डॉ दिलीप अग्निहोत्री
आतंकी हमले और आतंकी ठिकानों पर एयर स्ट्राइक पर नकारात्मक सियासत भारत में ही संभव है। यहां अनेक नेता लगातार पाकिस्तान और आतंकी संगठनों के प्रति हमदर्दी के बयान दे रहे है। ऊपर से तुक्का यह के सरकार इस मामले का चुनावी फायदा उठाना चाहती है। लेकिन इस विषय को चुनाव तक चलाने का कार्य तो विपक्ष के नेता ही कर रहे है। कुछ अंतराल पर इनके बयान आने का सिलसिला बन गया है।ऐसे नेताओं को अपनी सेना पर विश्वास नहीं है, इन्हें आतंकी संगठन जैश मोहम्मद के आतंकी हमला करने पर यकीन नहीं है, इन्हें एयर स्ट्राइक पर भरोसा नहीं है, अमेरिका ब्रिटेन और फ्रांस द्वारा सुरक्षा परिषद में जैश सरगना के खिलाफ लाये गए प्रस्ताव को ये समझने को तैयार नहीं है, यह प्रस्ताव जैश द्वारा पुलवामा हमले के विरोध में लाया गया था, विश्व इस्लामिक देशों का सम्मेलन भी इनकी वोटबैंक सियासत में फिट नहीं बैठता, जिसमें पुलवामा आतंकी हमले पर अपना पक्ष रखने के लिए भारत को विशेष रूप में बुलाया गया, पहली बार भारत इसमें शामिल हुए। भारत के लिए पाकिस्तान को भी नजरअंदाज किया गया। इसके बाबजूद कांग्रेस, आप, राजद और सपा नेताओं को सबूत चाहिए।
एयर मार्शल बीएस धनोआ ने स्पष्ट किया है कि भारतीय वायु सेना की यह कार्रवाई ऑपरेशन का अंत नहीं है। उनका यह बयान बेहद छोटा जरूर है मगर इसका बड़ा संदेश साफ है कि आतंकवाद पर पाक की घेरेबंदी के लिए बालाकोट के बाद अगली बड़ी कार्रवाई का रास्ता बंद नहीं किया गया है।
उन्होंने कहा कि बमबारी के मिशन में सिर्फ यही देखा जाता है कि कितने टारगेट थे और उनमें से कितनों को निशाना बनाया जा सका। वायु सेना ने टारगेट को हिट किया था। बम निशाने पर गिरे थे। कितनी मौतें हुई, यह हम नहीं बता सकते। मारे गए लोगों की गिनती करना वायु सेना का काम नहीं है। मरने वालों की संख्या लक्षित ठिकानों में मौजूद लोगों की संख्या पर निर्भर करती है, जिसका जवाब सरकार देगी।
बम जंगल में बम गिराते तो पाक क्यों बौखलाता। यदि जंगल में बम गिराए गए होते तो फिर पाकिस्तान जवाब क्यों देता। नेशनल टेक्निकल रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन ने बालाकोट पर सर्जिकल स्ट्राइक के दिन तीन सौ एक्टिव मोबाइल कनेक्शन की पुष्टि की है। इसका मतलब है कि वहां जैश के कैंप में तीन सौ से अधिक आतंकी थे। इस बात की पुष्टि इलेक्ट्रॉनिक तरंगो से मिले सबूतों के जरिए हो रही है। हमले के समय नैशनल टेक्निकल रिसर्च ऑर्गनाइजेशन ने सर्विलांस शुरू कर दिया था।
