डॉ दिलीप अग्निहोत्री
खादी वस्त्र के साथ साथ महात्मा गांधी की विचारधारा की भी प्रतीक थी। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में अपने जो अहिंसक अस्त्र तैयार किये थे, उनमें खादी का भी स्थान था। सत्यग्रह उनका ऐसा अहिंसक अस्त्र था जो क्रूर ब्रिटिश सत्ता को भी झुकने के लिए विवश कर देता था। इसी के साथ उन्होंने स्वदेशी का विचार भी जोड़ा था। अंग्रेज भारत के कुटीर उद्योगों को नष्ट कर रहे थे। इसके मुकाबले के लिए गांधी जी ने चरखा को प्रतीक बनाया था। इससे भारत का वस्त्र कुटीर उद्योग संचालित होता था। जिसका निर्यात विदेशों में भी होता था। गांधी जी ने भारत के गांव गांव में फैले इस कुटीर उद्योग को बचाने की मुहिम चलाई थी। इसीलिए उन्होंने यहां बने खादी को अपनाने का आह्वान किया था। देखत ही देखते खादी देशभक्ति की प्रतीक बन गई। यह मान लिया जाता था कि खादी पहनने वाले स्वतंत्रता संग्राम सेनानी है। आजादी के बाद इस खादी विचार पर उचित ध्यान नहीं दिया गया। धीरे धीरे यह राजनीतिक परिधान तक सिमट गई। प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने नए सिरे से खादी को विचार के रूप में प्रस्तुत किया। इससे खादी का प्रयोग और उत्पादन में रिकॉर्ड बढोत्तरी हुई।
यही काम उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कर रहे है। उन्होंने गांधी जयंती पर उत्तर प्रदेश खादी महोत्सव का उद्घाटन किया। इस अवसर पर खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग तथा फ्लिपकार्ट के मध्य हस्ताक्षरित एमओयू अभिलेखों का आदान प्रदान किया गया। मुख्यमंत्री ने सोलर चरखे, इलेक्ट्रिक चाक, दोना पत्तल बनाने की मशीन के लाभार्थियों को प्रमाण पत्र वितरित किए। इनके अलावा, उन्होंने प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम, मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना तथा पं दीन दयाल ग्रामोद्योग योजना के लाभार्थियों को चेक प्रदान किए। विभिन्न योजनाओं के माध्यम से लाभार्थियों को सौ करोड़ रुपए के ऋण प्रदान किए गए।

उन्होंने कहा कि वर्तमान वित्तीय वर्ष में एक अक्टूबर से इकतीस दिसम्बर तक खादी की बिक्री पर पांच प्रतिशत की विशेष छूट प्रदान की जाएगी। उनतालीस सौ इकाइयों पर चौतीस करोड़ रुपए का मूलधन ऋण के रूप में अवशेष है। इसके सम्बन्ध में एकमुश्त समाधान योजना के लाभ की व्यवस्था के लिए प्रस्ताव बनाया जाएगा वर्तमान में उत्तर प्रदेश खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड द्वारा संचालित किए जा रहे दस स्थानों के प्रशिक्षण केन्द्रों को बढ़ाकर कौशल विकास के साथ जोड़ते हुए प्रत्येक मण्डल में एक प्रशिक्षण केन्द्र, कुल अठारह केन्द्र स्थापित किए जायेगे। गांधी जी का सपना स्वदेशी और स्वावलम्बन का था, जिसका आधार खादी बनी।
खादी केवल एक वस्त्र नहीं, बल्कि एक विचार और भारत की पहचान है। खादी ने स्वाधीनता आन्दोलन को एक नई ऊंचाई दी। खादी व ग्रामोद्योग के क्षेत्र में व्यापक सम्भावनाएं हैं। इसमें कम पूंजी में सर्वाधिक रोजगार उपलब्ध कराने की क्षमता रखता है। इस क्षेत्र में विगत दो वर्षों में तीन हजार तीन सौ पचास करोड़ रुपए के ऋण व अनुदान उपलब्ध कराए गए, जिनसे आठ लाख से अधिक रोजगार सृजित हुए। उन्होंने कहा कि पूर्व में जो कम्बल कारखाने बन्द हो गए थे, उन्हें पुनः प्रारम्भ किया गया। यह कारखाने अच्छी क्वालिटी के कम्बल का उत्पादन कर रहे हैं। ग्राम स्वराज्य और स्वावलम्बन की अवधारणा को मूर्त रूप देने के लिए खादी की उत्कृष्टता को बढ़ाना होगा। इसे आधुनिक तकनीक के साथ जोड़ना होगा। इसके दृष्टिगत सोलर और इलेक्ट्रिक चरखो को सरकार प्रोत्सान दे रही है। प्राथमिक विद्यालयों में बच्चों को खादी की गुणवत्तापूर्ण यूनीफाॅर्म उपलब्ध कराने के प्रयास चल रहे है।
खादी उत्पाद के लिए नये उपकरणों के साथ प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। परम्परागत रोजगार और उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए उप्र माटी कला बोर्ड का गठन किया गया है। अप्रैल माह से जून माह तक कुम्हार और प्रजापति समुदाय के लोगों को तालाबों की मिट्टी निःशुल्क उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। इससे उत्पादों के लिए लोगों को निःशुल्क मिट्टी प्राप्त हो सकेगी। जल संचयन व संरक्षण कार्यक्रम को बढ़ावा मिलेगा। उत्पादों की पैकेजिंग और डिजाइन में सुधार लाकर इन्हें पूरे देश में लोकप्रिय किया जा सकता है। एक जनपद-एक उत्पाद’ योजना के माध्यम से प्रत्येक जनपद के विशिष्ट उत्पादों और उनसे जुड़े शिल्पियों व कारीगरों को लाभ हो रहा है। उत्पादों के सम्बन्ध में अमेजन के साथ एमओयू हस्ताक्षरित किया जा चुका है।
योगी ने कहा कि स्वच्छता गांधी जी का मूलमंत्र था। उनका मानना था कि स्वच्छता को जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए। यदि व्यक्ति स्वच्छता को नहीं अपनाता तो वह स्वस्थ नहीं होता। स्वस्थ न होने की स्थिति में वह अनुशासित नहीं होता। इसी सिद्धान्त को मानते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वच्छ भारत मिशन प्रारम्भ किया था। यह मिशन एक जनान्दोलन का रूप ले चुका है। पूरा देश ओडीएफ घोषित किया जा चुका है। उत्तर प्रदेश को स्वच्छ भारत मिशन में सर्वाधिक जन सहभागिता के लिए प्रथम पुरस्कार मिला है।






