Close Menu
Shagun News India
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Sunday, August 23
    Shagun News IndiaShagun News India
    Subscribe
    • होम
    • इंडिया
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • राजस्थान
    • खेल
    • मनोरंजन
    • ब्लॉग
    • साहित्य
    • पिक्चर गैलरी
    • करियर
    • बिजनेस
    • बचपन
    • वीडियो
    • NewsVoir
    Shagun News India
    Home»ब्लॉग»Current Issues

    जयेन्द्र सरस्वती के प्रति अन्याय

    By March 8, 2018 Current Issues No Comments6 Mins Read
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Post Views: 618

    श्याम कुमार 

    पिछले दिनों दो ऐसी घटनाएं हुईं, जो मीडिया के बदलते हुए चरित्र की ओर इशारा करती हैं और यह सिद्ध करती हैं कि हमारा मीडिया अब बाजार की गिरफ्त में पूरी तरह फंसता जा रहा है। पत्रकारिता का मानदण्ड भाव, भाषा एवं अभिव्यक्ति है, लेकिन पत्रकारिता की यह कसौटी अब जैसे गर्त में चली गई है। जिस प्रकार वस्तुओं की बिक्री का आधार उसके गुणों के बजाय नकली चमक-दमक बनती जा रही है, वैसी ही दुर्दशा हमारे मीडिया की भी हो रही है। पहले इलेक्ट्रॅानिक चैनलों ने पत्रकारिता के आदर्शों को छोड़ा, अब समाचारपत्र भी उसी लाइन पर चलने लगे हैं। जो दो विषेश घटनाएं हुईं, उनमें एक थी फिल्म-जगत की मशहूर अभिनेत्री श्रीदेवी का देहान्त तथा दूसरी घटना थी महान शंकराचार्य जयेन्द्र सरस्वती का निधन। जब यह समाचार आया कि श्रीदेवी का दुबई में हृदयगति रुकने से अचानक देहान्त हो गया तो सबकी सहानुभूति श्रीदेवी के प्रति उमड़ पड़ी तथा अखबारों में वह समाचार प्रथम पृश्ठ पर मुख्य शीषर्क के रूप में प्रकाशित हुआ तो लोगों ने उसे गलत नहीं समझा। लेकिन जब दूसरे दिन राज कि खुला कि श्रीदेवी की मृत्यु नहाने वाले टब में नशे में डूब जाने से हुई तो लोगों को उनकी मृत्यु के समाचार को अधिक महत्व दिया जाना उचित नहीं लगा। लेकिन समाचारपत्रों में तो जैसे श्रीदेवी के लिए क्रान्ति आ गई तथा उनमें कई-कई पृश्ठों प्रष्ठों पर सिर्फ श्रीदेवी की खबरें व गाथाएं बड़े विस्तार के साथ छापने की होड़ लग गई। कुछ प्रमुख समाचारपत्रों ने तो श्रीदेवी से सम्बन्धित खबर को अभूतपूर्व ढंग से तीन दिनों तक प्रथम पृश्ठ पर मुख्य शीषर्क के रूप में प्रकाशित किया।

    चैनलों एवं अखबारों में इस भयंकर प्रचार का बड़ा मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ा। श्रीदेवी के शव को आश्चर्यजनक रूप से तिरंगे में लपेटकर राजकीय सम्मान दिया गया। श्रीदेवी बहुत श्रेष्ठ कलाकार थीं तथा अभिनय में उनका योगदान अत्यन्त महत्वपूर्ण था। लेकिन अभिनय-जगत में नरगिस, मधुबाला, मीना कुमारी, वैजयन्ती माला, नूतन, सुचित्रा सेन, रेखा, शर्मिला टैगोर, शाबाना आजमी, स्मिता पाटिल, हेमा मालिनी आदि नायिकाएं अभिनय की जिस बुलंदी पर पहुंचीं, वह स्थान श्रीदेवी को नहीं मिल पाया था। यहां तक कि तमाम लोग माधुरी दीक्षित को उनकी तुलना में अधिक श्रेष्ठ मानते रहे हैं। भारतीय फिल्म-जगत के महानतम फिल्म-निर्देशक विमल राय व महानतम कलाकार अशोक कुमार को भी उनके अतुलनीय योगदान के बावजूद उनके शव को तिरंगे में लपेटे जाने एवं राजकीय सम्मान का गौरव नहीं मिला था। अखबारों एवं चैनलों में श्रीदेवी की अचानक मृत्यु होने का समाचार इतना अधिक प्रचारित किया गया कि उसका जनमानस पर बहुत बड़ा मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ा। समाजसेवा या राश्ट्रसेवा के क्षेत्र में श्रीदेवी की कोई सक्रियता नहीं थी और न उस दिशा में उनका कोई योगदान था। फिर भी प्रचार-माध्यमों ने उन्हें इतना बड़ा बना दिया कि उनकी शवयात्रा अभूतपूर्व हो गई। मुम्बई की सड़कों पर ऐसी अपार भीड़ उमड़ी, जो श्रीदेवी के प्रति दीवानगी की हद तक भाव-विह्वल थी। लोग शवयात्रा देखने के लिए पेड़ों व दीवारों पर भी लदे हुए थे। हर षख्स एक झलक पाने को बेताब था। अंतिम संस्कार की रस्में पूर्ण कराने के लिए तमिलनाडु से पंडितों को बुलाया गया था। शवयात्रा में सलमान खान, शाहरुख खान, ऐष्वर्य राय, विद्या बालन आदि बड़े-बड़े कलाकार फूट-फूटकर रो रहे थे।


