Close Menu
Shagun News India
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Sunday, July 12
    Shagun News IndiaShagun News India
    Subscribe
    • होम
    • इंडिया
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • राजस्थान
    • खेल
    • मनोरंजन
    • ब्लॉग
    • साहित्य
    • पिक्चर गैलरी
    • करियर
    • बिजनेस
    • बचपन
    • वीडियो
    • NewsVoir
    Shagun News India
    Home»ब्लॉग»Current Issues

    सपा ,कांग्रेस गठजोड़ जैसा होगा हश्र

    By March 7, 2018Updated:March 7, 2018 Current Issues No Comments5 Mins Read
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Post Views: 576

    . आसान नही पच्चीस वर्ष के वैमनस्य का समाधान,

    . नकारात्मक विपक्षी सौदे से होगा भाजपा को लाभ

     

    डॉ दिलीप अग्निहोत्री

    राष्ट्रीय स्तर पर केसरिया उभार ने उत्तर प्रदेश में विपक्ष को गठजोड़ के लिए विवश कर दिया। लेकिन इन्होने आज की बीमारी के लिए पच्चीस वर्ष पुरानी दवा लेने का निर्णय लिया है। इस लंबी अवधि में बहुत कुछ बदल गया। गोमती का न जाने कितना पानी बह चुका । अब बसपा संस्थापक कांशीराम है नहीं, सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव उस पार्टी के लिए बेगाने हो गए, जिसकी स्थापना उन्होंने की थी। मतलब कांशीराम और मुलायम सिंह यादव ने जिस प्रयोग से आजीवन तौबा कर लिया था, उनके उत्तराधिकारी समयचक्र को वापस वही पहुंचाने को बेकरार है। इस जुनून में इन्होंने यह भी नहीं सोचा कि वह जिस राजनीतिक इलाज का सहारा ले रहे है, वह एक्सपायरी हो चुका है। यह फायदे की जगह नुकसान ही करेगा।

    राजनीति के फार्मूले में दो और दो का योग चार होना जरूरी नहीं होता। कई बार जोड़ने के लिए रखे गए दो और दो एक दूसरे को ही काटने लगते है। इस बेमेल गठजोड़ की भी यही दशा होनी है। तीस वर्षों से जिस सामाजिक वर्ग में उचित संवाद तक नहीं रहा, उन्हें एक चुनाव निशान पर जुड़ने का फरमान सुना दिया गया। इसके लिए भी कोई बड़ा सामाजिक लक्ष्य होता तो बात समझ में आती, लेकिन मात्र राज्यसभा की एक सीट के लिए अपने मतदाताओं को बेमेल दोस्ती का निर्देश दिया जा रहा है।

    दो और दो के चार न होने का उदाहरण उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में ही दिखाई दिया था। उसमें एक पक्ष सपा ही थी। इस प्रसंग की याद अभी ताजा है। कांग्रेस ने सत्ताईस साल यूपी बेहाल अभियान चलाया था। राहुल गांधी खटिया जनसभा कर रहे थे। सपा तब सत्ता में थी । उस पर भी खूब हमले किये गए। उधर सताइस साल यूपी बेहाल अभियान समाप्त हुआ , इधर सपा और कांग्रेस में चुनावी गठबंधन हो गया। सत्ताईस साल में जिस पार्टी ने सबसे अधिक शासन किया, कांग्रेस की उससे दोस्ती हो गई। इसके बाद मतदाताओं को इस दोस्ती की दुहाई दी जाने लगी। मतलब कई बार नेता मतदाताओं को नासमझ मान लेते है। यह सोचते है कि मतदाता उनकी सब बातों पर विश्वास करेगा। वह जब यूपी की बेहाली की जिम्मेदारी तय करेंगे, तो उसपर मतदाता विश्वास कर लेंगे, जब उन्हीं में से एक पार्टी से गठबंधन कर लेंगे तो , मतदाता उस पर भी वाह वाह करने लगेगा। परिणाम सामने आ गया। मतदाता को नासमझ मानने वालों को हतप्रभ होना पड़ा। सपा सवा दो सौ से सैंतालीस पर और कांग्रेस मात्र सात पर सिमट गई थी।

