देश में कोहरे का कहर बढ़ने के साथ ही सर्दी अपने अगले दौर में प्रवेश कर गई है। पारा 5.5 पर आकर लोगों को गलन भरी सर्दी का अहसास करा रहा है, जाहिर है कि पारा अभी और गिरेगा। वैसे भी देश के पहाड़ी इलाकों में बर्फ गिरने के बाद शहरी इलाकों में गलन तेजी से बढ़ी है। आधा दिसंबर बीत चुका है ठंड का असर और अधिक बढ़ने वाला है। इस लिहाज से भी आने वाले दिन सभी के लिए मुश्किल इम्तहान के दिन साबित होने वाले हैं। ऐसे में यह जरूरी हो जाता है कि ठंड से बचाव के समुचित इंतजाम किए जाएं।

ठंड में कोहरे का प्रकोप जहां एक ओर सर्दी बढ़ाता है, वहीं तमाम अन्य तरह की समस्याएं भी पैदा करता है। सबसे बड़ी बात यह कि ट्रेनों और हवाई जहाज की रफ्तार इससे बुरी तरह प्रभावित होती है। इसके अलावा आम जन जीवन भी बुरी तरह प्रभावित होता है। जहां तक सर्दी की बात है तो उसमें इसके कारण और भी इजाफा होता है। ऐसे में समाज के वंचित तबकों तथा पशुओं और पक्षियों के लिए जीवन गुजारना मुश्किल हो जाता है। इस बीच धरने पर बैठे किसानों को सर्दी से और मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। इस बीच वह कई अपनों का साथ गवां चुके हैं।
फिलहाल सरकारी और गैर सरकारी स्तरों पर उनकी मुश्किलें सुधारने के लिए कई प्रयास किए जाते हैं। तमाम क्षेत्रों में अलाव जलाने की व्यवस्थाएं होती हैं तो कई जगहों पर रैन बसेरों के इंतजाम किए जाते हैं। इससे मजदूरों, रिक्शाचालकों सहित तमाम गरीब तबके के लोगों को राहत मिलती है लेकिन इस व्यवस्था को और बढ़ाने की जरूरत है क्योंकि बड़ी तादाद में ऐसे जरूरतमंदों तक ये सुविधाएं देने की जरूरत बनी रहती है। ऐसे लोग जहां-तहां ठंड से बचने को कोशिशें करते रहते हैं। घरों में भी खासतौर पर बच्चों और बुजुर्गों का खास ख्याल रखे जाने की जरूरत है। अस्पतालों में पर्याप्त इंतजाम भी किए जाने की जरूरत है ताकि वहां पहुंचने वाले ठंड से बीमारों की समुचित चिकित्सा की जा सके।







