राष्ट्रीय पुस्तक मेला: भविष्य बनाने को भा रही किताबों की संगत

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  • मोतीमहल लान में राष्ट्रीय पुस्तक मेला
  • निरंकारी संत्संग में मिला अर्जित ज्ञान को कर्मों में सार्थक करने का संदेश
लखनऊ, 17 अगस्त। ‘हायर स्टडीज़ की बुक्स लेने के लिए ये मेला मेरे जैसे स्टूडेण्ट्स के लिए अच्छा माध्यम है।’- कहना है एमबीए स्टूडेण्ट मौलिक शाह का। शहनाज कहती हैं- ‘किताबों में सिमटा इल्म किताब सलामत रहने तक पढ़ने वालों तक पहुंचता है, इसी इरादे से मैं यहां ग़रीब बच्चों के लिए संदेश वाली किताबें यहां स ेले जाकर बांटती हूं।’
बहुत कुछ ऐसे ही विचार यहां मोतीमहल वाटिका लाॅन राणा प्रताप मार्ग में चल रहे राष्ट्रीय पुस्तक मेले में उमड़ने वाले पुस्तक प्रेमियों के मिलते हैं। समापन की ओर बढ़ चला नालेज हब का यह पुस्तक मेला आने वाले रविवार को खत्म हो जायेगा।
मेले में युवक-युवतियों की दिलचस्पी उच्च अध्ययन की किताबों में ज्यादा दिख रहा है। यूनीक पब्लिकेषन, उपकार प्रकाशन व धनकड़ पब्लिकेशन के साथ ही अन्य कई स्टालों पर उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं से सम्बंधित पाठ्य सामग्री है। नियोगी बुक्स के स्टाल पर खासकर अंग्रेज़ी में कला, वास्तुकला, इतिहास, संस्कृति, खानपान, सामाजिक विज्ञान से सम्बंधित किताबें खूब हैं। भारतीय कला प्रकाशन के स्टाल पर आर्ट ट्रेजर आफ द वल्र्ड, अजंता, बी एन आर्टिस्ट इन टेन स्टेप जैसी किताबों के साथ अंग्रेजी-हिन्दी की विविध विषयों की किताबें लोग पसंग कर रहे हैं। बच्चों को अमर चित्रकथा, राजा पाकेट बुक्स और किड्स फैक्ट्री जैसे स्टाल भा रहे हैं।
मेले की गतिविधियों की बात करें तो आज सुबह मेला मंच पर गीतिका गंगोत्री समारोह में रचनाकारों ने विविध विषयों पर सस्वर गीत पढ़कर आज की गीत धारा को रूपायित किया। त्रिलोचन एवं मुक्तिबोध की स्मृति में वरिष्ठ पत्रकार सुभाष राय की अध्यक्षता व संदीप कुमार के संचालन में आयोजित कार्यक्रम में जहां बीज वक्तव्य कौशल किशोर ने रखा वहीं, डी.एम.मिश्र ने त्रिलोचन पर रची कविता सुनाने के साथ उनकी कुछ कविताओं का पाठ किया और रचनाओं पर व्यापक नजरिया अजीत प्रियदर्शी ने अपनी दृष्टि से रखा। ऊषा राय ने मुक्तिबोध की रचना ‘अंधेरे में’ का पाठ किया तो प्रो.सूरज बहादुर थापा ने अपने वक्तव्य में मुक्तिबोध को गहन विचारशील कवि बताया।
लेखक से संवाद के अंतर्गत डा.दिनेशचन्द्र अवस्थी ने अपने रचना संसार से अवगत कराया। डा.अमिता दुबे के संचालन में चले कार्यक्रम में दूसरे रचनाकार महेन्द्र भीष्म ने अपनी बुंदेली भाषा से ओतप्रोत कहानी ‘क्या करे!’ का पाठ करने के साथ किन्नरों को सम्मान देने के आग्रह के साथ अपने उपन्यास ‘मैं पायल…’ पर भी पायल सिंह, गीतिका वेदिका आदि की उपस्थिति में चर्चा की और पवन उपाध्याय जैसे सुधी श्रोताओं के सवालों के जवाब दिए।
संत निरंकारी मिशन के संत नोतन दास की अगुवाई में हुए सत्संग समारोह मंे उन्होंने बताया कि निरंकार परमात्मा सर्वत्र है और उसे प्रयासों से समझा और जाना जा सकता है। उन्होंने कहा कि किताबें ज्ञान की संवाहक हैं किंतु, उनसे अर्जित ज्ञान जब कर्मों में समाहित हो जाता है तभी वह ज्ञान सार्थकता पाता है। इस अवसर पर स्मृति पाण्डेय व श्रेया के दलों ने- ‘ये सब तुम्हारा करम है आका…’ जैसे संदेश भरे समूह गीतों की प्रस्तुति दी। सत्संग का समापन सभी को प्रसाद वितरण से हुआ।
पुस्तक मेले में आज 18 अगस्त 2017
पूर्वाह्न 11.00 बजे – नये हस्ताक्षर: नवांकुर गीतकारों की प्रतियोगिता
अपराह्न 3.30 बजे – राही मासूम रजा के व्यक्तित्व और कहानियों पर चर्चा
शाम 5.30 बजे –  डा.मधु पंत द्वारा बाल कहानियों का पाठ
शाम 7.00 बजे- सिरमौर सम्मान समारोह- 2017

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