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    Home»धर्म»Spirituality

    आस्था और विश्वास का केन्द्र है चौक सन्तोषी माता मन्दिर

    ShagunBy ShagunMay 22, 2026 Spirituality No Comments5 Mins Read
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    Chowk Santoshi Mata Temple is the center of faith and belief
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    देवेश पाण्डेय

    पुराने लखनऊ की शान माने जाने वाले क्षेत्र चौक में स्थित सन्तोषी माता मन्दिर आस्था और विश्वास का अनुपम केन्द्र है। बात बहुत पुरानी नहीं है। बात है सन्ï 1972-73 की। आज ‘लोहिया पार्क’ के नाम से विख्यात, लेकिन सन्ï 1972-73 में ‘कम्पनी गार्डेन’ के नाम से पुकारे जाने वाले इस पार्क के बाहर एक कोने में गोल दरवाजे के ठीक सामने की ओर झोपड़ीनुमा एक छोटा सा घर हुआ करता था। इस घर में रहते थे काशी से लखनऊ आये हुए बाबा विश्व बन्धु बैरागी।

    फकक्ड़ मिजाज के बाबा बैरागी के सिर्फ दो ही काम थे, भगवान की भक्ति करना और समाजसेवा। बाबा बैरागी को न तो धन-दौलत की जरूरत थी और न ही उन्हें ऐश-औ-आराम भरी जिन्दगी उन्हें पसन्द थी। किसी का भी कोई काम होता, वह तुरन्त उसके लिए दौड़ पड़ते थे। किसी की भी बीमारी-हारी का उन्हें पता चलता तो बिना समय गवांये उसकी सेवा में जुट जाते थे। उनकी जिन्दगी का सिर्फ एक ही उद्देश्य था कि वह अपने जीवन में कुछ ऐसा करके जायें कि उनकी मृत्यु के बाद भी लोग उन्हें सदैव याद करें। उनका जीवन-यापन तो लोगों की सेवा-शुश्रूषा से ही हो जाता था। इस भले मानुष के लिए पेट की क्षुदा मिटाने के लिए कोई कमी नहीं थी। कोई न कोई खुदा का नेक बन्दा बाबा बैरागी की क्षुदा शान्त करने के वास्ते चार रोटियां सुबह-शाम दे ही जाता, अन्यथा भिक्षा में मिले आटे से वह अपनी भूख मिटाने के लिए रोटियां अपने हाथों से ही बना लेते थे।Chowk Santoshi Mata Temple is the center of faith and belief

    एक बार उन्हें रात्रि में सोते समय माता सन्तोषी देवी ने उन्हें स्वप्न दिया कि उनकी उनकी कुटिया में माता का मन्दिर बनना चाहिये। इसके बाद उन्होंने यह बात अपने प्रतिदिन मिलने वालों और आस-पास के लोगों को बतायी। सबने माँ का मन्दिर बनाने में अपनी स्वीकृति दे दी। बाबा विश्व बन्धु बैरागी ने सन्ï 1972 में सबके सहयोग से मन्दिर बनवाना प्रारम्भ कर दिया। मन्दिर बनवाने में पं. अवधेश नारायण मिश्र, राम किशन अवस्थी, शिव नारायण अग्रवाल, भोलानाथ कपूर और पन्ना लाल की विशेष भूमिका रही। इन सबने मिलकर जनता से सहयोग मांगा।

    Chowk Santoshi Mata Temple is the center of faith and belief
    आस्था और विश्वास का केन्द्र है चौक सन्तोषी माता मन्दिर

