पराजित हुआ राफेल पर राजनीतिक अभियान

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डॉ दिलीप अग्निहोत्री

यह सन्योग था कि विजयदशमी और वायु सेना दिवस पर भारत को राफेल मिला। विशेषज्ञों के अनुसार इससे हमारी वायु सेना मजबूत होगी। इसी के साथ राफेल पर चलाया गया नकारात्मक अभियान भी पराजित हुआ। फ्रांस ने विजयदशमी के मौके पर पहला राफेल लड़ाकू विमान सौंप दिया। विमान निर्माता कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एरिक ट्रेपर ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को पहला विमान अधिकारिक रूप से सुपूर्द किया। इसके बाद उन्होंने इस विमान की शस्त्र पूजा की। रक्षा मंत्री सिंह ने कहा कि राफेल फ्रांसिसी शब्द है जिसका अर्थ होता है हवा का झोंका। यह अपने नाम को चरितार्थ करेगा। राजनाथ ने कहा कि आज भारत और फ्रांस के बीच सामरिक संबंधों में नए आयाम स्थापित हुए हैं। भारतीय वायु सेना की क्षमताएं बढाने,उसे आधुनिक बनाने के लिए कटिबद्ध है। दसाल्ट कंपनी समय सीमा दो हजार बाइस तक सभी राफेल विमानों की आपूर्ति कर देगी।

इस विमान के बेड़े में शामिल होने से भारतीय वायु सेना की ताकत कई गुना बढ़ जाएगी। राजनाथ ने कहा कि आज का दिन ऐतिहासिक है। इसी दिन भारतीय वायु सेना की स्थापना हुई थी और पहला राफेल आज ही मिला है। आज दशहरा भी है जो बुराई नर अच्छाई की जीत के रूप में मनाया जाता है, इसलिए यह दिन प्रतीकात्मक है। निर्माता कंपनी दसाल्ट के सीईओ एरिक ट्रेपर, भारतीय वायु सेना के प्रमुख आर के भदौरिया, फ्रांससी रक्षा मंत्री फ्लोंरेंस पार्ली और दोनों देशों के कई अन्य अधिकारी मौजूद थे। इससे पहले उन्होंने फ्रांसिसी राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने रक्षा और सुरक्षा के मुद्दों पर चर्चा की। राष्ट्रपति से मुलाकात से पहले राजनाथ फ्रांसिसी रक्षा मंत्री फलोरेंस पार्ली और मैक्रों के रक्षा सलाहकार बर्नाड रोगेल से भी भेंट की थी।
कई वर्ष तक हंगामा चला, लेकिन विजय दशमी पर विजयी रहा। राफेल भारत को मिला।

रक्षा मंत्री ने भारतीय मान्यता के अनुरूप फ्रांस में ही अस्त्र पूजन किया,राफेल पर ओम अंकित किया। भारत का खुश होना स्वभाविक है। इसी के साथ आसमान तक भारत की ताकत बढ़ गई। लेकिन राफेल डील को रद्द कराने के लिए कांग्रेस ने जो आसमान सिर पर उठाया था, उसे भूलना मुश्किल है। तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष ने इसे लेकर कोई कसर नहीं छोड़ी थी। प्रत्येक जनसभा में वह चौकीदार चोर का नारा लगवाते थे।कहा कि गोवा के एक मंत्री के ऑडियो में राफेल की सच्चाई है। इर पर लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि क्या वह इस बात की गारंटी लेते हैं कि ऑडियो सही है। फिर क्या था, राहुल पलट गए, ऑडियो सुनने की जिद छोड़ दी। फिर जेपीसी बनाने की मांग से पीछे हट गए।

अनिल अंबानी और एचएएल को लेकर कई बार सवाल उठाये गए। अंबानी ,भारत और फ्रांस की सरकार, दौसा कम्पनी सभी ने इन आरोपों को निराधार साबित किया। एचएएल को उबारने के लिए केन्द्र सरकार ने बावन बार सहायता दी थी। राफेल डील में दसॉ ने एचएएल से निर्मित होने वाले लड़ाकू विमान की गारंटी लेने से मना कर दिया था। उसका कहना था कि एचएएल के साथ मिलकर भारत में एक लड़ाकू विमान बनाने में उसे ढाई गुना अधिक समय लगता। उसने किसी और पार्टनर को चुनने के लिए देश की ऑफसेट नीति का सहारा लिया। इस ऑफसेट पार्टनर नीति को पूर्व की यूपीए सरकार ने दो हजार तेरह में बनाया था। कांग्रेस सरकार दस में कोई करार नहीं कर सकी थी। दो हजार सलाह में जो सौदा हुआ, उसके आधार पर बेयर एयरक्राफ्ट अर्थात युद्धक प्रणालियों से विहीन विमान का दाम यूपीए की कीमत से नौ प्रतिशत कम था और हथियारों से युक्त विमान यूपीए की तुलना में भी बीस प्रतिशत सस्ता था।

आफसेट का मतलब है कि किसी विदेशी से सौदा करते हैं तो कुछ सामान अपने देश में खरीदना होता है। राफेल में तीस से पचास प्रतिशत सामान भारत में खरीदने की बात है। कुल आफसेट उनतीस हजार करोड़ रुपये का है। कांग्रेस ने एक लाख तीस करोड़ होने का आरोप लगाया था। आफसेट तय करने का काम विमान तैयार करने वाली कंपनी का था। कांग्रेस राफेल खरीद प्रक्रिया जानने को बेताब थी। उसका भी माकूल जबाब मिला। राफेल की खरीद के दौरान पूरी प्रक्रिया का पालन किया गया। अनुबंधन वार्ता समिति, कीमत वार्ता समिति आदि की चौहत्तर बैठकें हुई। सुप्रीम कोर्ट को इसकी जानकारी दी थी। कांग्रेस का राफेल अभियान भी इस विजयदशमी को पराजित हुआ।

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