क्या यह तीसरे विश्व युद्ध का आगाज है ?

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वायरल इशू : जी के चक्रवर्ती

मौजूदा समय की विश्वव्यापी परिदृश्य को देखते हुए कहा जा सकता है कि दुनिया के दो देश एक अमेरिका और ईरान के मध्य तनाव पूर्ण स्थित गहराती चली जा रही है। ईरान के जनरल कासिम सुलेमानी को अमेरिका द्वारा खत्म किये जाने के बाद से ईरान का अमेरिका से बदला लेने की बातों के सामने आने के बाद ईरान द्वारा अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलो से हमला किये जाने से अमेरिका और ईरान के मध्य दिन-प्रतिदिन तनाव के और अधिक जोर पकड़ने से एक बार युद्ध जैसे हालात पैदा होते जा रहे है। ऐसी स्थिति में इन दोनो परमाणु शक्ति सम्पन्न देश ने अगर अपना धैर्य खो कर अमेरिका यदि ईरान पर हमला बोल देता है तो ऐसे में दुनिया एक बार तीसरे विश्व युद्ध की दहलीज पर आ खड़ी होगी। ऐसा कहना कोई अतिशयोक्ति की बात नही होगी कि दोनों देश के मध्य युद्ध की स्थिति में एक तरफ जहां ईरान के पक्ष मे रूस, चीन जैसे देश खड़े नजर आयेंगे तो दूसरी ओर अमेरिका के पक्ष में ब्रिटेन, फ्रांस जैसे देश खड़े नजर आएंगे।

अभी 8 जनवरी बुधवार सुबह के समय इराक के अनबर प्रान्त में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला बोल अमेरिकी सैन्य ठिकानों को नुकसान पहुंचाने के काम को अंजाम दिया गया, जिससे ईरान एवं अमेरिका के मध्य तनाव और भी अधिक बढ़ गया है। एक तरफ ईरान के अयातुल्ला अली खामेनेई ने कहा है कि “अमेरिका की दादागीरी के विरुद्ध ईरान ने संघर्ष किया है। अमेरिका पर किया गया हमला सफल रहा है। यह हमला अमेरिका के मुँह पर एक तमाचा है। ( ईरान के सर्वोच्च नेता ) ” दूसरी तरफ “डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी हमले पर कहा है कि ‘अभी सब कुछ ठीक है। ईरान ने इराक स्थित दो सैन्य अड्डों पर मिसाइल दागी है।

नुकसान एवं मौतों का जायजा लिया जा रहा है। मै जल्दी ही इस पर अपना वक्तव्य जारी करूँगा।” (डोनाल्ड ट्रंप अमेरिकी राष्ट्रपति) यदि इन दोनों राष्ट्रों के मध्य युद्ध छिड़ता है तो निश्चित रूप से ईरान पर अमेरिका बहुत भारी पड़ने वाला देश है। ट्रम्प ने कहा कि हम किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु हथियार संपन्न नहीं बनने देंगे। इस दृष्टिकोण से यदि हम बात करें तो अमेरिका की सैन्य शक्ति का जवाब नहीं, ईरान उससे बहुत पीछे है यदि इन दोनों देशों के मध्य जंग हुई तो भारत को भी बहुत बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है, क्योंकि ईरान के साथ हमारे देश का सम्बन्ध अच्छे है और बहुत हद तक हम ईरान से आयातीत पेट्रोलियम पदार्थों पर आश्रित होने के साथ ही साथ भारत से ईरान को निर्यात होने वाले सामानों के बंद हो जाने की अवस्था मे हमारे राष्ट्र को मिलने वाला विदेशी मुद्रा भी प्रभावित होगा। वहीं पर ईरान के पास इराक, मलेशिया जैसे देशों का बल होने के साथ ही साथ वह रूस-चीन जैसे देशों से भी उसके पक्ष में उसे सहयोग देने की प्रबल उम्मीदें है।

रूस एवं चीन के बाद फायर पावर के मामले में इस्राइल एक महत्वपूर्ण देश है। इस्राइल भी मौजूदा हालतों पर तटस्थ निगाहे बनाये हुए है। अपने चारो ओर दुश्मनों से घिरा इस्राइल भी अमेरिका का ही साथ देने वाला है। दुसरी तरफ फ्रांस बहुत अच्छी स्थिति में है। ब्रिटेन समेत पूरा यूरोप अभी सुरक्षात्मक और युद्ध जैसे हालात रोकने के प्रयास में है। लेकिन युद्ध जैसी स्थिति आई तो अमेरिका का साथ दे सकते हैं।

भारतीय सामरिक विशेषज्ञों की मानें तो विश्व का पूरा सैन्य संतुलन इन्हीं देशों के इर्द गिर्द घूम रहा है। लेकिन अभी ईरान ने अमेरिका से बदला लेने के लिए एक नए तरीके को आजमाया है। जिसमे ईरान ने एक नये अंदाज में अमेरिका पर हमला किया है जिससे अमेरिका के पसीने छूटने लगे हैं ईरान ने अमेरिका पर साइबर अटैक कर अमेरिका के एक बड़े सरकारी एजेंसी की वेबसाइट को हैक कर लिया है। ईरान द्वारा सरकारी वेबसाइट हैक कर इसपर शीर्ष सैन्य कमांडर कासिम सुलेमानी की मौत का बदला लेने जैसे अपने इरादे वाला एक संदेश को प्रकाशित किया है।

वैसे हालातों पर यदि हम गौर करें तो ऐसा लगता है कि पूर्व में कही गई नास्त्रेदमस की भविष्यवाणी सत्य होने की दहलीज पर खड़ी है।

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