    जनता के आर्थिक सहयोग से ही इस मन्दिर का निर्माण किया गया था। सबके अथक प्रयासाों से सन्ï 1973-74 में मन्दिर बनकर तैयार हो गया। इसके बाद सन्तोषी माता की प्रतिमा के लिए विचार किया गया। इन सब लोगों को पता चला कि चौपटियां के रानी कटरा मोहल्ले में स्थित सन्दोहन देवी मन्दिर में सन्तोषी माता की प्रतिमा रखी हुई है, जो कतिपय कारणों से मन्दिर में नहीं लगायी जा सकी। इसके बाद बाबा विश्व बन्धु बैरागी, पं. अवधेश नारायण मिश्र, शिव नारायण अग्रवाल, भोलानाथ कपूर, पन्ना लाल तथा अन्य कई लोगों ने सन्दोहन देवी मन्दिर के प्रबन्धन से बात करके वहां रखी माँ सन्तोषी की प्रतिमा को इस नवनिर्मित मन्दिर में ले आये और यहां लाकर विधिवत उसकी विधिवत प्राण-प्रतिष्ठा करवा दी।

    मन्दिर के पुजारी पं. रवि प्रसाद मिश्र बताते हैं कि मन्दिर में माता सन्तोषी की प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठïा काशी से बुलाये गये विद्वत विद्वानों एवं पण्डितों द्वारा की गयी थी। पं. रवि प्रसाद मिश्र बताते हैं कि प्राण-प्रतिष्ठा के समस्त कार्यक्रमों के अन्तर्गत एक विशेष पूजन के लिए बाबा विश्व बन्धु बैरागी के हाथ में माँ की प्रतिमा के समक्ष देशी घी से भरा हुआ एक पीतल का कटोरा दिया गया और उस कटोरे में पीतल का एक दीपक रखा गया। उस जलते हुए दीपक से जब बाबा बैरागी माँ की आरती कर रहे थे तो उनकी हथेली से पिघला हुआ घी टपक रहा था। आश्चर्य की बात तो यह थी कि उनका हाथ जल भी नहींं रहा था। इसी प्रकार पं. अवधेश मिश्र ने भी उसी प्रकार माँ की आरती की। उनकी हथेली से भी उसी प्रकार घी टपक रहा था, उनकी हथेली में भी कोई प्रतिकूल असर नहीं हुआ। अत: इस पूजा के बाद यह सिद्घ हो गया कि सन्तोषी माता की प्रतिमा में शक्ति अथवा प्राण आ चुके हैं।

    पं. रवि प्रसाद मिश्र के अनुसार ये माता सन्तोषी हैं, ये सभी को सन्तोष प्रदान करती हैं। माता सन्तोषी हदृय से मांगी गयी सबकी मनोकामना पूर्ण करती हैं। आस्था और विश्वास के साथ माता से मांगी गयी मनोकामना आज तक किसी की भी अपूर्ण नहीं हुई है, अर्थात माता सन्तोषी सबका प्रत्येक कार्य सिद्घ करती हैं। शर्त ये है कि मांगी गयी मनोकामना किसी को नुकसान पहुंचाने वाली अथवा किसी के अहित की न हो। माता सन्तोषी अपने नाम के अनुरूप ही अपने हर भक्त के मन को सन्तोष से भर देती हैं।

    चौक स्थित सन्तोषी माता मन्दिर में एक अत्यन्त प्राचीन एक कुआं भी है। यह कुंआ कितना पुराना है इसकी किसी को जानकारी नहीं है। मन्दिर परिसर में भगवान शिव जी, बृहस्पति भगवान, भैरों बाबा, कात्याायनी देवी, माता दुर्गा और राधा-कृष्ण की प्रतिमाएं भी प्राण-प्रतिष्ठिïत हैं। इस मन्दिर में किसी ने साईं बाबा की मूर्ति भी लगवा दी है। मन्दिर के प्रबन्धक पं. विष्णु अवस्थी के अनुसार मन्दिर परिसर में ही मन्दिर के प्रणेता बाबा विश्व बन्धु बैरागी का चित्र भी लगा हुआ है। पूर्व अध्यक्ष अजय कमार अग्रवाल उर्फ गिरिजा अग्रवाल के कार्यकाल में भी मन्दिर में कई कार्य करवाये गये।

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