    Image result for जयेन्द्र सरस्वती

    जयेन्द्र सरस्वती का कद हिमालय-सरीखा ऊंचा व महान था। वह प्रकाण्डतम विद्वानों में तो थे ही, अत्यन्त प्रगतिशील समाज-सुधारक भी थे। हिन्दू समाज में व्याप्त बुराइयों एवं कुरीतियों के वह विरोधी थे तथा उनके विरुद्ध वह बराबर सक्रिय रहते थे। दलितोत्थान उनका प्रिय विशय था। वह मानते थे कि हरिजनों के साथ बहुत अन्याय हुआ है तथा उनके प्रति किसी भी प्रकार का भेदभाव अक्षम्य अपराध है। जयेन्द्र सरस्वती को जब भी भोजन के निमंत्रण प्राप्त होते थे तो उनमें यदि किसी हरिजन का निमंत्रण होता था तो वहां जाना उनकी प्राथमिकता होती थी।

     

    दूसरी घटना के रूप में शंकराचार्य जयेन्द्र सरस्वती के निधन का समाचार सामने आया। उस समाचार से ही यह विदित हुआ कि वह कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे। अखबारों व चैनलों ने उनकी अस्वस्थता का समाचार देना उचित नहीं समझा था। जयेन्द्र सरस्वती का कद हिमालय-सरीखा ऊंचा व महान था। वह प्रकाण्डतम विद्वानों में तो थे ही, अत्यन्त प्रगतिशील समाज-सुधारक भी थे। हिन्दू समाज में व्याप्त बुराइयों एवं कुरीतियों के वह विरोधी थे तथा उनके विरुद्ध वह बराबर सक्रिय रहते थे। दलितोत्थान उनका प्रिय विशय था। वह मानते थे कि हरिजनों के साथ बहुत अन्याय हुआ है तथा उनके प्रति किसी भी प्रकार का भेदभाव अक्षम्य अपराध है। जयेन्द्र सरस्वती को जब भी भोजन के निमंत्रण प्राप्त होते थे तो उनमें यदि किसी हरिजन का निमंत्रण होता था तो वहां जाना उनकी प्राथमिकता होती थी। प्रयागराज में महाकुम्भ एवं अर्धकुम्भ के अवसरों पर उनसे भेंट करने एवं साक्षात्कार लेने के अवसर मुझे मिले थे। उनके अथाह ज्ञान से मैं बहुत प्रभावित था, साथ ही मैंने महसूस किया था कि वह हिन्दू समाज की एकता एवं हरिजनों के उत्थान के लिए सच्चे मन से समर्पित हैं। वह बार-बार इस बात पर जोर देते थे कि जातिगत भेदभाव हिन्दू समाज की एकता में बहुत बड़ी बाधा उत्पन्न कर रहा है, अतः इस पर प्रभावी रूप में अंकुश लगना चाहिए।

    ऐसे महान संत के निधन का समाचार चैनलों में तो उचित स्थान नहीं पा सका, अखबारों में भी उनकी घोर उपेक्षा की गई। प्रमुख समाचारपत्रों में उनके निधन का समाचार सिर्फ ‘डबुल काॅलम’ में प्रकाशित हुआ। केवल एक समाचारपत्र ने उनके बारे में विस्तृत विवरण प्रकाशित किया। यह वही शंकराचार्य जयेन्द्र सरस्वती हैं, जिन्हें तमिलनाडु की तत्कालीन मुख्यमंत्री जयललिता ने व्यक्तिगत द्वेशवश गिरफ्तार कर जेल में बंद करा दिया था। उस समय एक सज्जन ने प्रतिक्रिया व्यक्त की थी कि हिन्दू समाज मुर्दा-समाज है, इसीलिए उसने जयेन्द्र सरस्वती की गिरफ्तारी का प्रबल विरोध नहीं किया। जबकि इसके विपरीत मौलाना बुखारी के विरुद्ध अनेक गम्भीर मामलों में गिरफ्तारी के लिए बार-बार गैरजमानती वारंट निकल चुके हैं और वह अलानिया जहर उगला करते हैं, फिर भी इतने वर्षों में उनकी कभी गिरफ्तारी नहीं हुई।

