दीपोत्सव का वैश्विक कीर्तिमान

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डॉ दिलीप अग्निहोत्री

अयोध्या में दीपोत्सव का कीर्तिमान स्थापित हुआ। पांच लाख इक्यावन हजार दीपकों से यह नगरी जगमग हुई। एक ही स्थान पर चार लाख दीपक प्रज्ववलित थे। गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड की टीम अयोध्या आई थी। उसके लिए यह दृश्य अभूतपूर्व और अकल्पनीय थे। उसने विश्व रिकॉर्ड का प्रमाण पत्र अधिकृत रूप में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनन्दी बेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपा। मुख्यआतिथि फिजी की डेप्युटी स्पीकर व मंत्री वीणा भटनागर भी इस दृश्य की साक्षी बनी। उनके पूर्वज इसी विरसत से जुड़े थे। वह रामायण की प्रति लेकर फिजी गए थे। वीणा भटनागर के लिए यह भावनात्मक रूप में भी महत्वपूर्ण पल रहा होगा। भारत ही नहीं विश्व की नजर अयोध्या पर थी।

गिनीज बुक की टीम के आगमन से ही विश्व में जिज्ञाषा थी। फिजी की मंत्री मुख्य अतिथि थी, इसलिए वहां भी अयोध्या को लेकर जिज्ञाषा थी। अनेक देशों की रामलीला का यहाँ मंचन हुआ, इन सभी देशों तक उत्साह था। श्रीराम शोभायात्रा का शुभारंभ भी वीणा भटनागर ने किया था। अयोध्या में आयोजित हुए इस बार के दीपोत्सव को गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में दर्ज हो गया। दीपोत्सव में पांच लाख इक्यावन हजार दीप जलाकर विश्व रिकार्ड बनाया गया। राम की पैड़ी के घाटों पर चार लाख दस हजार व ग्यारह अन्य स्थलों पर एक लाख इक्यावन हजार दीप जलाए गए।

वीणा भटनागर पूरे भक्तिभाव में थी। उन्होंने रामचरित मानस की चौपाई मंगल भवन अमंगल हारी का गायन किया। वहां उपस्थिति जनसमुदाय भी भावभिभोर हुआ। भारत में कोई नेता यह करे तो उसे साम्प्रदायिक करार दिया जाता है। वीणा भटनागर के साथ ही जनसमुदाय ने भी मंगल भवन अमंगल हारी गुनगुनाया। वीणा भटनागर ने अपने संबोद्धन में भी यही भावना दिखाई।

रामराज्य के प्रति आस्था व्यक्त की। कहा कि उन्हें भगवान राम के शहर में आने का अवसर मिला है। इसके लिए वह स्वयं को भाग्यशाली मानती हैं। बचपन से अयोध्या के बारे में सुनती आ रही हैं आज वो अयोध्या में हैं। यह जीवन का स्मरणीय पल है। कहा कि यहाँ आकर वह धन्य हो गई। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि अयोध्या में एक दिन भगवान राम के शासन में प्रचलित शासन की पौराणिक अवधारणा रामराज्य स्थापित होगी।

भारत और फिजी के रिश्ते निरन्तर मजबूत हो रहे हैं। सांस्कृतिक, सामाजिक व आर्थिक समृद्धि की दिशा में दोनों देश परस्पर मिल जुलकर कार्य कर रहे हैं। वहां पर भारतीय संस्कृति व हिन्दी का संरक्षण व संवर्धन किया जा रहा है। फिजी के विद्यार्थियों को भारत सरकार की तरफ से छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है, जिससे उन्हें अध्ययन में मदद मिलती है। भारत की चिकित्सा सुविधाओं का लाभ भी फिजीवासियों को मिलता है।

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