डॉ दिलीप अग्निहोत्री
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साबित किया कि उनके लिए राष्ट्रीय हित और सुरक्षा सर्वोच्च है। इसके लिए देश के भीतर कांग्रेस और बाहर अमेरिका का विरोध उनके लिए कोई मायने नहीं रखता। उन्होंने रूस के साथ रक्षा सौदे को अंजाम तक पहुंचाया। अमेरिका ने इस समझौते को रोकने के लिए पूरी ताकत लगा दी थी। कांग्रेस राफेल की तरह इस पर भी चोर-चोर चिल्ला सकती है। लेकिन मोदी अविचलित भाव से आगे बढ़ते रहते है। उनकी दृढ़ता से विदेश नीति के क्षेत्र में नया अध्याय जुड़ा।अमेरिका के लगातार विरोध को मोदी को दरकिनार किया। जिसके चलते रूस के साथ सामरिक समझौता संभव हो सका। शीतयुद्ध की बात अलग थी। उस समय भारत खुलकर सोवियत संघ के साथ था। उस दौर से तुलना नहीं कि जा सकती। शीतयुद्ध की समाप्ति के बाद विश्व के हालात पूरी तरह बदल गए थे। मनमोहन सिंह के समय विदेश नीति अमेरिका की तरफ झुकी थी। उसके साथ परमाणु करार ही तब एकमात्र ड्रीम प्रोजेक्ट था। इसका परिणाम यह हुआ कि रूस का झुकाव चीन और पाकिस्तान की तरफ होने लगा था।
नरेंद्र मोदी ने इस ओर ध्यान दिया। अमेरिका और रूस के साथ मित्रता में संतुलन बनाया। अमरीका से भी बेहतर रिश्ते बनाये, इसी के साथ रूस को भी दूर नहीं जाने दिया। लेकिन अपनी दृढ़ता बनाये रखी। प्रधानमंत्री बनने के साथ ही मोदी ने कहा था कि किसी देश के साथ आंख झुकाकर नहीं आँख मिलाकर बात की जाएगी। रूस के साथ यह समझौते से मोदी ने यह साबित कर दिया।
अमेरिका ने काउंटरिंग अमेरिकाज एडवर्सरीज थ्रू सेंक्शंस एक्ट के अन्तर्गत रूस से रक्षा खरीद को प्रतिबंधित कर दिया था। यह प्रतिबंधित रूस के क्रीमिया पर कब्जे और अमेरिकी चुनाव में रूसी हस्तक्षेप के मद्देनजर लगाया गया था। काटसा के तहत अमेरिका उन देशों के खिलाफ भी कार्रवाई करेगा जो रूस से रक्षा सामग्री या खुफिया सूचनाओं का लेन-देन करते हैं।
भारत ने रूस के साथ व्यापार, निवेश, नाभिकीय ऊर्जा, सौर ऊर्जा, अंतरिक्ष आदि क्षेत्रों पर भारत और रूस के सम्बन्धों का विस्तार होगा। इसके अलावा दोनों देशों के बीच रूबल रुपया डील, हाइ स्पीड रशियन ट्रेन, टैंक रिकवरी वीइकल, रोड बिल्डिंग इन इंडिया, ऑपरेशन ऑन रेलवे, सर्फेस रेलवे ऐंड मेट्रो रेल पर भी बात हुई। दोनों देशों ने आतंकवाद, अफगानिस्तान ऐंड इंडो पेसेफिक इवेंट, क्लाइमेट चेंज के साथ एससीओ, ब्रिक्स, जी ट्वेंटी और असियान जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई। एस फोर हंड्रेड का सर्वाधिक आधुनिक लंबी दूरी वाला एयर मिसाइल डिफेंस सिस्टम है।
यह दुश्मन के क्रूज, एयरक्राफ्ट और बलिस्टिक मिसाइलों को मार गिराने में सक्षम है। वायु सेना प्रमुख बीएस धनोआ ने एस फोर हंड्रेड को भारतीय वायुसेना के लिए एक बूस्टर शॉट बताया है। भारत को पड़ोसी देशों के खतरे से निपटने के लिए इसकी बहुत जरूरत थी, लेकिन पिछली सरकार इसके प्रति गंभीर नहीं थी। दोनों देशों के बीच स्पेस में द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने पर भी करार हुआ है। इस डील के तहत साइबेरिया में रूसी शहर के पास भारत निगरानी स्टेशन बनाएगा। भारत की ओर से दो हजार बाइस में चांद में मानव को भेजने के मिशन के ऐलान के बाद यह करार महत्वपूर्ण होगा।
जाहिर है कि यह समझौता केवल भारतीय वायु सेना को मजबूत नहीं बनाएगा, बल्कि इसने राष्ट्रीय स्वाभिमान को बढ़ाया है। अमेरिका से भारत के रिश्ते अच्छे है, लेकिन इसके लिए कोई शर्तें नहीं हो सकती। सुरक्षा के लिए भारत की सैन्य जरूरतों को पूरा करना अपरिहार्य है। इसके लिए भारत जो भी उचित समझेगा वह निर्णय करेगा। अमेरिका और रूस के बीच संबन्ध इसमें बाधक नहीं बन सकते। इसमें संदेह नहीं कि भारत की दृढ़ता से रूस के साथ सामरिक समझौता हो सका।







