कोरोना संकट ने परेशानी बढ़ाई है, लेकिन इसी के साथ अवसर भी प्रदान किया है। भारत अपनी संकल्प शक्ति से आगे बढ़ेगा। कोरोना संकट से मुक्त होगा। प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भरता को गति देने के लिए आर्थिक पैकेज की घोषणा की। बीस लाख करोड़ रुपये का यह पैकेज भारत को मजबूत बनाएगा। आत्मनिर्भरता भारतीय कार्य व्यवस्था का प्रमुख लक्ष्य रहा है। विभिन्न क्षेत्रों में गतिविधियों को इसी उद्देश्य से संचालित किया जाता रहा कि उनके लिये देश को किसी और निर्भर न रहना पड़े।
लॉकडाउन जैसी बड़ी समस्या के बाद भी देश इसी दृष्टिकोण को आगे रखकर चल रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बीस लाख करोड़ रुपए के राहत पैकेज की जानकारी देते समय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी इस तथ्य को रेखांकित किया है। बड़ी बात यह है कि आत्मनिर्भर भारत का जो खाका पीएम ने खींचा था, सरकार उसकी रीढ़ लघु उद्योगों को बनाएगी। य भी अपने आप में अहम है।

केंद्र ने एमएसएमई को भारतीय अर्थव्यवस्था में बड़ी भूमिका निभाने के लिहाज से मजबूत करने के लिए न सिर्फ बिना गारंटी कर्ज का ऐलान किया बल्कि उसने माल की बिक्री के भी व्यापक प्रबंध किए हैं। इस बारे में बारीकियों को स्पष्ट करते हुए वित्त मंत्री ने कहा है कि सरकार छोटे कारोबारियों को तीन लाख करोड़ रुपए का बिना गारंटी कर्ज देने की व्यवस्था करेगी। इस कर्ज की अवधि चार साल रहेगी और कर्ज मूलधन वाले हिस्से को चुकाने के लिए एक साल की छूट देने की व्यवस्था भी की जाएगी।
सरकार का कहना है कि इससे देश की 45 लाख सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों की इकाइयों को फायदा होगा। जाहिर है कि ऐसी पृष्ठभूमि की व्यवस्थाओं के साथ इतनी बड़ी संख्या में लक्षित इकाइयों की मदद देश को मजबूती का एक व्यापक आधार देगी। दूसरी बड़ी बात यह है कि कारोबार में निवेश और टर्नओवर के तहत मिलने वाले फायदे का दायरा भी बढ़ाया गया है। ज्यादा निवेश आने की स्थिति में भी कारोबारियों को मिलने वाली सुविधा में कोई कमी नहीं आएगी।
पहले जैसे ही कंपनियों का टर्नओवर या फिर उनमें आने वाला निवेश बढ़ जाता था तो कंपनियां बड़ी मान ली जाती थीं और एमएसएमई के दायरे से बाहर चली जाती थीं। इसके अलवा सरकार घरेलू छोटे उद्योग में बनने वाले माल को प्राथमिकता देगी और सरकारी खरीद के लिए दो सौ करोड़ से कम के ग्लोबल टेंडर मंजूर नहीं होंगे।