    कांची पीठ के 82 वर्षीय शंकराचार्य जयेन्द्र सरस्वती जितने प्रकाण्ड विद्वान, चरित्रवान एवं मृदु स्वभाव के थे, उतने ही बड़े समाजसेवी भी थे। वह 18 जुलाई, 1935 को जन्मे थे तथा जयेन्द्र मठ के 69 वें शंकराचार्य थे। 1994 में वह इस पीठ के प्रमुख बने थे। उनका असली नाम सुब्रमण्यम महादेव अय्यर था। उन्होंने 22 मार्च, 1954 को 19 वर्ष की उम्र पूर्ण होने से पहले ही संन्यास ग्रहण कर लिया था। अयोध्या मसले को सुलझाने के लिए भी वह प्रयत्नशील रहते थे। वर्श 2009 एवं 2011 में वह अयोध्या आए थे। कांची मठ अनेक श्रेष्ठ अस्पतालों एवं शिक्षण-संस्थाओं का संचालन करता है। कांचीपीठ के मठ द्वारा अयोध्या में एक वेद विद्यालय भी संचालित किया जाता है। जयेन्द्र सरस्वती बहुत महान संत थे, जिनके निधन के समाचार को अखबारों एवं चैनलों द्वारा समुचित महत्व न दिया जाना पत्रकारिता के लिए कलंक के समान रहेगा।

    .लेखक वरिष्ठ पत्रकार है

    Keep Reading

    Trump Trapped in a Labyrinth: US President's Mounting Difficulties Amid the Maze of an Iran War

    चक्रव्यूह में फंसे ट्रंप: ईरान युद्ध की भूलभुलैया में अमेरिकी राष्ट्रपति की बढ़ती मुश्किलें

    District correspondents will not undergo a fresh LIU verification: Information Director

    जिला संवाददाताओं की दोबारा LIU जाँच नहीं होगी: सूचना निदेशक

    Maa Khaira Bhavani had appeared in the form of a divine beam of light.

    ज्योति पुंज के रूप में प्रकट हुईं थीं माँ खैरा भवानी

    People grappling with the unending problem of adulteration.

    मिलावट की अंतहीन समस्या से झूझते लोग

    India's Golden Burst at the Commonwealth Games: Boxing Makes History, Neeraj Shines Again

    कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का स्वर्णिम धमाका: मुक्केबाजी ने रचा इतिहास, नीरज ने फिर कमाल दिखाया

    India's Glorious Performance: Historic 'Golden Double' and Silver in Judo; Lovpreet Wins Silver in Weightlifting

    भारत का गौरवमयी प्रदर्शन: जूडो में ऐतिहासिक ‘गोल्डन डबल’ और सिल्वर, वेटलिफ्टिंग में लवप्रीत का सिल्वर

    Comments are closed.

    Advertisment
    Google AD
    We Are Here –
    • Facebook
    • Twitter
    • YouTube
    • LinkedIn

    EMAIL SUBSCRIPTIONS

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    About



    ShagunNewsIndia.com is your all in one News website offering the latest happenings in UP.

    Editors: Upendra Rai & Neetu Singh

    Contact us: editshagun@gmail.com

    Facebook X (Twitter) LinkedIn WhatsApp
    Popular Posts
    rampant sale of adulterated sweets in the market.

    त्योहार नजदीक, बाजार में नकली मिठाई का खुला खेल

    August 22, 2026
    Ritual bathing of the deity at Lakshman Tila with Ganga water from Bithoor; organization remains steadfast despite police restrictions.

    लक्ष्मण टीला पर बिठूर के गंगाजल से जलाभिषेक, पुलिस रोक के बावजूद संगठन अडिग

    August 22, 2026

    कोरिया इंडस्ट्री एक्सपो (KoINDEX) 2026 का 27 अगस्त को यशोभूमि में होगा शुभारंभ

    August 22, 2026

    गलगोटियास विश्वविद्यालय ने Microsoft के सहयोग और byteXL द्वारा संचालित उद्योग-एकीकृत AI एवं ML डिग्री का शुभारंभ किया

    August 22, 2026
    Ayushmann Khurrana's visit to Jalna A message of child safety and a secure childhood.

    आयुष्मान खुराना की जालना यात्रा : बच्चों की सुरक्षा और सुरक्षित बचपन का संदेश

    August 21, 2026

    Subscribe Newsletter

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    Privacy Policy | About Us | Contact Us | Terms & Conditions | Disclaimer

    © 2026 ShagunNewsIndia.com | Designed & Developed by Krishna Maurya

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.

    Newsletter
    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading