डॉ दिलीप अग्निहोत्री
विश्व के अनेक देश सांस्कृतिक रूप में भारत के साथ जुड़े हुए है। इसकी जड़ें प्राचीन काल से चली आ रही है। इंडोनेशिया सहित अनेक देशों में आज भी रामलीला होती है, सिंगापुर सहित अनेक देशों में बौद्ध धर्म की प्रमुखता है। इन सबका विदेश नीति के अंतर्गत भी महत्व है। इस तथ्य को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भावनात्मक रूप से समझा है। इसके माध्यम से उन्होंने भारतीय हितों को आगे बढाने का प्रयास किया है। उनकी इंडोनेशिया, मलेशिया और सिंगापुर यात्रा में भी यही रंग दिखाई दिया। इसके आधार पर आर्थिक, व्यापारिक और सुरक्षा संबन्धी सहयोग में भी वृद्धि हुई।इंडोनेशिया में नरेंद्र मोदी ने जो पतंग उड़ाई उस पर हिन्दू देवी देवताओं के चित्र अंकित थे। यहां बात रामलीला की भी हुई। मोदी को बताया गया कि यहां वर्ष भर रामलीला होती है। यह लोगों की जिंदगी का अहम हिस्सा है। यहां की रामलीला माता सीता के लंका से आने, प्रभु राम से मिलने तक सीमित है। लोग गर्व से अपने को श्री राम का वंशज बताते है। उनका मजहब इस्लाम है, संस्कृति भारतीय है। अपने में यह विलक्षण उदाहरण है। लेकिन इस्लामिक आतंकवादी इस विरासत के दुश्मन बने है। मलेशिया के नाम से ही बहुत विरासत का अनुमान लगाया जा सकता है। यहां भी भारतीय संस्कृति की जड़े देखी जा सकती है। सिंगापुर में मोदी प्रसिद्ध श्री हनुमान मंदिर में गए। यहां का दृश्य ऐसा था ,जैसे यह भारत का ही अंग है। वह बुद्ध मंदिर भी गए, मस्जिद में भी गए। यह प्रेरणा भी भारतीय चिंतन की उदारता को रेखांकित करती है।

इस तरह उन्होंने भारत और सिंगापुर के लोगों के बीच लंबे समय से चले आ रहे आपसी संपर्क को प्रदर्शित किया। सिंगापुर के तीन दिवसीय दौरे पर मोदी श्री मरिअम्मा मंदिर गए और वहां पूजा-अर्चना में शामिल हुए। यह मंदिर देश का प्राचीनतम हिन्दू मंदिर है। सांस्कृतिक विरासतों को और मजबूत बनाते हुए प्रधानमंत्री मोदी यहां मरिअम्मा मंदिर गए।
इस मंदिर की स्थापना दक्षिण भारत के नागपट्टनम और कुड्डालूर जिलों के आव्रजकों ने की थी। मंदिर देवी मरिअम्मा को समर्पित है। इसके अलावा वह चूलिया मस्जिद भी गए जो भारत के कोरोमंडल तट के चूलिया मुस्लिम व्यापारियों द्वारा अंसार साहिब के नेतृत्व में अठारह सौ छब्बीस में बनाई गई थी। मस्जिद में मोदी को हरे रंग की शॉल भेंट की गई. मस्जिद के बाद मोदी बुद्ध टूथ रेलिक टेंपल और म्यूजियम गए। जाहिर है कि भारतीय संस्कृति के तत्व दूर दूर तक है। आज विदेश नीति में इन तत्वों का नरेंद्र मोदी उपयोग कर रहे है।







