डॉ दिलीप अग्निहोत्री
आनन्दी बेन पटेल आमजन से संवाद के कारण गुजरात में लोकप्रिय रही है। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल बनने के बाद भी उन्होंने अपनी इस कार्यशैली में बदलाव नहीं किया। आमजन के लिए राजभवन के द्वार खुले रखने का निर्णय उन्होंने पदभार ग्रहण करने के साथ ही लिया था। इसके अलावा वह निर्धन व वंचित वर्ग के लिए संचालित स्कूलों में भी गई थी। बच्चों के लिए यह अभूतपूर्व अनुभव था।बच्चों को दूसरी सौगात आनन्दी बेन के एक अन्य निर्णय से मिली। उन्होंने स्कूल के बच्चों के लिए राजभवन के द्वार अलग से खोलने का निर्णय लिया। लखनऊ में रहने वाले या यहां बाहर से आने वाले बच्चे अक्सर राजभवन के सामने से निकलते थे। उनके मन में इस भव्य, विशाल और ऐतिहासिक इमारत को देखने की जिज्ञाषा रहती होगी। लेकिन वह जानते थे कि इसे भीतर से देखना उनके लिए संभव नहीं है। बालमन की जिज्ञाषा उदास हो जाती थी।

लेकिन आनन्दी बेन पटेल ने बच्चों की भावना का अनुमान लगाया होगा। इसी लिए उन्होंने बच्चों के लिए अलग से दिन व समय का निर्धारण कर दिया। पहली बार राजभवन के भीतर आना इन बच्चों के लिए अद्भुत था।

यहां तक कि उन्हें राज्यपाल के राज्यपाल के कार्यालय तक जाने का अवसर मिला। वहां उन्हें बताया गया कि राज्यपाल यहां बैठ कर अपने कार्यो का निर्वाह करती है। यहां अनेक खूबसूरत लाॅन है। यहां भी बच्चे घूमे। राजभवन भ्रमण पर आने वाले विद्यार्थियों ने प्रसन्नता व्यक्त की।, शिक्षिकाओं ने राज्यपाल को धन्यवाद ज्ञापित किया, जिन्होंने छात्र-छात्राओं के लिये राजभवन घूमने का अवसर दिया। उन्होंने कहा कि हम लोगों ने राजभवन के मुख्य परिसर को सिर्फ बाहर से देखा था, कभी अन्दर आने का अवसर नही मिला था। हमारे विद्यार्थी यहाँ आयेंगे तो बड़े सपने देखेंगे, जो भविष्य में उन्हे कुछ बड़ा करने की प्रेरणा देगा।
श्री सत्य सांई बाबा पूर्व माध्यमिक एवं प्राथमिक विद्यालय, लखनऊ के विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने आज राजभवन का भ्रमण किया। विद्यार्थियों ने राजभवन के लाॅन, इमारत, गाॅधी सभागार, राज्यपाल का कार्यालय, विशिष्ट आगन्तुक कक्ष, जन कक्ष, अन्नपूर्णा हाॅल, उद्यान, गांधी दीर्घा, स्वामी विवेकानन्द की मूर्ति व गौशाला देखी। उल्लेखनीय है कि राज्यपाल श्रीमती आनंनदीबेन पटेल ने आम लोगों के लिये मंगलवार एवं बृहस्पतिवार को अपरान्ह चार से छह बजे के बीच राजभवन खोलने के निर्देश दिये थे। उन्होंने यह भी निर्देश दिये कि सभी विद्यालय पूर्व सूचना देकर अपने छात्र-छात्राओं के साथ सोमवार से शनिवार को राजभवन देखने आ सकते है।
ज्ञात हो कि इस राजभवन नाम पहले कोठी हयात बक्श था। इस इमारत की डिजाइन ब्रिटिश काल में मेजर जनरल क्लॉड मार्टिन ने बनाई थी। सत्रह सौ अठानवे में नवाब असफ़ उद दौला के निधन के बाद ईस्ट इण्डिया कम्पनी ने सदात अली खान को नया शासक नियुक्त किया गया। नए शासक को क्लॉड मार्टिन द्वारा निर्मित भवन पसन्द था। इमारत निर्माण का काम क्लॉड मार्टिन की निगरानी में हुआ। क्लॉड मार्टिन ने इसे अपना आवास बनाया। तब इसका उपयोग उसने अपने सुरक्षा गार्डों और शस्त्रागार की सुरक्षा के लिए किया। स्वतन्त्रता से पूर्व कोठी हयात बक्श को आगरा और अवध का संयुक्त प्रान्त के राज्यपाल का सरकारी आवास घोषित किया गया। स्वतन्त्रता के पश्चात इसका नामकरण राजभवन किया गया।







