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    टोटके को तोड़ नोयडा में नवनिर्माण

    By March 4, 2020 Current Issues No Comments6 Mins Read
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    डॉ दिलीप अग्निहोत्री

    उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री की कुर्सी के नोयडा लिंक पर दिलचस्प किवंदन्ति रही है। यह टोटका दशकों तक चर्चा में रहा। इसके तहत यह मान्यता बनी कि नोयडा की यात्रा करने वाले मुख्यमंत्री की सत्ता में वापसी मुश्किल हो जाती है। इतना ही नहीं कार्यकाल पूरा करने में भी बाधा आ जाती है। इस आधार पर आकलन किया गया कि योगी आदित्यनाथ भी इस टोटके पर विश्वास करेंगे। लेकिन उन्होंने कार्यकाल या सत्ता में वापसी को महत्व नहीं दिया। मुख्यमंत्री के संवैधानिक दायित्वों का निर्वाह ही महत्वपूर्ण होता है। योगी ने इसी को वरीयता दी। सत्ता में वापसी का निर्णय मतदाताओं को करना होता है,प्रदेश में सुशासन की स्थापना करना मुख्यमंत्री का कर्तव्य है। योगी इसी का निर्वाह कर रहे है।

    उंन्होने सत्ता में आने के कुछ समय बाद ही नोयडा टोटके को नकार दिया था। वह कई बार नोयडा गए। इस बार भी हजारों करोड़ रुपये की विकास योजनाओं का लोकार्पण व शिलान्यास किया। योगी की तरह कल्याण सिंह,राम प्रकाश गुप्ता और राजनाथ सिंह ने भी कार्यकाल पर नहीं कार्यों को वरीयता दी थी। कल्याण सिंह और योगी आदित्यनाथ में विचारधारा के स्तर पर समानता है,लेकिन दोनों को अलग अलग परिस्थितियों में प्रदेश का कमान मिली थी।

    कल्याण सिंह जब मुख्यमंत्री बने, तब रामजन्म भूमि मंदिर आंदोलन उफान की स्थिति में था। समाज की भावनाओ का स्तर बिल्कुल अलग था,इसके लिए तब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी। राज्यपाल भी उसी की मर्जी से नियुक्त होते थे।
    यह सब प्रतिकूल परिस्थितियां थी।

    कल्याण सिंह जब तक मुख्यमंत्री रहे,उंन्होने सुशासन को प्राथमिकता दी। योगी के सामने उस तरह की प्रतिकूलता नहीं थी। केंद्र में भाजपा की सरकार उनके साथ थी, और है। मंदिर आंदोलन के प्रति पहले जैसा उत्साह नहीं था। सभी पक्ष सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को स्वीकार करने हेतु तैयार थे। इस समस्या का शांतिपूर्ण समाधान हुआ।

    योगी को राज्यपाल के रूप में राम नाईक व आनन्दी बेन जैसे अनुभवी लोगों का मार्गदर्शन भी मिला। सुशासन के स्तर पर योगी शुरू से कटिबद्ध रहे है। प्रदेश की पिछली सरकार मोदी सरकार की योजनाओं का मखौल उड़ाती थी। योगी ने इन सब पर अमल करके विकास का नया अध्याय लिख दिया। करोड़ो गरीबो को योजनाओं का सीधा लाभ मिला।
    इन्वेस्टर्स समिट,निवेश प्रस्तावों के शिलान्यास, धान व गेहूं खरीद,लंबित सिंचाई योजनाओं पर कार्य, आदि अनेक विषयों पर योगी ने अपने पूर्ववर्तियों के मुकाबले बड़ी लकीर मात्र तीन वर्ष में खींच दी है। योगी के पहले प्रदेश की राजनीति में जाति मज़हब के समीकरण सर्वाधिक प्रभावी थे।

    योगी की बड़ी सफलता यह कि उन्होंने विकास को प्रदेश राजनीति का मुख्य मुद्दा बना दिया। अभी हुए विधानसभा के बजट सत्र में यह देखा गया। योगी विकास के मुद्दे पर डटे रहे। अपनी उपलब्धियां गिनाई,विपक्ष अन्य मुद्दों के भरोसे रहा। योगी अपनी बात आमजन तक पहुंचाने में सफल रहे।

    उनका पूरा फोकस विकास पर रहा।इस आधार पर कहा जा सकता है कि शेष दो वर्षों में वह इस मोर्चे पर ज्यादा तेजी से बढ़ेंगे।इसी के आधार पर वह विधानसभा चुनाव में जा सकते है। इसी विचार की प्रेरणा से वह अभी नोयडा यात्रा पर पहुंचे। योगी आदित्यनाथ ने गौतमबुद्धनगर में नवीन ओखला औद्योगिक विकास प्राधिकरण नोएडा की दो हजार आठ सौ करोड़ रुपए से अधिक की परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया। विगत तीन वर्षों में नोएडा, ग्रेटर नोएडा एवं यमुना विकास प्राधिकरण के अंतर्गत विकास कार्यों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

