कोरोना का कोप रोकने के लिए देश भर में चिकित्सक व उनके सहायक तथा प्रशासनिक मशीनरी पूरी मुस्तैदी के साथ काम में जुटी हुई हैं जिसका असर भी सामने आ रहा है लेकिन बाहर से आने वालों में कुछ लोगों में इसके लक्षण मिलते जाने से दूसरी ओर इसके मामले निरन्तर बढ़ भी रहे हैं। मामले इसलिए भी बढ़ रहे हैं क्योंकि दिन बीतने के साथ कई लोगों में व्यग्रता बढ़ती जा रही है और सामाजिक दूरी को उन्होंने बीते दिनों की बात मान लिया है।
कुछ दुकानों तथा सड़कों पर बढ़ती भीड़ का एक दूसरे के साथ खड़े होने की प्रवृत्ति से यह बात सामने आ रही है। यह परिदृश्य वास्तव में पीछे ले जाने वाला ही है जो अभी तक की तमाम उपलब्धियों पर पानी फेरने का काम कर सकता है। यह बात सभी को समझनी होगी कि कोरोना जिस प्रकृति की बीमारी अपने साथ लाया है, उससे मुक्ति के लिए फिलहाल कोई सटीक इलाज नहीं है तथा उससे बचाव के रास्तों को अपनाना ही सबसे बड़ी समझदारी है।
कई लोगों के ऐसे मामले भी सामने आए हैं जिनमें वे अपना परीक्षण कराने तक के लिए चिकित्सक के पास नहीं जाना चाहते तो कुछ लोग क्वारंटाइन किए जाने पर अस्पताल के कक्ष से निकल भागते हैं। ऐसा करके ये लोग किसी और का नहीं बल्कि अपना ही नुकसान करते हैं। जब एक निश्चित प्रक्रिया बना दी गई है और केवल वही इस संकट में काम कर सकती है तो उसकी उपेक्षा किया जाना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं हो सकता।
जरूरत यही है कि उसका हर सम्भव तरीके से पालन किया जाय। आखिर ऐसा करने वाले लोगों को फायदा तो हो ही रहा है। उम्मीद की जानी चाहिए कि जहां एक ओर लॉकडाउन की राहतें बढ़ सकती हैं तो वहीं एहतियात बरतने में कोई उपेक्षा नहीं होगी।