    साफ है कि विधानसभा चुनाव में सपा कांग्रेस गठजोड़ का भाजपा को फायदा मिला। यह इतिहास अपने को दोहराने की तैयारी में है। केवल एक किरदार बदला है। सपा वाहीन है। कांग्रेस की जगह बसपा आ गई। विश्वशनियता पहले से भी कम हो गई। जब मौका देखा कांग्रेस के साथ हो गए, फिर मौका देखकर उसे छोड़ कर बसपा के साथ हो गए। मतलब अकेले लड़ने का हौसला नहीं रहा, न दोस्ती की कद्र रही, न बातों का ऐतबार रहा। जबकि मायावती ने तो कोई गलतफहमी भी नही छोड़ी। दोस्ती का यह पैगाम राज्यसभा की एक सीट के लिए है। कुछ दिन पहले मायावती ने अपनी राज्यसभा सीट का कथित रूप में त्याग किया था। उनका कहना था कि उन्हें अपनी बात कहने का समय नहीं दिया जाता, इसलिए वह राज्यसभा की सदस्यता से त्यागपत्र दे रही है। क्या अब मायावती को लग रहा है कि राज्यसभा में अब उनकी बात सुनी जाएगी। यदि ऐसा है तो मायावती को बदले माहौल को बताना चाहिये। अन्यथा यह माना जायेगा कि मायावती ने निरर्थक ही राज्यसभा से त्यागपत्र दिया था।

    मायावती और अखिलेश अपनी राजनीतिक दोस्ती का वास्ता अपने मतदाताओं को नहीं दे सकते। क्योंकि इसके लिए फिर यह बताना होगा कि पिछले तीन दशक से जो चल रहा था, वह क्या था। एक दूसरे को किस प्रकार के संबोधनों से नवाजा जाता था। इसके अलावा सपा और बसपा दोनो इस समय अपनी सबसे दयनीय दशा में है। इनके नेताओं को यह गलतफहमी नहीं होनी चाहिए कि इनका वोटबैंक पहले की तरह मजबूत है। न इनमें अपने वोटबैंक को दूसरी पार्टी में ट्रांसफर कराने की हैसियत बची है। बसपा के वोटबैंक में सेंधमारी हो चुकी है। मायावती के सामने यह भी बड़ी समस्या है। सपा के साथ जाने के फैसले को उनके मतदाता पचा नहीं पा रहे है। भाजपा उनके सामने विकल्प के रूप में है।

    इस समय जम्मूकश्मीर, मेघालय, नगालैंड, त्रिपुरा में भाजपा और वहां के क्षेत्रीय दलों के गठबंधन की दलील दी जा रही है। लेकिन सपा ,बसपा की दोस्ती और उन गठबंधन में बहुत अंतर है। यदि सपा बसपा उस रास्ते का अमल करती तो आपत्ति की कोई बात नही होती।

    जम्मू कश्मीर विधानसभा चुनाव में भाजपा और पीडीपी एक दूसरे के खिलाफ पूरी ईमानदारी से लड़ी थी। परिणाम आये तो केवल इनके गठबंधन द्वारा ही सराकर बनाना संभव था। इसके लिए न्यूनतम साझा कार्यक्रम बना। यह तय हुआ कि बड़ी पार्टी का मुख्यमंत्री और कम संख्या वाली पार्टी का उप मुख्यमंत्री होगा।

