मुंबई। बॉलीवुड में एक समय दीया मिर्जा को ‘पनौती’ कहकर फिल्में देने से इनकार कर दिया जाता था। जो प्रोड्यूसर-डायरेक्टर पहले उन्हें साइन करने के लिए लाइन में लगते थे, वही बाद में दूर भागने लगे। पल भर में यह खूबसूरत एक्ट्रेस बेरोजगार हो गईं।
ऐश्वर्या राय से तुलना ने बढ़ाई मुश्किलें
19 साल की उम्र में जब दीया मिर्जा ने बॉलीवुड में कदम रखा, तब उनकी लगातार तुलना ऐश्वर्या राय से की जाने लगी। लोग उनसे ऐश्वर्या जैसा लुक और खूबसूरती की उम्मीद करने लगे। दीया ने खुद बताया कि यह तुलना उनके लिए बहुत दबाव और ‘खतरनाक ट्रेंड’ बन गई।
उन्होंने कहा, “जब मैं शुरू हुई थी, तो लगातार ऐश्वर्या राय से तुलना होती थी। मैं इसे कॉम्प्लिमेंट मानती थी, लेकिन इससे अनरियलिस्टिक ब्यूटी स्टैंडर्ड्स की उम्मीदें जुड़ गईं।” इस दबाव में दीया ने लाइट कलर के लेंस भी पहनने शुरू कर दिए थे।
‘पनौती’ का टैग और बेरोजगारी का दौर
शुरुआती फिल्मों के फ्लॉप होने के बाद इंडस्ट्री ने दीया को ‘पनौती’ (bad luck) का टैग दे दिया। कोई भी उन्हें फिल्म में काम देने को तैयार नहीं था। दीया ने खुलासा किया कि प्रोड्यूसर्स उन्हें देखते ही मुंह फेर लेते थे।
उन्होंने याद करते हुए कहा, “मुझे पनौती कहा जाने लगा। मैं राजकुमार हिरानी के पास गई और उनसे कहा – ‘मेरे पास कोई काम नहीं है, प्लीज मुझे कुछ दो।’”
‘संजू’ ने बदली किस्मत
राजकुमार हिरानी की फिल्म संजू में मिला रोल दीया की जिंदगी का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। इस फिल्म ने उन्हें दोबारा पहचान दिलाई और ‘पनौती’ वाले टैग को तोड़ने में मदद की।
आज दीया मिर्जा न सिर्फ एक सफल अभिनेत्री हैं, बल्कि पर्यावरण कार्यकर्ता और प्रोड्यूसर के रूप में भी अपनी अलग पहचान बना चुकी हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने लोगों की अपनी बारे में बनी गलत सोच को चुनौती दी और खुद की राह बनाई।
यह कहानी बताती है कि बॉलीवुड में सफलता कितनी अनिश्चित हो सकती है – एक दिन ‘नेशनल क्रश’ बनकर चर्चा में रहने वाली अभिनेत्री अगले ही दिन बेरोजगार हो सकती है। दीया मिर्जा की मेहनत और हौसले ने इस संघर्ष को जीत में बदल दिया।






