ऐशबाग रामलीला: जीवंत होती चित्र कथा

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डॉ दिलीप अग्निहोत्री

कुछ दिन पहले ही लखनऊ में अंतरराष्ट्रीय रामायण महोत्सव हुआ था। इसमें विश्व के अनेक देशों से आये कलाकारों ने रामलीला प्रस्तुत की थी। इन सभी देशों में नियमित रूप से रामलीला आयोजित होती है। जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल होते है। इन सभी की रामलीला प्रस्तुति में अंतर है, वस्त्र और सज्जा में भी भिन्नता है। लेकिन मूलभाव एक जैसा है। सभी की रामकथा में आस्था है, ये सभी उनको अपना पूर्वज मानते है। उपासना पद्धति अलग होने के बाद भी इन देशों में रामलीला व्यापक रूप से मनाई जाती है।

लखनऊ में ऐशबाग रामलीला की प्रतिष्ठा भी दूर दूर तक है। कुछ वर्ष पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इसे देखने ऐशबाग आये थे। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी तो अक्सर यहाँ आते थे। इस बार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ यह रामलीला देखने आए। उन्होंने परंपरागत ढंग से कलाकारों का स्वागत किया। वैसे भी योगी धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में कार्य कर रहे है।

यहां उन्होंने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम सांस्कृतिक एकता और सनातन आस्था का प्रतीक है। उनसे सभी को प्रेरणा मिलती है। आम जनमानस प्रभु श्रीराम के साथ अपने को जोड़ता है। श्रीराम के प्रति लोगों की आस्था रामलीला को सतत जीवन्तता प्रदान करती है।

कण कण में राम!

बता दें कि रामलीला हमारे अतीत की समृद्ध परम्परा से जुड़ती है। भारत ने सदैव मानवता के कल्याण के लिए आदर्श प्रस्तुत किए। प्रभु श्रीराम से हमें उच्च आदर्शों और मूल्यों की प्रेरणा मिलती है। भारत की परम्परा मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के बिना अधूरी है। गुरु-शिष्य, भाई-भाई, माता-पुत्र, पिता-पुत्र और पति-पत्नी सभी संबंधों में मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का चरित्र प्रेरणा देता है। रामराज्य की अवधारणा, सर्वांगीण विकास, सर्वसमावेशी, सर्वस्पर्शी समाज की रही है। यह लोक कल्याण की भावना से प्रेरित है।

रामराज्य एक आदर्श राज्य के रूप में जाना जाता है। उन्होंने कहा कि थाईलैण्ड, कोरिया, इण्डोनेशिया सहित विश्व के अनेक देशों में श्रीराम, अयोध्या और रामराज्य के प्रति आस्था व श्रद्धा का भाव है। अनेक देशों में रामलीला का मंचन किया जाता है। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री डाॅ दिनेश शर्मा सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे।

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