कैग की रिपोर्ट में खुलासा, युद्ध के लिए पर्याप्त गोला-बारूद नहीं

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भारत के नियन्त्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) की एक रिपोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार की मुश्किलें खड़ी कर दी हैं, पीएम मोदी और उनके मंत्रिमंडल के सदस्य लगातार कह रहे हैं कि उनकी सरकार दुश्मनों के साथ कोई समझौता नहीं करेगी, लेकिन कैग की रिपोर्ट में साफ तौर से कहा गया है कि भारत के पास लंबे समय तक युद्ध के लिए पर्याप्त गोला-बारूद नहीं है. सीएजी ने सेना के पास गोला-बारूद में भारी कमी होने की रिपोर्ट संसद में पेश की है. रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से लिखा है कि अगर भारतीय सेना को लगातार 10 दिन युद्ध करना पड़ गया तो उसके पास पर्याप्त गोला-बारूद नहीं है.

कैग रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय सेना ने अपनी ताकत बढ़ाने के लिए 2009 से 2013 के बीच हथियार, फाइटर प्लेन आदि खरीदने के लिए कई डील किए हैं, लेकिन उनमें से अधिकतर जनवरी 2017 तक पेंडिंग थे. यह भी कहा गया है कि हमारे देश की ऑर्डिनेंस फैक्ट्री जरूरत के हिसाब से गोला-बारूद का निर्माण नहीं कर पा रही है. 2013 के बाद ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड की ओर से सप्लाई में कोई बढ़ोत्तरी नहीं हुई है. सेना की जितनी डिमांड है उतना गोला-बारूद तैयार नहीं किया जा रहा है.

बताया गया है कि ऑपरेशन की अवधि की जरूरतों के हिसाब से सेना में वॉर वेस्टेज रिजर्व रखा जाता है. रक्षा मंत्रालय ने 40 दिन की अवधि के लिए इस रिजर्व को मंजूरी दी थी. 1999 में आर्मी ने तय किया कि कम से कम 20 दिन की अवधि के लिए रिजर्व होना ही चाहिए. सितंबर 2016 में पाया गया कि सिर्फ 20 फीसदी गोला-बारूद ही 40 दिन के मानक पर खरे उतरे. 55 फीसदी गोला बारूद 20 दिन के न्यूनतम स्तर से भी कम थे. हालांकि इसमें बेहतरी आई है, लेकिन बेहतर फायर पावर को बनाए रखने के लिए बख्तरबंद वाहन और उच्च क्षमता वाले गोला-बारूद जरूरी लेवल से कम पाए गए.

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