सामाजिक न्याय पर भाजपा की बढ़त

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डॉ दिलीप अग्निहोत्री
भारत छोड़ो आंदोलन वर्षगांठ की पूर्वसंध्या राजनीतिक दृष्टि से सरगर्म रही। खासतौर पर दोनों राष्ट्रीय पार्टी कांग्रेस और भाजपा आमने सामने रही।  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भाजपा संसदीय पार्टी की बैठक को संशोधित किया। राहुल ने अपनी पार्टी की संसदीय पार्टी और तालकटोरा में महिला सम्मेलन को संबोधित किया। नरेंद्र मोदी ने नई सामाजिक अगस्त क्रांति पर  आवाज बुलंद की। इस संदर्भ में उन्होंने पिछड़ा वर्ग आयोग और अनुसूचित जाति जनजाति एक्ट विधेयक पारित होने का उल्लेख किया। दूसरी ओर राहुल गांधी ने अपनी चिपरिचित शैली में नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ पर हमला किया। वह यहीं तक नहीं रुके। मुज्जफरपुर और देवरिया प्रकरण को लेकर वह तीन हजार वर्ष पहले चले गए। अभी तक वह नरेंद्र मोदी के कार्यकाल तक सीमित रहते थे।
कार्यकाल बढ़ता था, तो वह भी अपनी गिनती बढा लेते थे। लेकिन वह चार वर्ष की तुलना तीन हजार साल से कर देंगे, इसकी कल्पना किसी को नहीं थी। वैसे इन दोनों घटनाओं की जांच  सीबीआई को सौप दी है।
 अनुसूचित जातियां और अनुसूचित जनजातियां अत्याचार निवारण संशोधन विधेयक दो हजार अठारह संसद में मंजूर हो गया। राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा देने से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक को भी संसद की मंजूरी मिल गयी। राज्यसभा ने इससे संबंधित एक सौ तेइसवां संविधान संशोधन विधेयक  पारित कर दिया था। लोकसभा इसे पहले ही पारित कर चुकी थी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि अनुसूचित जाति, जनजाति एवं समाज के वंचित वर्गों के समग्र विकास की जरूरत है। उनकी सरकार इस दिशा में काम कर रही है। इन कार्यों में इन वर्गों का सामाजिक, शैक्षणिक, आर्थिक, राजनीतिक और बौद्धिक सशक्तिकरण शामिल है। प्रधानमंत्री ने पार्टी नेताओं और सांसदों से सरकार के इन कार्यों को जनता के समक्ष मजबूती से रखने को कहा।
भाजपा देशभर में पन्द्रह से तीस अगस्त तक सामाजिक न्याय पखवाड़ा और अगले वर्ष एक से नौ अगस्त तक सामाजिक न्याय सप्ताह मनाया जाएगा। जो राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा देने के विधेयक को संसद की मंजूरी और दलितों पर अत्याचार के खिलाफ कानून को मजबूत बनाने की पहल के तौर पर मनाया जाएगा।
संसद के वर्तमान मानसून सत्र को सामाजिक न्याय सत्र के रूप में जाना जाएगा। महात्मा गांधी ने नौ अगस्त को  भारत छोड़ो आंदोलन शुरू किया था। सन्योग यह है कि  संसद द्वारा इस महीने पारित होने वाले विधेयकों के ऐतिहासिक महत्व को उजागर किया गया। प्रधानमंत्री ने भाजपा की जीत के बाद दिये गए भाषण को याद किया जिसमें उन्होंने कहा था कि उनकी सरकार गांव, गरीब और पिछड़े वर्गो को समर्पित होगी और ये विधेयक इसी भावना के अनुरूप है।
भाजपा संसदीय पार्टी की बैठक में प्रधानमंत्री ने कहा कि कई दशकों से समाज के वंचित वर्गों को इसका इंतजार था। संसद ने राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा प्रदान करने संबंधी विधेयक पारित किया है। जो देश भर में  पिछड़ा वर्ग समुदाय को मजबूत बनाएगा। अनुसूचित जाति जनजाति संशोधन विधेयक लोकसभा में पारित होना भी महत्वपूर्ण कदम है।
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी महिला अधिकार सम्मेलन भी प्रधानमंत्री और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ पर निशाना लगते रहे। उन्होंने कहा कि आरएसएस में एक भी महिला नहीं है, क्योंकि उस संगठन के दरवाजे महिलाओं के लिए बंद हैं। देवरिया की घटना पर कहा कि बीजेपी के विधायकों से बेटियां बचानी हैं। जो मोदी सरकार ने चार साल में महिलाओं के खिलाफ किया, वह  इस देश में तीन हजार साल में भी नहीं हुआ। इसके बाद राहुल ट्रेन पर आ गए। कहा कि चार साल के कार्यकाल में भारत एक ऐसी रेलगाड़ी नजर आता है जिसे एक निरंकुश, अक्षम और अहंकारी चालक विध्वंस के रास्ते पर ले जा रहा है। ऐसी जादुई ट्रेन के झांसे में नहीं आएगी जो दुर्घटना की तरफ बढ़ रही है। यह अगस्त क्रांति वर्षगांठ की पूर्व संध्या पर राहुल का भाषण था। ऐसी बातों से वह नरेंद्र मोदी की बराबरी करना चाहते है।संघ को महिला विरोधी कहना भी नासमझी है। उंसकी शाखाएं अखाड़ा पद्धति की प्राचीन परंपरा पर आधारित है। इसमें महिलाओं का न जाना उचित है। देवरिया की घटना पर भी मुख्यमंत्री ने जबाब दिया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देवरिया शेल्टर होम केस की जांच सीबीआई को सौंप दी हैं।  एडीजी क्राइम के अंडर एक एसआईटी भी बनाई जा रही है। उनकी अगुवाई में बनी टीम पुलिस की भूमिका की जांच करेगी।
योगी ने कहा, जिलाधिकारी की लापरवाही की वजह से ही यह घटना हुई, उन्हें चार्जशीट किया जा रहा है। बाल कल्याण समिति की भी जिम्मेदारी होती है और उन्होंने अपने कार्यवाही सही से नहीं की। इसीलिए इस समिति को भी निलंबित किया जा रहा है।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पिछली सरकार के समय  सीबीआई ने  यहां वित्तीय अनियमितता की रिपोर्ट दी थी।  योगी सरकार ने इसे बंद करने का आदेश दिया था। जिला प्रशासन ने समय पर कार्य नहीं किया। इसलिए डीएम को ट्रांसफर कर दिया गया।  कानून व्यवस्था को दुरुस्त रखना राज्य सरकारों का दायित्व है। निचले स्तर तक अधिकारियों में शासन की हनक रहनी चाहिए। महिलाओं, बच्चियों की सुरक्षा पर विशेष चौकसी होनी चाहिए। बिहार और उत्तर प्रदेश की सरकारों ने कार्रवाई की है। इस पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। विपक्षी पार्टियों ने इसे मुद्दा बनाने का प्रयास किया। लेकिन देवरिया में तो पिछली दोनों सरकारों की लापरवाही सामने आई है। वैसे विपक्षी पार्टियों को चिंता सामाजिक न्याय पर भाजपा की बढ़त को लेकर है।

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