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    Home»ब्लॉग»Current Issues

    कर्नाटक में कारगर हुआ कामदार

    By May 5, 2018 Current Issues No Comments5 Mins Read
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    डॉ दिलीप अग्निहोत्री
    कर्नाटक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कामदार शब्द कारगर साबित हुआ। धर्म विभाजन के सहारे चुनाव में उतरी कांग्रेस को इससे कांटा लगा है। क्योंकि कामदार शब्द ने विकास को प्रमुख मुद्दा बना दिया है। कांग्रेस अपने को इसमें घिरा महसूस कर रही है। उसकी सरकार के लिए यह संभव होता तो चलते चलते विभाजन के मुद्दे न उठाती। यह उसकी कमजोरी का प्रमाण है। मोदी ने इसे पहचाना । इसीलिए  राहुल गांधी से कहा कि कर्नाटक सरकार की उपलब्धियों पर पन्द्रह मिनट बोल दें । कांग्रेस इस स्थिति को स्वीकार करने का साहस नहीं दिखा सकी है।
    कर्नाटक  विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने अलग ध्वज,अलग धर्म जैसे मुद्दों को हवा दी थी। इसका मतलब था कि वह विकास और उपलब्धियों के मुद्दे से बचना चाहती थी। यह मुख्यमंत्री सिद्धरमैया की रणनीति थी। कांग्रेस हाईकमान को भी यह पसन्द आई। क्योकि मसला र कांग्रेस की राज्य सरकार ही नही हाईकमान के लिए भी दुखती रग की तरह है। दस वर्ष की यूपीए सरकार चलाने के बाद भी वह उस आधार पर जनता का विश्वास  जितने की स्थिति में नहीं है।
    लेकिन कामदार और नामदार शब्दों के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेसी रणनीति की हवा निकाल दी है।
    कामदार शब्द के माध्यम से उन्होंने विकास को मुद्दा बना दिया है। यह कांग्रेस पर भारी पड़ रहा है । क्योंकि इसके तहत नरेंद्र मोदी विकास की बात कर रहे है। कांग्रेस इसी में पिछड़ रही है।
    कर्नाटक विधानसभा चुनाव दिलचस्प मोड़ पर है। मुख्य मुकाबला कांग्रेस और भाजपा के बीच है। तीसरी शक्ति के रूप में जनता दल सेक्युलर भी मैदान में है। ऐसा लग रहा है कि इस पार्टी के प्रमुख पूर्व प्रधानमंत्री देवगौड़ा का झुकाव भाजपा की तरफ है। वह भी कांग्रेस की सरकार को हटाने के लिये कमर कस चुके है।
    यहां पिछले पांच वर्ष से कांग्रेस पूर्ण बहुमत से सरकार चला रही है। इस रूप में उसकी जबाबदेही थी। उसे मतदाताओं के सामने अपना रिपोर्ट कार्ड या उपलब्धियों का ब्यौरा रखना चाहिए था। लेकिन मुख्यमंत्री सिद्धरमैया इससे बचते रहे है। विकास और उपलब्धियों पर उनके पास ज्यादा कुछ कहने को नहीं है। इसलिए चुनाव से पहले ही उन्होंने विवादित मुद्दे उठाने शुरू कर दिए थे। उन्होंने टीपू सुल्तान को अत्यधिक महिमा मंडित करने का अभियान चलाया। फिर कर्नाटक के लिए अलग ध्वज का मुद्दा उठाया। चुनाव के तीन महीने पहले उन्होंने लिंगायत समुदाय को अलग धर्म का दर्जा दे दिया।
    जाहिर है कि पांच वर्ष तक सरकार चलाने के बाद उनके पास अलग ध्वज ,अलग धर्म के अलावा कोई सकारात्मक मुद्दा नही था। ये मुद्दे भी प्रचार के लिए थे। क्योंकि किसी भी राज्य सरकार इन विषयों पर निर्णय लेने का अधिकार ही नहीं है। जाहिर है कि यह सब मुख्य मुद्दों से  ध्यान हटाने के लिए किया जा रहा था। लेकिन नरेंद मोदी ने स्थिति बदल दी है। भाजपा की फोकस कामदार पर हो गई है। नरेंद्र मोदी, अमित शाह और योगी आदित्यनाथ के प्रचार में उतरना भी भाजपा के लिए बहुत लाभप्रद साबित हो रहा है। क्योंकि ये तीनों लोग कामदार का ही प्रतिनिधित्त्व करते है। नामदार और कामदार का उल्लेख नरेंद्र मोदी ने राहुल गांधी की टिप्पणी के जबाब में किया था।
    राहुल ने कहा था कि संसद में  नरेंद्र मोदी उनका मुकाबला नहीं कर सकते। वह पन्द्रह मिनट बोले तो मोदी वहां टिक नहीं पाएंगे। इसी पर मोदी ने जबाब दिया था।
    उन्होंने राहुल की बात का अपने अंदाज में समर्थन किया। कहा कि राहुल ठीक कह रहे है। मैं उनके सामने कैसे टिक सकता हूं, बैठ सकता हूं, क्योकि वह नामदार है, और मैं कामदार हूं।
    ये दो शब्द भारतीय राजनीति की बड़ी सच्चाई उजागर करते है। राहल गांधी के साथ बड़ी विरासत का नाम है। इस नाम के कारण ही वह कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष है। दो दर्जन से ज्यादा चुनाव हारने के बाबजूद पार्टी में कोई उन्हें चुनौती नहीं दे सकता। उनके पिता, दादी, दादी के पिता प्रधानमंत्री थे। यह नामदार होने का जबरदस्त उदहारण है। नरेंद्र मोदी और उनके पिता चाय बेचते थे। संघर्ष और कार्य के बल पर वह आगे बढ़े। गुजरात के मुख्यमंत्री और देश के प्रधानमंत्री बने। यह कामदार होने का बड़ा उदाहरण है। इस उल्लेख के साथ ही मोदी ने अपनी उपलब्धियां भी कर्नाटक के लोगों को बताई। इसी के साथ कांग्रेस की अलग ध्वज, लग धर्म की राजनीति पटरी से उतर गई। मोदी ने कहा कि राहुल गांधी केवल पन्द्रह मिनट कर्नाटक सरकार की उपलब्धियों पर बोल दें। विश्वेशवरैया का पांच बार नाम लेना ,तब कर्नाटक की जनता तय कर लेगी की आपकी बात में कितना दम है। मोदी को यह बात इसलिये भी कहानी पड़ी की राहुल भारतरत्न विश्वेश्वरैया का नाम ठीक से बोल नहीं सके थे। विश्वेश्वरैया ने कावेरी नदी में कृष्णराज बांध का निर्माण कराया था। उनका जन्मदिन देश में अभियंता दिवस के रूप में मनाया जाता है।
    वस्तुतः नरेंद्र मोदी का जीवन कामदार की कसौटी पर खरा उतरता है। गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने विकास के बेजोड़ कार्य किये। प्रधानमंत्री के रूप में ऐसे अनेक कार्य किये, जो दशकों पहले ही हो जाने चाहिए थे। इन कार्यो की फेहरिस्त लंबी है। नरेंद्र मोदी की इन बातों का कर्नाटक में असर दिखाई देने लगा है। धर्म विभाजन जैसे मुद्दे पीछे छूट रहे है। लोग कांग्रेस सरकार ने उपलब्धियों का ब्यौरा मांग रहे है।

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