    यही हुआ। पूर्वोत्तर राज्यों के कई क्षेत्रीय दल एनडीए में पहले ही शामिल थे । वह पहले ही न्यनतम साझा कार्यक्रम पर सहमत थे। इसमें आपत्ति की कोई बात नहीं है। सपा बसपा की दोस्ती किसी सिद्धान्त के तहत नहीं है। राजब्बर ने पहली बार ठीक कहा , उन्होंने इसे स्वार्थ पर आधारित गठबन्धन करार दिया है। बिहार में महागठबंधन जिस प्रकार विफल हुआ ह , उसका असर भी यहां होगा। सपा और बसपा की स्थिति तो कहीं ज्यादा पेचीदा है। यहां नेतृत्व का मुद्दा मायावती और अखिलेश के बीच सदैव बाधक बना रहेगा।

    जिस प्रकार कांग्रेस और सपा गठबन्धन से इन दोनों को नुकसान और भाजपा को फायदा हुआ था, वही नजारा गोरखपुर और फूलपुर में दिखाई देगा। मतदाताओं को ऐसे सिद्धांतविहीन और स्वार्थ पर आधारित गठजोड़ नागवार लगते है।

    .लेखक वरिष्ठ पत्रकार है

    Keep Reading

    An Example of Courage: When a Female Officer Won Hearts, Not Power

    साहस की मिसाल : जब एक महिला अफसर ने सत्ता नहीं, बल्कि दिल से जीता

    Ranbir Kapoor Becomes 'Maryada Purushottam Ram'

    समाज से मर्यादा का ह्रास, राम को फिर वनवास

    A new form of corruption: retired officials also found hoarding ill-gotten wealth.

    भ्रष्टाचार का नया रूप, अब रिटायर्ड अधिकारियों में भी लूट का खजाना

    ChatGPT, Gemini, Claude, DeepSeek AI

    एआई मौलिक सोच को चुनौती दे रहा है: क्या हम ‘सोचने’ की क्षमता खो रहे हैं?

    संसद का मानसून सत्र: राजनीति में आपराधिक छवि पर सख्त प्रहार का इंतजार

    13 वर्षीय मासूम पर 32 दरिंदों का 5 दिन का अत्याचार – समाज की शर्म और व्यवस्था की नाकामी

    Comments are closed.

    Advertisment
    Google AD
    We Are Here –
    • Facebook
    • Twitter
    • YouTube
    • LinkedIn

    EMAIL SUBSCRIPTIONS

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    About



    ShagunNewsIndia.com is your all in one News website offering the latest happenings in UP.

    Editors: Upendra Rai & Neetu Singh

    Contact us: editshagun@gmail.com

    Facebook X (Twitter) LinkedIn WhatsApp
    Popular Posts
    Sensation in London: Acharya Vinod Kumar’s ‘secret’ meeting with Yuvraj Singh’s family!

    लंदन में सनसनी: आचार्य विनोद कुमार की युवराज सिंह परिवार के साथ ‘सीक्रेट’ मुलाकात!

    July 10, 2026
    Aamir Khan Gifts Gauri Spratt a Rare Madagascar Ruby Ring

    आमिर-गौरी की शाही प्रेम कहानी: दुर्लभ रूबी रिंग बनी प्यार की सबसे चमकदार निशानी

    July 10, 2026
    Two distinct musical vibes, one shared atmosphere – the explosive energy of ‘Naachi Jaave’ and the magical charm of ‘Ghar Ki Mehfil’.

    मुंबई: संगीत की दो अलग धुनें, एक ही माहौल – ‘नाची जावे’ का धमाका और ‘घर की महफिल’ का जादू

    July 10, 2026
    An Example of Courage: When a Female Officer Won Hearts, Not Power

    साहस की मिसाल : जब एक महिला अफसर ने सत्ता नहीं, बल्कि दिल से जीता

    July 10, 2026
    Without striking at the root, it is all hypocrisy...

    अलीगंज अग्निकांड: 15 मौतों वाली इमारत पर बुलडोजर की तलवार! LDA का सख्त एक्शन

    July 10, 2026

    Subscribe Newsletter

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    Privacy Policy | About Us | Contact Us | Terms & Conditions | Disclaimer

    © 2026 ShagunNewsIndia.com | Designed & Developed by Krishna Maurya

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.

    Newsletter
    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading