब तक देश को मुक्ति नहीं मिलेगी तब तक हमारी सारी प्रगति और आजादी अधूरी ही कही जाएगी लोकतंत्र को इस घुटन से आजाद कराने का काम अभी बाकी है तभी पूर्ण आज़ादी मिलेगी।

-जी क़े चक्रवर्ती

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