    योगी ने कहा कि पिछली सरकारों की अधूरी परियोजनाओं तथा नई परियोजनाओं को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाया जा रहा है। गौतमबुद्धनगर स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित हो रहा है। यहां देश की सबसे बड़ी मल्टीलेवल पार्किंग का भी योगी ने लोकार्पण किया। जिसकी क्षमता सात हजार पांच सौ वाहन है। तीन सौ चवालीस करोड़ रुपए की लागत से जिला चिकित्सालय बनाया गया है। योगी ने सुझाव दिया कि यहां निवास करने वाले पूर्व अधिकारियों के अनुभवों का लाभ इस क्षेत्र के विकास के लिए लिया जाए। इस क्षेत्र के विकास में मीडिया का भी अहम भूमिका है। नोएडा में सभी मीडिया हाउस मौजूद हैं। नोएडा में किये गये अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के बड़े विकास कार्याें को जानकारी का सकारात्मक प्रभाव होगा।

    मीडिया के इस प्रयास से पूरी दुनिया के उद्यमी यहां निवेश कर सकेंगे। जेवर में अन्तर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट से भी यहां निवेश को अपरोक्ष बढ़ावा मिलेगा। इसके पहले शामली में योगी ने न्यू इंडिया की तर्ज पर न्यू यूपी निर्माण के प्रति कटिबद्धता दिखाई। इसके मद्देनजर योगी आदित्यनाथ प्रदेश के सभी हिस्सों में अनवरत यात्राएं करते है। इन सभी जगहों पर वह विकास पर ही जोर देते है। शामली में उंन्होने करीब दो सौ नब्बे में करोड़ रुपए लागत की अठारह परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया। इनमें पुलिस लाइन के आवासीय एवं अनावासीय भवनों का निर्माण व अन्य कार्यो भी शामिल है। यह शामली के लिए सौगात थी। लेकिन इसको यहीं तक सीमित नहीं समझना चाहिए।

    योगी ने कहा कि जिन जिलों में अभी तक पुलिस लाइन एवं जिला मुख्यालय नहीं है, उनमें भी इसका निर्माण कार्य प्रगति पर है। शीघ्र ही सभी जिलों में यह सुविधा उपलब्ध हो जाएगी।पुलिस लाइन,जिला मुख्याल,आवासीय तथा अनावासीय भवनों की सभी जिलों में व्यवस्था हो जाएगी। पुलिस को अत्याधुनिक हथियार उपलब्ध कराए जा रहे है। आधुनिक तकनीक को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। पुलिस भर्ती की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया गया है। एक लाख सैंतीस लाख हजार पुलिस कर्मियों की भर्ती की गई है। नए भारत की तर्ज पर नए प्रदेश का भी निर्माण किया जा रहा है। विकास के प्रत्येक क्षेत्र में परिवर्तन आया है। विकास कार्यों के लिए धन की कमी नहीं है।

    गन्ना किसानों के बकाए का भुगतान सुनिश्चित किया गया है। प्रदेश में चीनी एक सौ इक्कीस चीनी मिलें कार्यरत हैं। पहले प्रदेश में मात्र बारह राजकीय मेडिकल काॅलेज थे। वर्तमान सरकार के कार्यकाल में उनतीस नए मेडिकल काॅलेजों का निर्माण हो रहा है। सभी जनपदों में मेडिकल काॅलेज की व्यवस्था किए जाने के लिए नीति बनायी गई है। जिन जनपदों में मेडिकल कॉलेज स्थापित नहीं हैं, उनमें मेडिकल कॉलेज बनाए जाएंगे। प्रत्येक जनपद में विगत दो फरवरी से प्रत्येक रविवार को मुख्यमंत्री आरोग्य मेलों का आयोजन किया जा रहा है।

    आयुष्मान भारत योजना के तहत गोल्डेन कार्ड वितरित किए जा रहे हैं। केंद्र व राज्य की सभी पोषण और स्वास्थ्य योजनाओं से गरीबों को लाभान्वित किया जा रहा है। न्यू यूपी में एक्सप्रेस वे का भी नेटवर्क होगा। पूर्वांचल एक्सप्रेस वे इसी वर्ष बन जाएगा। बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे का शिलान्यास हो चुका है। इसी के साथ प्रदेश में रिकार्ड निवेश हो रहा है। निर्धन आवास और शौचालय निर्माण में भी उत्तर प्रदेश का रिकार्ड बेहतर है।

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