लखनऊ, 09 मार्च, 2020: मर्यादा पुरषोत्तम श्री राम चंद्र जी का जन्म अयोध्या की जिस पावन धरती पर हुआ उस भूमि को नफरत और संकीर्ण मानसिकता वाली हठ ने कुरुक्षेत्र बना दिया था। ज़िद से उत्पन्न टकराव की इस आग पर सियासी रोटियो से सियासी पेट भरे। राम जन्मभूमि विवाद पर राजनीति दल तंदुरुस्त और सत्तानशीन हुए।
अंततः इस मुद्दे का देर से ही सही दुरुस्त अंत हुआ। न्यायालय का अंतिम फैसला आया, जिसका देश-दुनिया ने स्वागत किया। दलीलों और सुबूतों के साथ आखिरकार न्यायसंगत फैसले में अयोध्या की विवादित भूमि राम जन्मभूमि साबित हुई।
राम की नगरी अयोध्या (फैजाबाद) में जन्मे वरिष्ठ पत्रकार और लेखक भास्कर दुबे की पुस्तक गोरक्षपीठ राम जन्मभूमि के स्वतंत्रता संग्राम के सबसे महत्वपूर्ण कालखंड का ज्ञानवर्धन करती है। राम जन्मभूमि की संघर्षगाथा में गोरखपुर का क्या योगदान रहा.. महंत अवेद्यनाथ और गुरु महंत दिग्विजयनाथ ने रामजन्मभूमि आंदोलन को किस तरह जन आंदोलन की सूरत दी।
रामभक्ति ने ना सिर्फ दुनिया के करोड़ों रामभक्तों को इस आंदोलन से जोड़ा बल्कि भारत के संतों की कड़ियां आपस में जुड़ीं तब जाकर राम जन्मभूमि पर भव्य राममंदिर निर्माण के संकल्प की मजबूत माला गुंथी।
धर्म- आध्यात्म पसंद पर्यटकों और दुनिया के करोड़ों राम भक्तों को आकर्षित करने जा रही भव्य राम मंदिर के निर्माण की सारी तैयारियां बड़े जोरशोर से हो रही हैं। ऐसे में गुरु अवेद्यनाथ की विरासत को आगे बढ़ाते हुए राम मंदिर आंदोलन को गति देने वाले बढ़ाने महंत अवेद्यनाथ के योगदान को भास्कर दुबे की पुस्तक गोरक्षपीठ ने बख़ूबी बयां किया है।
गौरवान्वित करने वाली बात ये है कि संतों की इस गुरु -शिष्य परंपरा की अगली कड़ी में योगी आदित्यनाथ जो मंहत अवेद्यनाथ के शिष्य हैं आज वो उत्तर.प्रदेश के मुखिया हैं। और उनके कार्यकाल, देखरेख और सरपरस्ती में राम जन्मभूमि पर भव्य राम मंदिर निर्माण का सपना साकार होने जा रहा है।
- नवेद शिकोह







