विभागों के पुनर्गठन पर योगी गंभीर

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डॉ दिलीप अग्निहोत्री
उत्तर प्रदेश में विभागों के पुनर्गठन का विषय पुराना है। लेकिन पिछली सरकारों ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया। अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसके प्रति गंभीरता दिखाई है। फिलहाल कैबिनेट में इस विषय पर अंतिम निर्णय नहीं हो सका, लेकिन सभी संबंधित बिंदुओं पर विचार और निर्णय तक पहुंचने की रूपरेखा निर्धारित हो चुकी है।
पिछली कमेटी में विचार के जो तथ्य छूट गए थे, इस बार उनपर भी विचार किया जाएगा। योगी कैबिनेट में विभागों के पुनर्गठन प्रस्ताव पर चर्चा की गई। इसमें  केंद्र के नए मंत्रालय के अनुरूप बनाने पर विचार किया गया।  इस प्रस्ताव को नए सिरे से विचार करके पुनः कैबिनेट  कैबिनेट के समक्ष प्रस्तुत किया  जाएगा। इसके लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में  गठित समिति विचार करेगी। संभावना है कि अगले हफ्ते ही समिति की रिपोर्ट कैबिनेट में रख दी जाएगी।
फिलहाल केंद्र की तर्ज पर जल संरक्षण पर एक नया मंत्रालय जोड़ा जाएगा। न्यूनतम सरकार और अधिकतम शासन भाजपा की नीति रही है। केंद्र में नरेंद्र मोदी और कई प्रदेशों की भाजपा सरकार इस नीति के अनुरूप ही  काम कर रही है। योगी आदित्यनाथ भी इस दिशा में प्रयास करते रहे है। इसके पहले भी एक उच्च स्तरीय समिति ने सत्तावन विभाग ही रखने का सुझाव दिया था।
ऐसा नहीं है कि यह विषय केवल नीति आयोग ने ही उठाया है। उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के अंतिम मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी के सामने भी यह विषय लाया गया था। लेकिन तब पर्याप्त गम्भीरता नहीं दिखाई गई। यदि पहले ही इसपर कारगर कदम उठाए जाते तो समस्या इतनी जटिल नहीं होती। वस्तुतः सरकारी धन पर नेताओं को सुविधा देने और उन्हें संतुष्ट रखने के लिए विभागों का इतना जाल फैलाया गया था। नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री बनने के बाद इस विषय पर ध्यान दिया था। विभाग कम होते है तो निवेश भी आसान हो जाता है। सिंगल विंडो की कल्पना इसी से जुड़ी है। मोदी सरकार ने इसे संभव कर दिखाया था। इधर उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ ने भी ऐसा कर के दिखाया। यही कारण है कि उत्तर प्रदेश में अब तक कि सर्वाधिक सफल इन्वेस्टर समिट का आयोजन हुआ। इतना ही नहीं करीब साठ हजार खरीद रुपये के प्रस्तावों का शिलान्यास भी हो चुका है। दूसरे शिलान्यास की तैयारी जोरों पर है।
दूसरे कार्यकाल की शुरुआत नरेंद्र मोदी ने जल से संबंधित विभागों के पुनर्गठन के साथ किया। इससे भी कई प्रदेशों में विभागों के पुनर्गठन में तेजी आई है।
उत्तर प्रदेश की कैबिनेट भी इस पर निर्णय के करीब पहुंचने का प्रयास कर रही है। मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली कमेटी पिछली रिपोर्ट पर आगे बढ़ सकती है। चर्चा है कि एक जैसी प्रकृति के कई विभागों को एक में तब्दील करने पर विचार होगा।  चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, चिकित्सा शिक्षा, आयुष, महिला कल्याण, बाल विकास एवं पुष्टाहार को  स्वास्थ्य विभाग के रूप में पुनर्गठित करने पर विचार होगा। इसी प्रकार शिक्षा के अंतर्गत  बेसिक शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा, खेलकूद एवं युवा कल्याण, व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास, उच्च शिक्षा, प्राविधिक शिक्षा, समाहित हो सकते है। कृषि विभाग में भी पुनर्गठन की संभावना है।
इसमें कृषि उत्पादन भूमि संरक्षण,  विपणन एवं कृषि विदेश व्यापार मंडी परिषद , कृषि शिक्षा, अनुसंधान और समन्वय, उद्यान, खाद्य प्रसंस्करण , रेशम विकास, चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास, सहकारिता, लघु सिंचाई, भूगर्भ जल, परती भूमि विकास, मत्स्य, दुग्ध विकास तथा पशुधन आदि को शामिल किया जा सकता है। वित्त, राजस्व,परिवहन, सहित कई विभागों पर भी विचार संभव है। इसके पहले भी योगी आदित्यनाथ ने इस विषय पर विचार हेतु संजय अग्रवाल की अध्यक्षता समिति का गठन किया था। उंसकी रिपोर्ट में विभागों की संख्या पंचानवे से  घटाकर सत्तावन करने और इकतीस विभागों को यथावत रखने , विलय के बाद चौबीस नए विभाग सृजित करने और स्वास्थ,शिक्षा, राजस्व के तीन नए आयुक्त पद सृजित करने का  सुझाव दिया था। ये  समाज कल्याण आयुक्त, कृषि उत्पादन आयुक्त और अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त के अलावा होंगे।
जाहिर है कि मुख्यसचिव की अध्यक्षता वाली समिति को विचार का एक आधार मिला है। इससे उनका काम आसान होगा। इसी के साथ उनको व्यवहारिक सुझाव देने होंगे। केंद्र और राज्यों के विषय संविधान के अनुसार अलग है। ऐसे में पुनर्गठन का स्वरूप अलग हो सकता है। लेकिन इसमें संदेह नहीं कि विभागों का पुनर्गठन अपरिहार्य है।
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