कांग्रेस के सैम त्रिपोदा और सपा के रामगोपाल यादव बहुत दिनों के बाद चर्चा में आये है। लेकिन यह नामदारी नकारात्मक थी, दोनों ने ऐसा बयान दिया, जिसका खमियाजा इनकी अपनी ही पार्टी को हुआ है। इसके पहले सैम तब चर्चा में आये थे जब एक विधानसभा चुनाव में उनकी जाति को मंच से सार्वजनिक किया था। राम गोपाल यादव पिछली बार तब चर्चा में आये थे, जब उनकी सलाह पर लुखनऊ के जनेश्वर मिश्र पार्क में सपा का आपात अधिवेशन बुलाया गया था। इसमें चंद मिनट में सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव को राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से बर्खास्त कर दिया गया था, उनकी जगह पर अखिलेश यादव को कमान सौंपी गई थी। तब रामगोपाल को चाणक्य बताया गया था। कहा गया था कि सपा को अब दुबारा सत्ता में आने से कोई रोक नहीं सकेगा। परिणाम आया तो असलियत सामने आ गई।
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव परिणाम आने के बाद से ही वह उपेक्षित चल रहे थे। उसके बाद पहली बार राम गोपाल ने इतना बड़ा बयान दागा है। इस महीने के प्रारंभ में राहुल गांधी ने भी कहा था कि सर्जिकल स्ट्राइक पर उठ रहे सवालों का जबाब मिलना चाहिए। अमित शाह ने सही पूंछा की सवाल उठा कौन रहा है। सवाल देश की आमजनता नहीं बल्कि कांग्रेस के नेता ही उठा रहे है। बाद में राहुल कहते है कि इनका जबाब मिलना चाहिए। यही कारण है कि वह सैम पित्रोदा के बयान पर सफाई देने से बच रहे हैं। पित्रोदा का कहना था कि आठ लोगों के कारण पूरे पाकिस्तान को दोषी मानना गलत है। मुम्बई हमले के बाद यूपीए सरकार सर्जिकल स्ट्राइक कर सकती थी, लेकिन उसने कुछ आतंकियों की हरकत के लिए पूरे पाकिस्तान को दोषी नहीं माना, इसलिए कार्यवाई नहीं की। पाकिस्तान को हम सजा नहीं दे सकते। उसने आगे कहा कि क्या सर्जिकल स्ट्राइक को लेकर और सबूत देंगे, और साबित करेंगे।
बिडंबना देखिये सैम पित्रोदा भी अपने को गांधीवादी मानते है। यह ऐलान उन्होंने खुद किया है। यही स्थिति सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की है। राम गोपाल यादव के बयान पर अखिलेश की प्रतिक्रिया राहुल गांधी की तर्ज पर आधारित है। उन्होंने इसे समय प्रश्न ही माना है। वह कहते है कि प्रजातंत्र में सवाल उठना लाजमी है। सरकार प्रश्न पूंछने से रोकना चाहती है। जबकि सरकार ने किसी को प्रश्न पूंछने से कभी न तो रोका है, न वह रोक सकती है। विपक्षी नेता मनमाने प्रश्न पूंछ भी रहे है। लेकिन यदि कोई प्रश्न आतंकियों और पाकिस्तान का मनोबल बढ़ाने वाला हो, जिससे अपने सैनिकों का अपमान होता हो, ऐसे प्रश्न से विपक्षी नेताओं को स्वयं बचना चाहिए। राम गोपाल यादव ने कहा था कि पुलवामा आतंकी हमले में वोटों की राजनीति के लिए देश के जवानों की बलि चढ़ा दी गई। पैरामिलिट्री फोर्सेज दुखी हैं सरकार से क्योंकि जवान मार दिए गए वोट के लिए। उन्होंने कहा कि जिस समय पुलवामा हमला हुआ उस समय जम्मू-श्रीनगर के बीच में चैकिंग नहीं थी। जवानों को साधारण बसों में भेज दिया गया। राम गोपाल यादव ने पुलवामा हमले को साजिश करार दिया, अभी नहीं कहना चाहता, लेकिन जब सरकार बदलेगी इसकी जांच होगी तब बड़े-बड़े लोग फंसेंगे।
राम गोपाल ने अपनी सरकार पर पुलवामा हमले का आरोप लगया है। इसका मतलब है कि वह पाकिस्तान को निर्दोष मानते है, उनकी नजर में जैश मोहम्मद झूठ बोल रहा है, राम गोपाल सत्यवादी है।
इस बयान से यह भी अनुमान लगाया जा सकता है कि सपा महासचिव केंद्र में किस तरह की सरकार चाहते है। ऐसी सरकार जो पाकिस्तान के खिलाफ मुलायम रहेगी, आतंकी हमलों पर अपने ही लोगों के खिलाफ जांच कराएगी।
सैम पित्रोदा ने कहा था-अगर सरकार कहती हैं कि तीन सौ लोग मारे गए तो इसके बारे में सबूत दें। यह केवल मैं नहीं बल्कि पूरा देश जानना चाहता है। मैंने न्यूयॉर्क टाइम्स समेत कई अखबारों में रिपोर्ट्स पढ़ीं कि भारत के हमले में कोई नहीं मारा गया। मैं जानना चाहता हूं कि क्या वाकई में कोई हमला हुआ था। क्या सही में तीन सौ लोग मारे गए। एक नागरिक होने के नाते मुझे यह जानने का हक है। पित्रोदा के बयान पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि विपक्ष लगातार हमारी फौजों का अपमान कर रहा है। देश उन्हें माफ नहीं करेगा।
कैसी बिडंबना है कि सैम पित्रोदा को अपने नाम की तरह चंद विदेशी अखबारों पर तो विश्वास है, लेकिन अपने जवानों,अपने वायु सेना प्रमुख पर विश्वास नहीं है।
अमित शाह ने सैम पित्रोदा को आड़े हांथों लिया है। कहा कि कांग्रेस शहीदों के खून पर राजनीति करती है। पित्रोदा के बयान पर उसे देश से माफी मांगनी चाहिए। चुनाव आते ही कांग्रेस वोट बैंक की राजनीति करती है। जब देश की जनता आतंकवाद से हताहत होती है तो क्या हम बातचीत करें, क्या कांग्रेस अध्यक्ष इससे सहमत हैं। कांग्रेस हर बार चुनाव आते ही तुष्टिकरण और वोट बैंक की राजनीति करती है। यह उनकी परंपरा है। कई सालों से कांग्रेस ने इसका बीज बोया है। क्या वोट बैंक की राजनीति शहीदों से ऊपर हो सकती है। कांग्रेस नेता के इस बयान से शहीदों का अपमान हुआ। सुरक्षा पर सवाल खड़ा हुआ और आतंकियों का मनोबल बढ़ा है। कांग्रेस के नेता भारतीय वायुसेना की क्षमताओं पर संदेह करते हैं। क्या कांग्रेस अध्यक्ष इस पर जवाब देंगे। सर्जिकल स्ट्राइक के वक्त कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा था कि आप खून की दलाली करते हो। अब एयर स्ट्राइक पर सवाल उठाते हो, आखिर किसकी मदद करना चाहते हो। जेएनयू में देशविरोधी नारेबाजी पर उनके साथ खड़े हो जाते हो।
एयर स्ट्राइक की गूंज पूरी दुनिया में थी। अमेरिका सहित सभी विकसित देशों ने इसकी पुष्टि सेटलाइट के माध्यम से की,इससे प्रमाणित हुआ कि भारत की सर्जिकल स्ट्राइक ने बालकोट में बड़ी तबाही की है। पाकिस्तान में भी हड़कम्म मचा था। शीर्ष कमांडरों की लगातार बैठक चल रही थी। प्रधानमंत्री इमरान पर भारी दबाब पड़ रहा था। यही कारण था कि पाकिस्तान ने भारत पर हमले के लिए एफ सोलह लड़ाकू विमान भेजा था। पाकिस्तान के कई आतंकी सरगना भी हमले का रोना रो रहे थे। इसके बाबजूद कुछ भारतीय नेताओं को सबूत चाहिए। इस देश को शर्मशार करने वाली सियासत है।







